बनूड़। अभिनेता और किसान नेता दीप सिद्धू के शव की झलक पाने के लिए बुधवार सुबह से ही हजारों युवा, किसान और सिख बनू्ड़ क्षेत्र के गांवों में जमा हो गए। जैसे ही दीप का शव शंभू की सीमा पर पहुंचा तो वहां 5 मिनट के लिए एकत्र हुए लोगों के लिए एंबुलेंस को दर्शन के लिए रोका गया, लोगों ने शव को देखा और फूलों की वर्षा की। इस मौके पर पहुंचे हजारों युवक फूट-फूट कर रोए और एंबुलेंस के पीछे दौड़े।
दिवंगत दीप सिद्धू ने केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कृषि के नए तीन कानूनों के विरोध में शंभू सीमा पर विशाल रैली की थी। उन्होंने शंभू सीमा पर काले कानूनों के खिलाफ एक मजबूत किसान मोर्चा शुरू करके कृषि के तीनों कानूनों के खिलाफ देश और विदेश के लोगों को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बाद में जब राज्य के किसानों ने 26 नवंबर को दिल्ली में धरना देने के लिए इन काले कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर शंभू सीमा से दिल्ली तक मार्च किया गया, तो दीप सिद्धू दिल्ली पहुंचने वाले पहले युवा थे, जब शंभू सीमा पर दीप सिद्धू के नेतृत्व में धरना दिया गया तो बनूड़ के पास के गांवों के युवा दीप सिद्धू के पक्के समर्थक बन गए। इससे क्षेत्र के युवा शंभू सीमा किसान मोर्चा में रोजाना हिस्सा लेने लगे और यह मोर्चा एक निश्चित आंदोलन बन गया। इसमें श्री अकाल तख्त सिंह साहिब के पूर्व जत्थेदार भाई रणजीत सिंह सहित विभिन्न दलों के धर्मगुरु शामिल थे।