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हड़ताल : कर्मियों का गुस्सा आसमान पर, सफाइ-सीवरेज की व्यवस्था चरमराई
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जीरकपुर। नगर परिषद जीरकपुर के कर्मचारियों की हड़ताल सोमवार को छठे दिन भी जारी रही। इसमें शहर की सफाई व्यवस्था और सीवरेज सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो गई हैं। शहर के कई इलाकों में कूड़े के ढेर लगने शुरू हो गए हैं, जबकि सीवरेज संबंधी शिकायतों का समाधान भी ठप पड़ा हुआ है। अपनी मांगों को लेकर आक्रोशित कर्मचारियों ने नगर परिषद परिसर में एकत्र होकर पंजाब सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और चेतावनी दी कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
यूनियन अध्यक्ष प्रदीप कुमार सूद की अध्यक्षता में आयोजित धरने के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। पत्रकारों से बातचीत में सूद ने कहा कि कर्मचारियों की जायज मांगों को लेकर पूरे पंजाब में प्रदर्शन और हड़तालें चल रही हैं। जीरकपुर में भी आंदोलन का पहला चरण शुरू हो चुका है, जो लंबा खिंच सकता है। उन्होंने कहा कि हड़ताल खत्म करवाना या इसे लंबा खींचना अब पूरी तरह सरकार के हाथ में है।
उन्होंने बताया कि कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में ठेकेदारी प्रथा को तत्काल समाप्त करना, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना और न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये निर्धारित करना शामिल है। उनका कहना है कि यदि सरकार इन मांगों को स्वीकार कर लेती है तो कर्मचारी तुरंत काम पर लौटने को तैयार हैं, अन्यथा संघर्ष और तेज किया जाएगा।
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हड़ताल के चलते शहर की जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जगह-जगह कूड़े के ढेर लगने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। हालांकि यूनियन नेताओं ने इस स्थिति पर खेद जताते हुए शहरवासियों से सहयोग की अपील की है। उनका कहना है कि मात्र 10 हजार रुपये मासिक वेतन में परिवार का गुजारा करना बेहद मुश्किल हो गया है, इसलिए यह संघर्ष उनके भविष्य और अधिकारों के लिए जरूरी है।
रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन भी आया समर्थन में
सफाई कर्मचारियों की हड़ताल को अब स्थानीय निवासियों का भी समर्थन मिलने लगा है। वार्ड-13 और 14 की सोसाइटियों के लोगों ने गठित यूनिफाइड रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन ढकोली ने कर्मचारियों की मांगों का समर्थन किया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा और उनकी टीम ने कहा कि सफाई कर्मचारियों की मांगें पूरी तरह जायज हैं और सरकार को जल्द समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के दौर में 10 हजार रुपये में किसी परिवार का गुजारा संभव नहीं है। सरकार को कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी करने के साथ-साथ उनकी अन्य मांगों को भी जल्द मान लेना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कोरोना काल के दौरान सफाई कर्मचारियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर काम किया था और आज भी शहर को स्वच्छ रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे कर्मियों की अनदेखी करना उचित नहीं है।
जीरकपुर नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी (ईओ) परविंदर सिंह भट्टी से आग्रह है कि कच्चे कर्मचारियों के लिए जल्दी ही कोई नया रास्ता निकालकर इनकी समस्या का हल किया जाए। हड़ताल के चलते शहर से कचरा नहीं उठ पा रहा है। लोग परेशान हैं। जल्द ही हम हड़ताल खत्म करा देंगे। -अमित गुप्ता, एसडीएम, सब डिवीजन डेराबस्सी।
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यूनियन अध्यक्ष प्रदीप कुमार सूद की अध्यक्षता में आयोजित धरने के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। पत्रकारों से बातचीत में सूद ने कहा कि कर्मचारियों की जायज मांगों को लेकर पूरे पंजाब में प्रदर्शन और हड़तालें चल रही हैं। जीरकपुर में भी आंदोलन का पहला चरण शुरू हो चुका है, जो लंबा खिंच सकता है। उन्होंने कहा कि हड़ताल खत्म करवाना या इसे लंबा खींचना अब पूरी तरह सरकार के हाथ में है।
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उन्होंने बताया कि कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में ठेकेदारी प्रथा को तत्काल समाप्त करना, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना और न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये निर्धारित करना शामिल है। उनका कहना है कि यदि सरकार इन मांगों को स्वीकार कर लेती है तो कर्मचारी तुरंत काम पर लौटने को तैयार हैं, अन्यथा संघर्ष और तेज किया जाएगा।
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हड़ताल के चलते शहर की जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जगह-जगह कूड़े के ढेर लगने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। हालांकि यूनियन नेताओं ने इस स्थिति पर खेद जताते हुए शहरवासियों से सहयोग की अपील की है। उनका कहना है कि मात्र 10 हजार रुपये मासिक वेतन में परिवार का गुजारा करना बेहद मुश्किल हो गया है, इसलिए यह संघर्ष उनके भविष्य और अधिकारों के लिए जरूरी है।
रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन भी आया समर्थन में
सफाई कर्मचारियों की हड़ताल को अब स्थानीय निवासियों का भी समर्थन मिलने लगा है। वार्ड-13 और 14 की सोसाइटियों के लोगों ने गठित यूनिफाइड रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन ढकोली ने कर्मचारियों की मांगों का समर्थन किया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा और उनकी टीम ने कहा कि सफाई कर्मचारियों की मांगें पूरी तरह जायज हैं और सरकार को जल्द समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के दौर में 10 हजार रुपये में किसी परिवार का गुजारा संभव नहीं है। सरकार को कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी करने के साथ-साथ उनकी अन्य मांगों को भी जल्द मान लेना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कोरोना काल के दौरान सफाई कर्मचारियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर काम किया था और आज भी शहर को स्वच्छ रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे कर्मियों की अनदेखी करना उचित नहीं है।
जीरकपुर नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी (ईओ) परविंदर सिंह भट्टी से आग्रह है कि कच्चे कर्मचारियों के लिए जल्दी ही कोई नया रास्ता निकालकर इनकी समस्या का हल किया जाए। हड़ताल के चलते शहर से कचरा नहीं उठ पा रहा है। लोग परेशान हैं। जल्द ही हम हड़ताल खत्म करा देंगे। -अमित गुप्ता, एसडीएम, सब डिवीजन डेराबस्सी।