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Mohali News: खरड़ मास्टर प्लान में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, तीन सरकारी वरिष्ठ अधिकारियों का वेतन अटैच

Thu, 29 May 2025 01:49 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 29 May 2025 01:49 AM IST
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High Court strict on delay in Kharar Master Plan, salary of three senior government officials attached
मोहाली। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने खरड़ के मास्टर प्लान को नोटिफाई करने में अत्यधिक देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए पंजाब सरकार के तीन वरिष्ठ अधिकारियों का वेतन 23 सितंबर तक अटैच कर दिया है। इनमें हाउसिंग एंड अर्बन प्लानिंग विभाग के प्रधान सचिव, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के चीफ टाउन प्लानर और लोकल गवर्नमेंट विभाग के प्रधान सचिव शामिल हैं। हाईकोर्ट ने यह कदम अपने पूर्व आदेशों की अवहेलना और सरकार की ओर से कार्रवाई न करने के चलते उठाया है।
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खरड़ का पुराना मास्टर प्लान साल-2010 में बना था, इसकी अवधि 2020 में समाप्त हो चुकी थी। इसके बाद साल-2020 में एक नया मास्टर प्लान तैयार कर लिया गया था, लेकिन हैरानी की बात है कि पिछले पांच साल में इसे आज तक औपचारिक रूप से नोटिफाई नहीं किया गया। मास्टर प्लान की अनुपस्थिति में शहर में बेतरतीब और अव्यवस्थित निर्माण कार्य हो रहे हैं, जिससे नगरीय ढांचे और कानून व्यवस्था दोनों पर विपरीत प्रभाव पड़ा है।
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हाईकोर्ट में एक प्राइवेट बिल्डर कंपनी ने याचिका दायर कर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी। याचिका में नए मास्टर प्लान को जल्द से जल्द लागू करने की अपील की गई थी। अदालत ने पिछले साल इस याचिका का निपटारा कर पंजाब सरकार को आठ सप्ताह के भीतर मास्टर प्लान को नोटिफाई करने के आदेश दिए थे। बावजूद इसके सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे नाराज होकर याचिकाकर्ता द्वारा अब इस मामले में अवमानना याचिका दाखिल की गई है।
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हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए पहले ही खरड़ में किसी भी प्रकार के नए निर्माण की अनुमति देने पर रोक लगा दी थी। अदालत ने स्पष्ट किया था कि जब तक मास्टर प्लान को अंतिम रूप नहीं दिया जाता, तब तक नए निर्माणों की इजाजत नहीं दी जा सकती। इसके बावजूद जब सरकार की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी पेश नहीं की गई तो अदालत ने अब अधिकारियों के वेतन को अटैच करते हुए सख्त संदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आगामी 23 सितंबर तक मास्टर प्लान को लेकर ठोस कार्रवाई की जाए। यदि तब तक भी आदेशों का पालन नहीं हुआ तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। यह मामला अब केवल एक शहरी विकास योजना की देरी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह शासन प्रणाली की जवाबदेही और प्रशासनिक इच्छाशक्ति की परीक्षा बन चुका है।
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