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राज्य सरकार ने नहीं दिए पीएसईबी के 400 करोड़ रुपये, बिगड़े वित्तीय हालात
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मोहाली। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड को पाठ्यपुस्तकों की छपाई अब मंहगी पड़ने लगी है। विभाग की पुस्तकों की छपाई के करीब 400 करोड़ रुपये राज्य सरकार की तरफ बकाया हैं। जिसका भुगतान न होने के कारण विभाग के मुलाजिमों का वेतन और पेंशन तक देने में परेशानी आने लगी है। इस कारण बोर्ड की रिटायरीज एसोसिएशन ने प्रदेश सरकार से बकाया राशि का तुरंत भुगतान करने की मांग उठाई है।
पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड पाठ्यपुस्तकों की छपाई करवा कर राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों तक पहुंचाता है। बोर्ड को छपाई पर आने वाले खर्च का भुगतान सरकार करती है। पिछले करीब 10 साल से सरकार ने बोर्ड को यह भुगतान नहीं किया है। इस वजह से छपाई के खर्च का भुगतान अब 400 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। इतनी बड़ी रकम का भुगतान न होने के कारण साल-दर-साल बोर्ड की वित्तीय हालत बिगड़ती जा रही है। बोर्ड की इस बिगड़ती वित्तीय हालत पर वीरवार को रिटायरीज एसोसिएशन की बैठक में चिंता जाहिर की गई।
वीरवार को बोर्ड कांप्लेक्स में हुई इस बैठक की अध्यक्षता एसोसिएशन के प्रधान अमर सिंह ने की। इस मौके पर एसोसिएशन के जनरल सचिव गुरमेल सिंह मौजेवाल ने बताया कि बोर्ड की बिगड़ती वित्तीय हालत के कारण मुलाजिमों को मई का वेतन देरी से दिया गया है और सेवानिवृत्त मुलाजिमों की पेंशन भी देरी से 8 जून को जारी की गई है। इस बैठक में सर्वसम्मति से बोर्ड की बकाया राशि का भुगतान तुरंत किए जाने की मांग सरकार से की गई। मौजेवाल ने कहा कि बोर्ड ने करोड़ों रुपये खर्च कर भविष्य की जरूरतों के मुताबिक नई इमारत का निर्माण किया था। इस इमारत में सरकार की ओर से कई विभागों का कब्जा करवा दिया गया है। ये विभाग किराये का भुगतान तक नहीं करते। उन्होंने कहा कि संगठनों की ओर से आवाज उठाए जाने के बाद किराए का भुगतान तो शुरू हो गया है, लेकिन 17 करोड़ 66 लाख रुपये बकाया किराए का भुगतान अभी तक नहीं किया गया है।
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इस मौके पर आदर्श स्कूलों के संचालन को लेकर भी सवाल उठे। इस बैठक में कहा गया कि राज्य के 1213 आदर्श स्कूलों का संचालन कर रहा है। इन स्कूलों के अध्यापकों के वेतन के तौर पर बोर्ड को 36 करोड़ रुपये का खर्च उठाना पड़ रहा है। एसोसिएशन के सदस्यों का कहना था कि स्कूलों का संचालन करना सरकार की जिम्मेदारी है। बोर्ड का मुख्य काम परीक्षाओं का संचालन करना ही होना चाहिए।
एसोसिएशन के प्रेस सचिव हरिंदरपाल सिंह हैरी ने बताया कि सरकार तुरंत बोर्ड को उसकी बकाया धनराशि का भुगतान करे। अगर ऐसा नहीं होता है तो बोर्ड के मुलाजिमों और पेंशनर्स को संघर्ष का रास्ता अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा वित्तीय हालत को देखते हुए बोर्ड पे कमीशन की सिफारिशें लागू करने की स्थिति में नहीं है। हैरी ने बताया कि बैठक में पे कमीशन रिपोर्ट की भी आलोचना की गई है। हैरी ने एसोसिएशन की तरफ से कच्चे अध्यापकों के आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि बैठक में कच्चे अध्यापकों के मोहाली में जारी संघर्ष को हर तरह का समर्थन देने का फैसला लिया गया है। इस बैठक में एसोसिएशन की वरिष्ठ उप प्रधान अमरजीत कौर, ज्वाइंट सचिव कुलदीप सिंह सैदपुर, उप प्रधान डीपी होशियारपुरी, सचिव मेवा सिंह, वित्त सचिव चरन सिंह लखनपुर, सदस्य नरिंदर सिंह बाठ, बालकृष्ण, लखवीर सिंह, करन सिंह गढ़ी, गुरमेल सिंह गरचा, जगपाल सिंह और सलाहकार हरदेव सिंह कलेर सहित अन्य सदस्य मौजूद थे।
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पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड पाठ्यपुस्तकों की छपाई करवा कर राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों तक पहुंचाता है। बोर्ड को छपाई पर आने वाले खर्च का भुगतान सरकार करती है। पिछले करीब 10 साल से सरकार ने बोर्ड को यह भुगतान नहीं किया है। इस वजह से छपाई के खर्च का भुगतान अब 400 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। इतनी बड़ी रकम का भुगतान न होने के कारण साल-दर-साल बोर्ड की वित्तीय हालत बिगड़ती जा रही है। बोर्ड की इस बिगड़ती वित्तीय हालत पर वीरवार को रिटायरीज एसोसिएशन की बैठक में चिंता जाहिर की गई।
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वीरवार को बोर्ड कांप्लेक्स में हुई इस बैठक की अध्यक्षता एसोसिएशन के प्रधान अमर सिंह ने की। इस मौके पर एसोसिएशन के जनरल सचिव गुरमेल सिंह मौजेवाल ने बताया कि बोर्ड की बिगड़ती वित्तीय हालत के कारण मुलाजिमों को मई का वेतन देरी से दिया गया है और सेवानिवृत्त मुलाजिमों की पेंशन भी देरी से 8 जून को जारी की गई है। इस बैठक में सर्वसम्मति से बोर्ड की बकाया राशि का भुगतान तुरंत किए जाने की मांग सरकार से की गई। मौजेवाल ने कहा कि बोर्ड ने करोड़ों रुपये खर्च कर भविष्य की जरूरतों के मुताबिक नई इमारत का निर्माण किया था। इस इमारत में सरकार की ओर से कई विभागों का कब्जा करवा दिया गया है। ये विभाग किराये का भुगतान तक नहीं करते। उन्होंने कहा कि संगठनों की ओर से आवाज उठाए जाने के बाद किराए का भुगतान तो शुरू हो गया है, लेकिन 17 करोड़ 66 लाख रुपये बकाया किराए का भुगतान अभी तक नहीं किया गया है।
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इस मौके पर आदर्श स्कूलों के संचालन को लेकर भी सवाल उठे। इस बैठक में कहा गया कि राज्य के 1213 आदर्श स्कूलों का संचालन कर रहा है। इन स्कूलों के अध्यापकों के वेतन के तौर पर बोर्ड को 36 करोड़ रुपये का खर्च उठाना पड़ रहा है। एसोसिएशन के सदस्यों का कहना था कि स्कूलों का संचालन करना सरकार की जिम्मेदारी है। बोर्ड का मुख्य काम परीक्षाओं का संचालन करना ही होना चाहिए।
एसोसिएशन के प्रेस सचिव हरिंदरपाल सिंह हैरी ने बताया कि सरकार तुरंत बोर्ड को उसकी बकाया धनराशि का भुगतान करे। अगर ऐसा नहीं होता है तो बोर्ड के मुलाजिमों और पेंशनर्स को संघर्ष का रास्ता अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा वित्तीय हालत को देखते हुए बोर्ड पे कमीशन की सिफारिशें लागू करने की स्थिति में नहीं है। हैरी ने बताया कि बैठक में पे कमीशन रिपोर्ट की भी आलोचना की गई है। हैरी ने एसोसिएशन की तरफ से कच्चे अध्यापकों के आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि बैठक में कच्चे अध्यापकों के मोहाली में जारी संघर्ष को हर तरह का समर्थन देने का फैसला लिया गया है। इस बैठक में एसोसिएशन की वरिष्ठ उप प्रधान अमरजीत कौर, ज्वाइंट सचिव कुलदीप सिंह सैदपुर, उप प्रधान डीपी होशियारपुरी, सचिव मेवा सिंह, वित्त सचिव चरन सिंह लखनपुर, सदस्य नरिंदर सिंह बाठ, बालकृष्ण, लखवीर सिंह, करन सिंह गढ़ी, गुरमेल सिंह गरचा, जगपाल सिंह और सलाहकार हरदेव सिंह कलेर सहित अन्य सदस्य मौजूद थे।