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कोरोना के डर से बढ़ रही मानसिक मरीजों संख्या

Sun, 05 Apr 2020 01:33 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sun, 05 Apr 2020 01:33 AM IST
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Increased number of mental patients due to fear of corona
जीरकपुर। कोविड-19 वायरस ने लोगों की लाइफ स्टाइल बदल कर रख दी है। इस बीमारी से बच्चों से लेकर बूढे़ तक परेशान हैं।
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एक ओर जहां लोगों पर डिप्रेशन हावी होने लगा है, वहीं लोग एंग्जाइटी जैसी बीमारी से भी ग्रसित होने लगे हैं। कोरोना वायरस के चलते तो कुछ लोगों को आर्थिक तंगी ने नींद उड़ा दी है। सबसे ज्यादा परेशान निजी कंपनियों में काम करके आठ से10 हजार रुपये की मासिक तनख्वाह पाने वाले मुलाजिम हैं।
क्योंकि 21 दिनों के लॉकडाउन के आधे पड़ाव में ही आर्थिक तंगी उन्हें सताने लगी है। इस तरह के मामले मनोरोग चिकित्सकों के पास आ रहे हैं। डॉक्टर व्हाट्सएप कॉलिंग के जरिए पहले मरीज की काउंसलिंग कर रहे हैं और उसके बाद उनका उपचार। इसका खुलासा डॉ. राजीव त्रेहन ने किया है। डॉ. त्रेहन ने बताया कि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल व यूपी से उन्हें व्हाट्सएप कॉलिंग के जरिए लोग अपनी समस्याएं बता रहे हैं। उनके पास पूरे दिन में रोजाना 20 से 25 कॉल आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस बीमारी से बचना है तो 21 दिनों तक लॉकडाउन का निष्ठा के साथ सबको पालन करना चाहिए। तभी इस बीमारी से निजात मिल सकती है। इसके साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का भी ध्यान रखें।
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कई लोगों में चिड़चिड़ापन
डॉ. त्रेहन ने बताया कि कई लोगों में लॉकडाउन के दौरान चिड़चिड़ापन देखने को मिल रहा है। ये चिड़चिड़ापन कई वजहों से हो सकता है। हो सकता है वो घर से बाहर जाना चाहते हों लेकिन वह जा नहीं पा रहे हों। हो सकता है उन्हें अपनी नौकरी जाने का डर हो या ये भी हो सकता है कि उन्हें ये डर सता रहा हो कि कहीं उनको या उनके किसी परिवार के सदस्य को कोरोना अपना शिकार न बना ले। डॉक्टरों की भाषा में इसे एंग्जाइटी कहते हैं। इसे सही समय पर कंट्रोल करना बहुत जरूरी है नहीं तो आगे जाकर ये डिप्रेशन बन सकती है।
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डर से बचने का उपाय है खुद को समझाना
डॉक्टर त्रेहन ने बताया कि लोगों के मन में कोरोना का डर बना हुआ है। इस डर से बचने का एक उपाय है खुद को समझाएं कि आप अकेले नहीं है जिस पर ये परेशानी आई है। पूरी दुनिया भर में लोग भी इस बीमारी की चपेट में हैं, ये बीमारी अचानक नहीं होगी और न ही सिर्फ आपको होगी। फिलहाल दो परिस्थितियां हैं उन पर गौर करें और स्थिति को समझने की कोशिश करें। इस बात को समझें की कोरोना से मरने वाले मरीजों की तादाद बेहद कम है, जबकि इससे ठीक होने वाले मरीजों की संख्या ज्यादा है। इसलिए घर में रहिए और सुरक्षित रहिए।
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