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Mohali News: पटाखों के लाइसेंस सिर्फ 44 को मिले, पर दुकानें बेशुमार
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मोहाली के फेज-3बी2, फेज-7, फेज-5 और अन्य मार्केटों में सरेआम पटाखों की सेल की जा रही
जीरकपुर, डेराबस्सी और लालड़ू में भी हो रही पटाखों की बिक्री
संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। जिले में बेशक पटाखों के लाइसेंस सिर्फ 44 वेंडर्स को दिए गए हों पर पटाखों की दुकानें यहां हर सेक्टर में लग चुकी हैं। जबकि जिले में 13 स्थानों पर ही पटाखों के सेल की अनुमति प्रदान की गई है। कुराली में ही पटाखों की करीब 500 दुकानें खुल गई हैं, जबकि लाइसेंस सिर्फ बीस को दिए गए हैं।
मोहाली के फेज-3बी2, फेज-7, फेज-5 और अन्य मार्केटों में सरेआम पटाखों की सेल की जा रही है। वहीं, जीरकपुर, डेराबस्सी और लालड़ू में भी पटाखों की बिक्री हो रही है। नियमानुसार जिला प्रशासन द्वारा निर्धारित जगहों के अलावा पटाखों की बिक्री कहीं भी नहीं की जा सकती है। जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कारण ऐसा निर्णय लिया था, जिसमें ड्रा में निर्धारित वेंडर्स को ही लाइसेंस प्रदान किए गए थे। जीरकपुर के बलटाना, वीआईपी रोड, ढकोली जैसे इलाकों में छोटे-छोटे दुकानदार पटाखों की बिक्री कर रहे हैं। वहीं, मोहाली में भी हाल ऐसा ही है।
पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग
दशमेश वेलफेयर काउंसिल के अध्यक्ष मंजीत सिंह मान का आरोप है कि अधिकारियों की मिलीभगत से पूरे जिले में अवैध रूप से पटाखे बेचे जा रहे हैं। अफसर जानबूझकर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। जबकि पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। एक तरफ पंजाब सरकार किसानों के खिलाफ पराली को आग लगाने, उनकी जमीन के रिकॉर्ड में रेड लाइन एंट्री कर रही है और दूसरी तरफ प्रदूषण को बढ़ाते हुए दिवाली पर पटाखों की इजाजत दे रही है। बेहतर होता कि सरकार लोगों को दिवाली के मौके पर उपहार स्वरूप विभिन्न प्रकार के पौधे बांटने के लिए प्रोत्साहित करती और अपने वन विभाग के माध्यम से ऐसा कदम उठाती, जिससे लोगों को फायदा होता। उन्हें प्रदूषण मुक्त दिवाली मनाने का भी मौका मिलता और प्रदूषण से लड़ने के लिए वे अपने घरों में पौधे भी लगाते हैं।
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जीरकपुर, डेराबस्सी और लालड़ू में भी हो रही पटाखों की बिक्री
संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। जिले में बेशक पटाखों के लाइसेंस सिर्फ 44 वेंडर्स को दिए गए हों पर पटाखों की दुकानें यहां हर सेक्टर में लग चुकी हैं। जबकि जिले में 13 स्थानों पर ही पटाखों के सेल की अनुमति प्रदान की गई है। कुराली में ही पटाखों की करीब 500 दुकानें खुल गई हैं, जबकि लाइसेंस सिर्फ बीस को दिए गए हैं।
मोहाली के फेज-3बी2, फेज-7, फेज-5 और अन्य मार्केटों में सरेआम पटाखों की सेल की जा रही है। वहीं, जीरकपुर, डेराबस्सी और लालड़ू में भी पटाखों की बिक्री हो रही है। नियमानुसार जिला प्रशासन द्वारा निर्धारित जगहों के अलावा पटाखों की बिक्री कहीं भी नहीं की जा सकती है। जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कारण ऐसा निर्णय लिया था, जिसमें ड्रा में निर्धारित वेंडर्स को ही लाइसेंस प्रदान किए गए थे। जीरकपुर के बलटाना, वीआईपी रोड, ढकोली जैसे इलाकों में छोटे-छोटे दुकानदार पटाखों की बिक्री कर रहे हैं। वहीं, मोहाली में भी हाल ऐसा ही है।
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पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग
दशमेश वेलफेयर काउंसिल के अध्यक्ष मंजीत सिंह मान का आरोप है कि अधिकारियों की मिलीभगत से पूरे जिले में अवैध रूप से पटाखे बेचे जा रहे हैं। अफसर जानबूझकर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। जबकि पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। एक तरफ पंजाब सरकार किसानों के खिलाफ पराली को आग लगाने, उनकी जमीन के रिकॉर्ड में रेड लाइन एंट्री कर रही है और दूसरी तरफ प्रदूषण को बढ़ाते हुए दिवाली पर पटाखों की इजाजत दे रही है। बेहतर होता कि सरकार लोगों को दिवाली के मौके पर उपहार स्वरूप विभिन्न प्रकार के पौधे बांटने के लिए प्रोत्साहित करती और अपने वन विभाग के माध्यम से ऐसा कदम उठाती, जिससे लोगों को फायदा होता। उन्हें प्रदूषण मुक्त दिवाली मनाने का भी मौका मिलता और प्रदूषण से लड़ने के लिए वे अपने घरों में पौधे भी लगाते हैं।
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