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मोहाली बना धरनों का गढ़, चार जगह मुलाजिम उतरे सड़कों पर

Wed, 24 Nov 2021 02:18 AM IST
Mohali Bureau मोहाली ब्‍यूरो
Updated Wed, 24 Nov 2021 02:18 AM IST
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Mohali became a stronghold of dharna, employees came out on the roads at four places
मोहाली। शिक्षा विभाग के बाहर लंबे समय से शिक्षकों की ओर से अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। ऐसे में अब विभिन्न राजनीतिक दल मुलाजिमों का दिल जीतने में लग गए हैं। इसके मद्देनजर मंगलवार को आम आदमी पार्टी की नेता अनमोल गगन धरना स्थल पर पहुंची। इस दौरान अमृतसर में चल रहे केजरीवाल के कार्यक्रम को लाइव दिखाया गया और शिक्षकों से वादा किया कि उनकी सरकार आने पर सारी दिक्कतें दूर कर दी जाएंगी।
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फेज-8 स्थित पंजाब शिक्षा विभाग के बाहर पंजाब के अलग अलग विषयों के सैकड़ों शिक्षकों द्वारा धरना प्रदर्शन किया जा रहा है सभी कि एक ही मांग है कि उन्हें नौकरियों पर पक्का किया जाए और बेतन बढ़ाया जाए। इन शिक्षकों को छह महीने से भी ज्यादा का समय हो चला है, लेकिन पंजाब सरकार की और से इनकी एक भी मांग नहीं मानी गई। ऐसे में पंजाब आम आदमी पार्टी के द्वारा अमृतसर में व्यापार मंडल के साथ की जारी प्रोग्राम लाइव दिखाया गया। साथ ही कहा कि उनकी मांगों को पहल के आधार पर हल किय जाएगा। इस बीच धरने पर पहुंची आम आदमी पार्टी से मोहाली की उम्मीदवार अनमोल गगन मान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को शिक्षकों साथ बैठकर सुना। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के खत्म होने के बाद शिक्षकों से कहा कि उनकी पार्टी सत्ता में आने के बाद पंजाब में धरने पर बैठे सभी कच्चे मुलाजिमों को पक्का करेगी, साथ ही उनकी हर मांग को मान जाएगा। उन्होंने दिल्ली की शिक्षा प्रणाली को पंजाब में लागू करवाने की भी बात कहीं।
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नौकरी के चक्कर में कई सालों से खा रही हूं धक्के
शिक्षा विभाग के बाहर अपनी नौकरी को पक्का करवाने बलजीत कौर के साथ उनकी डेढ़ साल की बेटी लवलीन भी शामिल हुई। उन्होंने कहा कि 2006 से वे शिक्षक के तौर पर नौकरी में हैं। इस समय वे होशियारपुर के एक सरकारी स्कूल में एसटीआर वालंटियर के तौर पर काम कर रही हैं। वे टेट का टेस्ट भी पास कर चुकी हैं। उन्होंने बताया कि उनकी शादी 2014 में हुई। रिश्ता नौकरी के आधार पर हुआ था। पति दिल्ली में सीआईएसएफ के कर्मचारी हैं, वे वहीं रहते हैं। मुझे महीने का 6 हजार मिलता है। मेरी दो बेटियां है। लंबे समय से में हर धरने में हिस्सा लेती आ रही हूं। मुझे उम्मीद होती थी कि एक दिन तो हमारी मांगे मानी जाएगी। लेकिन 18 सालों से भी लंबा समय हो गया है कोई समाधान नहीं निकला। वहीं अब मैं अपनी दो बच्चियों के साथ अलग से रहती हूं। सास ससुर नौकरी के कारण कई बार कलेश कर चुके हैं। वहीं पति भी नौकरी पक्की न होने कारण कम ही साथ देते हैं। मेरे जैसे सैकड़ों लड़कियों को मैं जानती हूं जिनकी नौकरी पक्की न होने के कारण घर टूट चूकें है। कुछ को उनके ससुराल वालों ने छोड़ दिया है।
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