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Mohali News: सेक्टर-70 में कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा शुरू

Tue, 09 Sep 2025 01:57 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 09 Sep 2025 01:57 AM IST
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Shrimad Bhagwat Katha started with Kalash Yatra in Sector-70
मोहाली। सेक्टर-70 गांव मटौर स्थित प्राचीन श्री सत्यनारायण मंदिर में सोमवार से पितृ पक्ष पर पितृ शांति महायज्ञ एवं संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ किया गया। कथा की शुरूआत भव्य कलश यात्रा से की गई। यात्रा कथा वाचक आचार्य इंद्रमणि महाराज अयोध्या वालों की अगुवाई में निकाली गई। यह मंदिर से शुरू होकर इलाके की परिक्रमा करते हुए कथा स्थल पर संपन्न हुई।
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यात्रा में कथा के मुख्य यजमान रतन कॉलेज सोहाना के चेयरमैन सुंदरलाल अग्रवाल, उनकी पत्नी संगीता अग्रवाल, सुपुत्र कार्तिक अग्रवाल रहे। आचार्य इंद्रमणि ने बताया कि मंदिर में 14 सितंबर तक प्रतिदिन शाम 5 से 8 बजे तक पितृ शांति महायज्ञ और संगीतमय श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का आयोजन होगा। इसके बाद महाआरती होगी। इस मौके यात्रा में पूर्व पार्षद अशोक झा, श्री ब्राह्मण महासभा के प्रधान विशाल शर्मा, भाजपा नेता सुखविंदर गोल्डी, मंदिर कमेटी के प्रधान नरेंद्र वत्स भी शामिल हुए।
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श्रीमद्भागवत के श्रवण-पठन से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है : आचार्य जगदंबा रतूड़ी
मोहाली। सेक्टर-71 मटौर स्थित सिद्ध बाबा बाल भारती प्राचीन शिव मंदिर में पितृ शांति महायज्ञ एवं संगीतमय श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ की शुरुआत हुई। इस धार्मिक आयोजन ने क्षेत्र का माहौल भक्ति और श्रद्धा से सराबोर कर दिया है। कार्यक्रम का शुभारंभ गणेश पूजन और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ। आचार्य जगदंबा रतूड़ी ने कथा व्यास के रूप में श्रीमद्भागवत की महिमा का गुणगान किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत साक्षात भगवान विष्णु का स्वरूप है। इसका श्रवण और पठन जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। आचार्य ने कथा के प्रथम दिन श्रद्धालुओं को भागवत कथा सुनने और सुनाने के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
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उन्होंने कहा कि पितृ पक्ष में भागवत कथा के आयोजन से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। यह कथा 13 सितंबर तक प्रतिदिन शाम 4 से 7 बजे तक आयोजित होगी और कथा के उपरांत महाआरती की जाएगी। सुबह गणेश पूजन, मूल पाठ, पितृ पूजन, तर्पण, पिंडदान और हवन यज्ञ भी सम्पन्न हुए। पहले दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर कथा का श्रवण किया और भक्ति भाव से कार्यक्रम में शामिल हुए। मंदिर प्रांगण भजन-कीर्तन और आस्था के स्वर से गूंज उठा।
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