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Punjab: संकटग्रस्त महिलाओं को तत्काल सहायता, सांझ राहत केंद्र बन रहे कम्युनिटी पुलिसिंग के सफल मॉडल
Tue, 14 Jul 2026 05:10 PM IST
शाहिल शर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली
संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Tue, 14 Jul 2026 05:10 PM IST
सार
पंजाब के ज़िलों, सब-डिवीज़नों और पुलिस थानों में स्थापित 530 से अधिक सांझ केंद्रों के सशक्त नेटवर्क के माध्यम से नागरिक-केंद्रित सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।
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गौरव यादव, पंजाब पुलिस डीजीपी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू किए गए पंजाब पुलिस के ‘सांझ राहत केंद्र’ आज एक प्रभावी कम्युनिटी पुलिसिंग मॉडल के रूप में उभरकर सामने आए हैं। ये केंद्र संकटग्रस्त महिलाओं को हर तरह की सहायता, काउंसलिंग, संकट की स्थिति में तत्काल सहायता तथा रिहैबिलिटेशन सेवाएं उपलब्ध करवा रहे हैं।
शुरुआत में मोहाली, फतेहगढ़ साहिब, लुधियाना और जालंधर स्थित सांझ राहत केंद्रों में केवल दो प्रशिक्षित काउंसलर तैनात थे। अब इस पहल से कई काउंसलर जुड़ चुके हैं। बीते दो वर्षों में इन केंद्रों ने 1,656 मामलों की स्क्रीनिंग की है तथा 1,069 मामले दर्ज किए हैं।
इस संबंध में पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव ने कहा, कुल चार सांझ राहत केंद्र संकटग्रस्त महिलाओं को उनके मानसिक आघात से उबरने और सामान्य जीवन जीने में सहायता प्रदान कर रहे हैं। ऐसी पहल विश्वास और सहयोग पर आधारित जनसुरक्षा के प्रति पंजाब पुलिस की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
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डीजीपी ने कहा, “सांझ राहत केंद्रों की सफलता की अनेक कहानियां हैं, लेकिन मोहाली में घरेलू हिंसा से पीड़ित एक महिला का समय रहते किया गया बचाव पंजाब पुलिस की प्रतिबद्धता का उदाहरण है। एक महिला ने सहायता के लिए संपर्क कर बताया कि उसका पति उसके साथ मारपीट कर रहा है और उसकी हत्या करवा देने की धमकी दे रहा है। उसे तुरंत सहायता की आवश्यकता थी।
यह महिला पहली बार पंजाब पुलिस के संपर्क में नहीं आई थी, क्योंकि उसका एक पूर्व मामला पहले से ही एसएएस नगर (मोहाली) टीम के रिकॉर्ड में दर्ज था। सांझ राहत केंद्र की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की, सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था की और उसे उसके मायके तक सुरक्षित पहुँचाया, जहाँ वह सुरक्षित वातावरण में रह सकी।”
उन्होंने आगे कहा, “एक अन्य मामले में अकेली रह रही एक महिला गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती थी। सांझ राहत केंद्र की टीम ने उसकी काउंसलिंग कर उसे आवश्यक चिकित्सा उपचार स्वीकार करने के लिए प्रेरित किया, पीजीआई में भर्ती करवाने में सहायता की तथा विशेष तालमेल के माध्यम से लगभग दो महीने तक उसका इलाज सुनिश्चित करवाया। उपचार के दौरान उसका गर्भपात हो गया।
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शुरुआत में मोहाली, फतेहगढ़ साहिब, लुधियाना और जालंधर स्थित सांझ राहत केंद्रों में केवल दो प्रशिक्षित काउंसलर तैनात थे। अब इस पहल से कई काउंसलर जुड़ चुके हैं। बीते दो वर्षों में इन केंद्रों ने 1,656 मामलों की स्क्रीनिंग की है तथा 1,069 मामले दर्ज किए हैं।
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इस संबंध में पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव ने कहा, कुल चार सांझ राहत केंद्र संकटग्रस्त महिलाओं को उनके मानसिक आघात से उबरने और सामान्य जीवन जीने में सहायता प्रदान कर रहे हैं। ऐसी पहल विश्वास और सहयोग पर आधारित जनसुरक्षा के प्रति पंजाब पुलिस की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
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डीजीपी ने कहा, “सांझ राहत केंद्रों की सफलता की अनेक कहानियां हैं, लेकिन मोहाली में घरेलू हिंसा से पीड़ित एक महिला का समय रहते किया गया बचाव पंजाब पुलिस की प्रतिबद्धता का उदाहरण है। एक महिला ने सहायता के लिए संपर्क कर बताया कि उसका पति उसके साथ मारपीट कर रहा है और उसकी हत्या करवा देने की धमकी दे रहा है। उसे तुरंत सहायता की आवश्यकता थी।
यह महिला पहली बार पंजाब पुलिस के संपर्क में नहीं आई थी, क्योंकि उसका एक पूर्व मामला पहले से ही एसएएस नगर (मोहाली) टीम के रिकॉर्ड में दर्ज था। सांझ राहत केंद्र की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की, सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था की और उसे उसके मायके तक सुरक्षित पहुँचाया, जहाँ वह सुरक्षित वातावरण में रह सकी।”
उन्होंने आगे कहा, “एक अन्य मामले में अकेली रह रही एक महिला गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती थी। सांझ राहत केंद्र की टीम ने उसकी काउंसलिंग कर उसे आवश्यक चिकित्सा उपचार स्वीकार करने के लिए प्रेरित किया, पीजीआई में भर्ती करवाने में सहायता की तथा विशेष तालमेल के माध्यम से लगभग दो महीने तक उसका इलाज सुनिश्चित करवाया। उपचार के दौरान उसका गर्भपात हो गया।
इस कठिन समय में टीम ने लगातार भावनात्मक सहयोग और काउंसलिंग देकर उसे इस कठिन समय से उबरने में मदद की। स्वस्थ होने के बाद टीम ने उसे रोज़गार दिलाने में भी सहायता की तथा उसके परिवार से पुनः जोड़ने का प्रयास किया, जिससे वह सम्मान और आत्मनिर्भरता के साथ अपना जीवन दोबारा शुरू कर सकी।”
सांझ राहत केंद्रों के अलावा महिलाओं के कल्याण और सुरक्षा के लिए पंजाब पुलिस की कई अन्य पहलें भी प्रभावी साबित हुई हैं। जागृति कार्यक्रम के तहत पंजाब पुलिस की महिला मित्रों ने पिछले लगभग दो वर्षों में 12,482 स्कूलों तक पहुँच बनाकर 6 से 12 वर्ष आयु वर्ग के 11,75,010 बच्चों को जागरूक किया। इसी अवधि में 76,299 प्रधानाचार्यों, शिक्षकों, कर्मचारियों तथा अन्य स्टाफ सदस्यों को भी जागरूक किया गया। महिला हेल्प डेस्क पहल के अंतर्गत पिछले पाँच वर्षों में 69,329 जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए; जिनमें साइबर अपराध, घरेलू हिंसा, बाल यौन शोषण, बाल-विवाह निषेध अधिनियम, जुवेनाइल जस्टिस (बालकों की देखभाल एवं संरक्षण) एक्ट , नशा मुक्ति तथा लैंगिक संवेदनशीलता जैसे विषयों पर लोगों को जागरूक किया गया।
गुरप्रीत कौर देओ ,स्पेशल डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (कम्युनिटी अफ़ेयर्स डिवीज़न) ने कहा,“वर्ष 2011 में स्थापना के बाद से ‘सांझ’ प्रणाली ने पुलिस और जनता के बीच साझेदारी को मज़बूत करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
पंजाब के ज़िलों, सब-डिवीज़नों और पुलिस थानों में स्थापित 530 से अधिक सांझ केंद्रों के सशक्त नेटवर्क के माध्यम से नागरिक-केंद्रित सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।” उन्होंने आगे कहा, “यह पहल संकटग्रस्त महिलाओं को काउंसलिंग, पुलिस सहायता और कानूनी सहयोग उपलब्ध करवाकर एक महत्त्वपूर्ण कमी को दूर कर रही है।”
सांझ राहत केंद्रों के अलावा महिलाओं के कल्याण और सुरक्षा के लिए पंजाब पुलिस की कई अन्य पहलें भी प्रभावी साबित हुई हैं। जागृति कार्यक्रम के तहत पंजाब पुलिस की महिला मित्रों ने पिछले लगभग दो वर्षों में 12,482 स्कूलों तक पहुँच बनाकर 6 से 12 वर्ष आयु वर्ग के 11,75,010 बच्चों को जागरूक किया। इसी अवधि में 76,299 प्रधानाचार्यों, शिक्षकों, कर्मचारियों तथा अन्य स्टाफ सदस्यों को भी जागरूक किया गया। महिला हेल्प डेस्क पहल के अंतर्गत पिछले पाँच वर्षों में 69,329 जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए; जिनमें साइबर अपराध, घरेलू हिंसा, बाल यौन शोषण, बाल-विवाह निषेध अधिनियम, जुवेनाइल जस्टिस (बालकों की देखभाल एवं संरक्षण) एक्ट , नशा मुक्ति तथा लैंगिक संवेदनशीलता जैसे विषयों पर लोगों को जागरूक किया गया।
गुरप्रीत कौर देओ ,स्पेशल डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (कम्युनिटी अफ़ेयर्स डिवीज़न) ने कहा,“वर्ष 2011 में स्थापना के बाद से ‘सांझ’ प्रणाली ने पुलिस और जनता के बीच साझेदारी को मज़बूत करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
पंजाब के ज़िलों, सब-डिवीज़नों और पुलिस थानों में स्थापित 530 से अधिक सांझ केंद्रों के सशक्त नेटवर्क के माध्यम से नागरिक-केंद्रित सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।” उन्होंने आगे कहा, “यह पहल संकटग्रस्त महिलाओं को काउंसलिंग, पुलिस सहायता और कानूनी सहयोग उपलब्ध करवाकर एक महत्त्वपूर्ण कमी को दूर कर रही है।”