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आठ साल से न्यू चंडीगढ़ में बन रहे कैंसर अस्पताल का सपना अधर में
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मोहाली/मुल्लांपुुर। पंजाब समेत उत्तरी भारत के कैंसर के मरीजों को उचित इलाज मुहैया करवाने के लिए न्यू चंडीगढ़ में स्थापित किए जा रहे होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र लोगों के लिए सपना बनकर गया है। आठ साल से चल रहा संस्थान का निर्माण कार्य अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। इस वजह से मरीजों को इलाज के लिए पीजीआई या अन्य निजी अस्पतालों में ही जाना पड़ रहा है। पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि जनवरी में अस्पताल का फेज-1 शुरू हो जाएगा। लेकिन विधानसभा चुनाव होने के चलते इसके औपचारिक शुभारंभ के लिए और इंतजार करना पड़ सकता है।
जानकारी के मुताबिक न्यू चंडीगढ़ में यह संस्थान मेडिसिटी फेज-1 में बसाया जा रहा है। करीब 50 एकड़ में स्थापित किए जा रहे प्रोजेक्ट का नींव पत्थर तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने रखा था। इस प्रोजेक्ट पर 663.74 करोड़ रुपये की लागत से काम किया जा रहा है। हालांकि नींव पत्थर के बाद काफी समय तक प्रोजेक्ट पर काम शुरू नहीं हो पाया था, क्योंकि प्रोजेक्ट का काम अलॉट नहीं हुआ था। इसके बाद पर्यावरण अनापत्ति हासिल करने में देरी हुई। इसके बाद प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुआ। लेकिन प्रोजेक्ट उस रफ्तार से नहीं चला। इसके बाद विधानसभा, लोकसभा चुनाव आए। वहीं, इसके बाद कोरोना की वजह से प्रोजेक्ट में देरी हुई। हालांकि पंजाब सरकार की योजना था कि इस बार चुनाव में जाने से पहले प्रोजेक्ट शुरू कर दिया जाएगा। चीफ सेक्रेटरी पंजाब से लेकर अन्य अधिकारियों ने अस्पताल की साइट का दौरा तक किया था। लेकिन फिर भी प्रोजेक्ट का काम सिरे नहीं चढ़ पाया। एक ओर सूत्रों की मानें तो किसी प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए फायर से लेकर विभिन्न विभागों से एनओसी लेनी होती है। जिसके लिए अभी तक काम चल रहा है। वहीं, दूसरी ओर प्रोजेक्ट इतने तेजी से चला कि काम शुरू नहीं हो पाया है। अस्पताल के पूर्व डायरेक्टर राकेश कपूर ने कहा कि उनका कार्यकाल अभी संस्थान से पूरा हो गया है। हालांकि जहां तक प्रोजेक्ट की बात है तो अब विधानसभा चुनाव के बाद ही शुरू होगा। साइट पर काम तेजी से चल रहा है। डीसी डॉ. ईशा कालिया से जब इस संबंध में संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट को लेकर मीटिंग हुई थी। उम्मीद है कि जल्द ही प्रोजेक्ट शुरू होगा। इससे इलाके के लोगों का फायदा होगा।
अस्पताल में मिलेंगी यह सुविधाएं
यह अत्याधुनिक 300 बेड वाला अस्पताल पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश सहित पूरे उत्तरी क्षेत्र को कवर करेगा। यहां पर कैंसर की थर्ड स्टेज के मरीजों का भी इलाज किया जाएगा। इस अस्पताल में रेडियोथैरेपी, रेडियोलॉजी, सीटी स्कैन, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे, मैमोग्राफी, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, कीमोथेरेपी, डे-केयर वार्ड, पैथोलॉजी और लैब सुविधाएं, माइनर ओटोलॉजी, नेत्र विज्ञान और चिकित्सा सेवाएं प्रदान करवाई जाएंगी।
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मरीजों के ठहरने का भी रहेगा इंतजाम
डॉक्टरों और नर्सों के लिए रिहायशी हॉस्टल और फैकल्टी के लिए रिहायश की सुविधा होगी। इसके अलावा अस्पताल में विशेष तौर पर बनाई गई धर्मशाला में कैंसर के मरीजों और उनके परिजनों के लिए ठहरने की सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों के परिजनों के लिए रहने की व्यवस्था होने से उन्हें राहत मिलेगी। जानकारी के मुताबिक प्रोजेक्ट के पहले चरण में कैंसर टेस्टिंग और ओपीडी की सुविधा दी जाएगी। इसके लिए तैयारियां की जा रही हैं। राज्य सरकार के पास अपने पंजाब के सभी जिलों में कैंसर पीड़ितों का रिकॉर्ड है। उम्मीद है कि इससे मरीजों का फायदा होगा।
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जानकारी के मुताबिक न्यू चंडीगढ़ में यह संस्थान मेडिसिटी फेज-1 में बसाया जा रहा है। करीब 50 एकड़ में स्थापित किए जा रहे प्रोजेक्ट का नींव पत्थर तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने रखा था। इस प्रोजेक्ट पर 663.74 करोड़ रुपये की लागत से काम किया जा रहा है। हालांकि नींव पत्थर के बाद काफी समय तक प्रोजेक्ट पर काम शुरू नहीं हो पाया था, क्योंकि प्रोजेक्ट का काम अलॉट नहीं हुआ था। इसके बाद पर्यावरण अनापत्ति हासिल करने में देरी हुई। इसके बाद प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुआ। लेकिन प्रोजेक्ट उस रफ्तार से नहीं चला। इसके बाद विधानसभा, लोकसभा चुनाव आए। वहीं, इसके बाद कोरोना की वजह से प्रोजेक्ट में देरी हुई। हालांकि पंजाब सरकार की योजना था कि इस बार चुनाव में जाने से पहले प्रोजेक्ट शुरू कर दिया जाएगा। चीफ सेक्रेटरी पंजाब से लेकर अन्य अधिकारियों ने अस्पताल की साइट का दौरा तक किया था। लेकिन फिर भी प्रोजेक्ट का काम सिरे नहीं चढ़ पाया। एक ओर सूत्रों की मानें तो किसी प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए फायर से लेकर विभिन्न विभागों से एनओसी लेनी होती है। जिसके लिए अभी तक काम चल रहा है। वहीं, दूसरी ओर प्रोजेक्ट इतने तेजी से चला कि काम शुरू नहीं हो पाया है। अस्पताल के पूर्व डायरेक्टर राकेश कपूर ने कहा कि उनका कार्यकाल अभी संस्थान से पूरा हो गया है। हालांकि जहां तक प्रोजेक्ट की बात है तो अब विधानसभा चुनाव के बाद ही शुरू होगा। साइट पर काम तेजी से चल रहा है। डीसी डॉ. ईशा कालिया से जब इस संबंध में संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट को लेकर मीटिंग हुई थी। उम्मीद है कि जल्द ही प्रोजेक्ट शुरू होगा। इससे इलाके के लोगों का फायदा होगा।
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अस्पताल में मिलेंगी यह सुविधाएं
यह अत्याधुनिक 300 बेड वाला अस्पताल पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश सहित पूरे उत्तरी क्षेत्र को कवर करेगा। यहां पर कैंसर की थर्ड स्टेज के मरीजों का भी इलाज किया जाएगा। इस अस्पताल में रेडियोथैरेपी, रेडियोलॉजी, सीटी स्कैन, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे, मैमोग्राफी, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, कीमोथेरेपी, डे-केयर वार्ड, पैथोलॉजी और लैब सुविधाएं, माइनर ओटोलॉजी, नेत्र विज्ञान और चिकित्सा सेवाएं प्रदान करवाई जाएंगी।
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मरीजों के ठहरने का भी रहेगा इंतजाम
डॉक्टरों और नर्सों के लिए रिहायशी हॉस्टल और फैकल्टी के लिए रिहायश की सुविधा होगी। इसके अलावा अस्पताल में विशेष तौर पर बनाई गई धर्मशाला में कैंसर के मरीजों और उनके परिजनों के लिए ठहरने की सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों के परिजनों के लिए रहने की व्यवस्था होने से उन्हें राहत मिलेगी। जानकारी के मुताबिक प्रोजेक्ट के पहले चरण में कैंसर टेस्टिंग और ओपीडी की सुविधा दी जाएगी। इसके लिए तैयारियां की जा रही हैं। राज्य सरकार के पास अपने पंजाब के सभी जिलों में कैंसर पीड़ितों का रिकॉर्ड है। उम्मीद है कि इससे मरीजों का फायदा होगा।