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सिविल अस्पताल में मुलाजिमों की हड़ताल से मरीज आए आफत में

Tue, 23 Nov 2021 02:12 AM IST
Mohali Bureau मोहाली ब्‍यूरो
Updated Tue, 23 Nov 2021 02:12 AM IST
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The patients came in trouble due to the employees' strike in the civil hospital
मोहाली। सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के गृह जिले में स्थित जिला सिविल अस्पताल में तीन दिनों से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मुलाजिम हड़ताल पर चल रहे हैं। इससे अस्पताल का काम पूरी तरह से रुक गया है। मरीजों को अस्पताल में धक्के खाने पड़ रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी दवाईयों को लेकर उठानी पड़ रही हैं और मरीजों को दवाइयां बाजार से खरीदनी पड़ रही हैं। मुलाजिमों का कहना है कि हमें मजबूरी में संघर्ष की राह पर आना पड़ा है। सोमवार को मुलाजिमों ने सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।
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जानकारी के मुताबिक सिविल अस्पताल में हड़ताल के बीच मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। जहां एक तरफ प्रशासन की ओर से डेंगू के मामले कम होने की बात कहीं जा रही है। वहीं, अस्पताल में रोजाना डेंगू के मरीज भर्ती हो रहे हैं। माइक्रोबायोलॉजी विभाग के हड़ताल पर चले जाने से डेंगू टेस्ट समय पर नहीं हो पर रहे। ऐसे में जिन मुलाजिमों को अब जिम्मेदारी सौंपी गई है। वह समय पर रिपोर्ट मुहैया करवाने में असमर्थ है। अनुभवी स्टाफ के हड़ताल पर चले जाने से जहां अन्य स्टाफ को परेशान आ रही है। मोहाली जिले की सभी निजी अस्पतालों के डेंगू टेस्ट सिविल अस्पताल की माइक्रोबायोलॉजी विभाग के द्वारा ही देखे जाते हैं, जो पिछले कई दिनों से बाहर का कोई भी टेस्ट जांच के लिए नहीं ले रहें हैं। इसके साथ ही मुफ्त दवा केंद्र पर एक मेडिकल छात्र द्वारा दवाएं दी जा रही हैं जो दवा छात्र को समझ नहीं आती, वह मरीज को बाहर से लेने के लिए बोल रहा था।
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बाहर से खरीदन पड़ी दवाईयां
मैं शुगर का मरीज हूं, मेरी दवा इसी अस्पताल से चलती है। सोमवार को अचानक पैरों में दर्द हुआ तो डॉक्टर ने आठ तरह की दवाएं लिखीं, जिनमें से दो दवाएं ही यहां से मिलीं, जबकि बाकी की पांच दवाएं बाहर से लेनी पड़ रही हैं। - हरिंदरपाल सिहं, फेज-1
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दवाई के लिए खाने पड़ रहे धक्के
मुझे कल से बुखार है। उम्र ज्यादा है, चलना फिरना मुश्किल है। ऐसे में मुझे दवा केंद्र से सिर्फ पेरासिटामोल ही मिली है। बाकी की दवा मुझे नहीं पता कहां से मिलेगी। मेरे पास इतने पैसे भी नहीं कि मैं बाहर से बाकी दवा ले सकूं। - कमला देवी
दवा न मिलने से उठानी पड़ी परेशानी
मां अक्सर बीमार रहती है। जब भी उन्हें दिखाना होता है उन्हें सिविल अस्पताल लेकर आना होता है। सुबह से उनके सीने में दर्द हो रहा था। डॉक्टर ने जो दवा लिखी, उनमें से एक दवा ही यहां मिली बाकी दवा बाहर से लेने जा रहा हूं।

- पवन कुमार, फेज-2 निवासी।
दवाई तक नहीं मिली
मेरा बेटे यश के कान में दो दिनों से दर्द हो रहा था। डॉक्टर की लिखी एक भी दवा यहां नहीं मिली। दवा केंद्र वाले सभी दवाएं बाहर से लेने के लिए बोल रहे हैं।
- जगवत रानी, सेक्टर-56 निवासी।
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