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Mohali: तय समय पर नहीं दिया प्लाट का कब्जा, अब देना होगा 50 हजार हर्जाना और ब्याज के साथ बुकिंग अमाउंट

Fri, 31 Mar 2023 12:23 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 31 Mar 2023 12:23 PM IST
सार

सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि बुकिंग के वक्त उपभोक्ता और कंपनी में करार हुआ था कि 30 प्रतिशत राशि अभी जमा करवाने के बाद बाकी राशि पजेशन के वक्त देनी होगी। इसके बावजूद कंपनी ने दो साल में ही उपभोक्ता से सवा नौ लाख रुपये मांग लिए जबकि जमीनी स्तर पर वहां कुछ भी नहीं हुआ था।

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Mohali Consumer Court ordered Construction company to return booking money with interest to consumer
court Order

विस्तार

मोहाली जिला उपभोक्ता अदालत ने एक प्लॉट तय समय पर उपभोक्ता को नहीं सौंपने पर मैसर्स मनोहर इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को उपभोक्ता द्वारा दिए गए रुपये 12 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने के आदेश दिए हैं। वहीं इसके अलावा मानसिक रूप से हुई परेशानी, शोषण और अदालती खर्च के रूप में पचास हजार रुपये हर्जाना भरना होगा।

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उपभोक्ता अदालत में दी शिकायत में शिकायतकर्ता हरबंस सिंह और उनकी पत्नी बलजीत कौर ने बताया कि उन्होंने 2012 में मुल्लांपुर पाम गार्डन में 18,500 रुपये प्रति गज के हिसाब से 250 गज का प्लॉट लेने के लिए बुकिंग कराई थी। बुकिंग कराने के मौके उन्होंने सौदे के कुल मूल्य का 30 प्रतिशत 13,87,500 रुपये के दो चेक दिए थे। इसके दो साल बाद फरवरी 2014 में कंपनी ने उन्हें एक पत्र भेजा जिसमें सवा नौ लाख रुपये देने के लिए कहा। इस पत्र में बताया गया कि प्रोजेक्ट अंतिम चरण में है इसलिए सवा नौ लाख रुपये दिए जाएं। यह पत्र मिलने के बाद उपभोक्ता कंपनी के कार्यालय में पहुंचे और कहा कि कंपनी द्वारा सवा नौ लाख रुपये मांगना सही नहीं है क्योंकि बुकिंग के वक्त उनका कंपनी के साथ करार हुआ था कि आखिरी चरण आने पर ही बाकी भुगतान किया जाएगा। अब कंपनी द्वारा पैसों की मांग करना अनुचित है क्योंकि बुकिंग कराने के दो साल के बाद भी वहां पर थोड़ा सा भी काम नहीं हुआ है। 
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कुछ भी काम नहीं होने की कही थी बात
2014 में कंपनी द्वारा भेजे गए पत्र में यह कहा गया कि काम अंतिम चरण में है। प्लाट का सौदा होने के बाद वह कई बार वहां पर चक्कर लगा चुके हैं लेकिन वहां पर उन्हें थोड़ा सा काम हुआ भी नहीं दिखाई दिया है। इस तरह कंपनी द्वारा भेजे गए पत्र में यह बात कही गई है, वह बिल्कुल गलत है। इतना ही नहीं कंपनी अब तक उन्हें किसी सरकारी संस्था से मंजूर कोई साइट प्लान नहीं दिखा पाई है। वहीं उन्हें यह भी लगता है कि कंपनी द्वारा दिखाई गई सीएलयू भी किसी विभाग से मंजूर नहीं है। कंपनी द्वारा पांच साल में वहां पर विकास का एक भी कार्य नहीं होने पर उन्होंने उपभोक्ता अदालत में शिकायत देकर बुकिंग के वक्त दिए गए पैसे 18 प्रतिशत ब्याज के साथ दिलाने और मुआवजे के रूप में 83 हजार रुपये दिलाने की मांग रखी।
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कंपनी ने दिया ये जवाब
उपभोक्ता की इस शिकायत के जवाब में कंपनी ने दलील दी कि कंपनी ने गमाडा से प्रोजेक्ट की मंजूरी के लिए अर्जी दे रखी है और उसकी बनती फीस के रूप में न्यूनतम राशि 319.75 करोड़ रुपये भी जमा करवा रखी है। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि उनके द्वारा सवा नौ करोड़ रुपये जमा करवाने के पत्र का उपभोक्ता ने दो साल तक जवाब नहीं दिया था। वहीं उनके प्रोजेक्ट में देरी होने का कारण राज्य में खनन पर लगाई गई पाबंदी थी। इसके बावजूद कंपनी ने समय पर प्रोजेक्ट को पूरा करने की पूरी कोशिश की। वहीं उपभोक्ता प्लाट में रुचि नहीं रख रहा था और उसे सरेंडर करना चाहता था क्योंकि उन्हें रियल स्टेट में आई मंदी के चलते सौदे में कोई मुनाफा नजर नहीं आ रहा था। इस पर कंपनी ने उन्हें उनके पैसे बिना किसी कटौती के लौटाने की बात कही थी। इस आधार पर उन्होंने अदालत में इस केस को निरस्त करने की मांग की।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कंपनी को उपभोक्ता द्वारा दी गई राशि 12 प्रतिशत ब्याज के साथ 30 दिन में लौटाने के आदेश दिए। वहीं इसके अलावा  मानसिक रूप से हुई परेशानी, शोषण और अदालती खर्च के रूप में पचास हजार रुपये हर्जाना भरने को भी कहा।


अदालत की दलील- पजेशन से पहले पैसे मांगना गलत
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि बुकिंग के वक्त उपभोक्ता और कंपनी में करार हुआ था कि 30 प्रतिशत राशि अभी जमा करवाने के बाद बाकी राशि पजेशन के वक्त देनी होगी। इस करार के बावजूद कंपनी ने दो साल में ही उपभोक्ता से सवा नौ लाख रुपये मांग लिए जबकि जमीनी स्तर पर वहां पर कुछ भी नहीं हुआ था। काम पूरा होने से पहले ही कंपनी के पैसे मांगने पर उपभोक्ता का कंपनी से विश्वास उठ गया। इस बात से नाराज होकर ही उपभोक्ता ने अदालत में शिकायत दी। अदालत ने कहा कि कंपनी ने झूठे वादे करके उपभोक्ताओं से पैसे लेने की कोशिश की है। जब उनका करार हुआ था कि अंतिम राशि पर पजेशन के वक्त मिलेगी। इसलिए पजेशन से पहले पैसे मांगना बिल्कुल गलत है इसलिए अदालत ने कंपनी को ब्याज सहित उपभोक्ता के पैसे लौटाने और हर्जाना भरने के आदेश दिए।
 

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