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Mohali News: सोमवार तक विवाद नहीं सुलझा तो दोबारा होगा एमआईए का चुनाव
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मोहाली। शहर के उद्योगपतियों की संस्था मोहाली इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (एमआईए) में प्रधान पद को लेकर हुए हंगामे के बाद एसोसिएशन की छवि खराब होती दिखाई दे रही है। एसोसिएशन में राजनीतिक पार्टियों के दखल को लेकर भी सवाल उठ रहा है। यह भी पता चला है कि एसोसिएशन में मौजूदा विधायक और पूर्व विधायक दोनों के गुट एमआईए पर कब्जा लेना चाहते हैं। लेकिन संविधान कुछ और ही कहता है, संविधान के अनुसार एजीएम में मौजूदा कार्यकारिणी को एक साल ओर देना न देना हाउस के हाथ में होता है। लेकिन बलजीत सिंह खुद ही कहने लगे हैं कि मैं प्रधान बना रहना चाहता हूं और शोरशराबे के बीच बलजीत सिंह को उनके कुछ समर्थकों ने हार पहना दिया।
जबकि दूसरी और कार्यकारिणी के 9 सदस्यों में से 8 बलजीत सिंह को प्रधान नहीं बनाना चाहते थे। पूर्व प्रधान अनुराग अग्रवाल ने कहा कि एमआईए के पूर्व प्रधानों की मीटिंग आरएस सचदेवा की प्रधानगी में हुई है। इसमें फैसला लिया गया है कि अगर सोमवार तक विवाद नहीं सुलझा तो मौजूदा कार्यकारिणी को रद्द कर दोबारा से संविधान अनुसार एमआईए का चुनाव करवाया जाएगा। मौजूदा टीम का कार्यकाल एक साल और बढ़ाने का फैसला हाउस करता है जिसने नहीं किया था। फिलहाल खुद प्रधान बने बलजीत सिंह को एसोसिएशन का प्रधान नहीं माना जाएगा। मौजूदा महासचिव दिलप्रीत सिंह बोपाराय का कहना है कि एजीएम में एमआईए की छवि खराब करने और माहौल जानबूझकर खराब करने की कोशिश की गई है। उनकी पहल थी कि सर्वसम्मति से ही चुनाव करवाया जाए ताकि एमआईए की छवि खराब न हो। लेकिन प्रधान बलजीत सिंह को यह मंजूर नहीं था, इसलिए अकेले ही खुद को प्रधान चुन रहे हैं।
जबकि बलजीत सिंह का कहना है कि प्रधान चुनने की पावर एजीएम को है और उन्होंने ही उनको प्रधान चुनने का आह्वान किया था और इसके बाद बड़ी संख्या में सदस्यों ने हाथ खड़े करके उनको प्रधान चुना है। रही माहौल खराब करने की कोशिश तो कार्यकारिणी के कुछ सदस्य जानबूझकर माहौल खराब कर रहे थे। कुछ उद्योगपति चाहते हैं कि चुनाव दोबारा हो ताकि वह इस दौड़ से बाहर हो जाएं। पूर्व प्रधानों की जो मीटिंग हुई है इसमें जो फैसला उन्होंने किया है उससे साफ दिख रहा है कि उनके साथ धक्केशाही हो रही है।
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जबकि दूसरी और कार्यकारिणी के 9 सदस्यों में से 8 बलजीत सिंह को प्रधान नहीं बनाना चाहते थे। पूर्व प्रधान अनुराग अग्रवाल ने कहा कि एमआईए के पूर्व प्रधानों की मीटिंग आरएस सचदेवा की प्रधानगी में हुई है। इसमें फैसला लिया गया है कि अगर सोमवार तक विवाद नहीं सुलझा तो मौजूदा कार्यकारिणी को रद्द कर दोबारा से संविधान अनुसार एमआईए का चुनाव करवाया जाएगा। मौजूदा टीम का कार्यकाल एक साल और बढ़ाने का फैसला हाउस करता है जिसने नहीं किया था। फिलहाल खुद प्रधान बने बलजीत सिंह को एसोसिएशन का प्रधान नहीं माना जाएगा। मौजूदा महासचिव दिलप्रीत सिंह बोपाराय का कहना है कि एजीएम में एमआईए की छवि खराब करने और माहौल जानबूझकर खराब करने की कोशिश की गई है। उनकी पहल थी कि सर्वसम्मति से ही चुनाव करवाया जाए ताकि एमआईए की छवि खराब न हो। लेकिन प्रधान बलजीत सिंह को यह मंजूर नहीं था, इसलिए अकेले ही खुद को प्रधान चुन रहे हैं।
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जबकि बलजीत सिंह का कहना है कि प्रधान चुनने की पावर एजीएम को है और उन्होंने ही उनको प्रधान चुनने का आह्वान किया था और इसके बाद बड़ी संख्या में सदस्यों ने हाथ खड़े करके उनको प्रधान चुना है। रही माहौल खराब करने की कोशिश तो कार्यकारिणी के कुछ सदस्य जानबूझकर माहौल खराब कर रहे थे। कुछ उद्योगपति चाहते हैं कि चुनाव दोबारा हो ताकि वह इस दौड़ से बाहर हो जाएं। पूर्व प्रधानों की जो मीटिंग हुई है इसमें जो फैसला उन्होंने किया है उससे साफ दिख रहा है कि उनके साथ धक्केशाही हो रही है।
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