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चप्पड़चिड़ी को निगम में शामिल करने के विरोध में उतरे इलाके के लोग

Sun, 16 Jan 2022 02:09 AM IST
Mohali Bureau मोहाली ब्‍यूरो
Updated Sun, 16 Jan 2022 02:09 AM IST
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People of the area came out in protest against the inclusion of Chapparchidi in the corporation
मोहाली। ऐतिहासिक गांव चप्पड़चिड़ी को नगर निगम की सीमा में शामिल करने का विरोध शुरू हो गया है। गांव के लोग ही इसके विरोध में आ गए हैं। लोगों का आरोप है कि इस प्रस्ताव से गांव का फायदा कम नुकसान ज्यादा होगा। एक तो गांव के लोगों पर कई तरह के नियम कानून लागू हो जाएंगे और दूसरा गांव की करोड़ों रुपये की शामलात जमीन भी पंचायत के हाथ से निकल जाएगी। गांव वालों ने इस संबंध में नगर निगम के कमिश्नर को लिखित एतराज सौंपा है। इसमें मांग की है कि उक्त गांव को नगर निगम में शामिल न किया जाए। गांव को निगम में शामिल करने का प्रस्ताव रद्द कर दिया जाए।
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जानकारी के मुताबिक चप्पड़चिड़ी मोहाली के बिल्कुल साथ लगता हुआ गांव है। यहां पर ही देश की सबसे ऊंची फतेह मीनार समेत कई हाउसिंग प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इसके अलावा नामी ट्रैक्टर कंपनी भी इस गांव की शान है। गांव के पूर्व सरपंच सोहन सिंह, गुरमेल सिंह, हरविंदर सिंह और ऐतिहासिक गुरुद्वारा चप्पड़चिड़ी के प्रधान जगतार सिंह ने कहा कि उक्त गांव की स्थिति काफी महत्वपूर्ण है। यह गांव मोहाली शहर के साथ लगता है। यहां पर जमीन की कीमत अन्य गांवों की अपेक्षा काफी अधिक है। उन्होंने कहा कि अगर विकास की बात करें तो गांव में पहले से ही काफी विकास कार्य हो चुका है। ऐसे में सरकार की कोशिश यहीं है कि उक्त गांव की करोड़ों रुपये की शामलात जमीन पर कब्जा किया जाए। क्योंकि जब उक्त एरिया नगर निगम के अधीन आ जाएगा तो पूरी जमीन सरकार के अधीन होगी, पंचायत की भूमिका खत्म हो जाएगी। ऐसे में उक्त गांव को चप्पड़चिड़ी में शामिल न किया जाए। इस मौके पर सुरमुख सिंह पूर्व सरपंच, सुखविंदर सिंह, परमजीत सिंह और केसर सिंह आदि भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि अब तक जो गांव नगर निगम में शामिल हुए हैं वहां के लोग दिक्कत ही उठा रहे हैं।
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निगम में शामिल हुए गांवों की स्थिति अच्छी नहीं
इलाके के लोगों ने बताया कि जो गांव पहले नगर निगम में शामिल किए गए हैं, वहां के लोगों को भी कई तरह की मुुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। एक तो उन्हें अपने ही पशुुओं को गांव से बाहर निकालने की दिक्कत आ रही है। दूसरा नगर निगम ने अपने बिल्डिंग बायलॉज और अन्य टैक्स उन पर थोप दिए हैं। इससे निगम में शामिल हुए गांव के लोग दिक्कत में हैं। उक्त गांव के लोग अपने ही घरों में किराएदारों की तरह रह रहे हैं। जो कि किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।
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चप्पड़चिड़ी से ही है मोहाली की पहचान
मोहाली शहर में कोई बड़ा पर्यटनीय स्थल नहीं है। चप्पड़चिड़ी से ही इलाके को पूरी दुनिया में पहचान मिलती है। ऐसे में नगर निगम की कोशिश भी है कि उक्त इलाके को उचित तरीके से चंडीगढ़ की तर्ज पर विकसित किया जाए। हालांकि इससे पहले अकाली दल-भाजपा सरकार के समय में यह प्रोग्रेसिव समिट पंजाब से लेकर एग्रीकल्चर समिट तक हुई थी। इसमें केवल पंजाब ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया से उद्योगपति और कंपनियां आई थीं। इतना ही नहीं जब अकाली दल भाजपा की सरकार ने लगातार दूसरी बार चुनाव जीते थे तो पार्टी का शपथ समारोह भी यहीं पर आयोजित किया गया था।
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