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Mohali News: 35 हजार रुपये रिश्वत लेने पर गमाडा के सुपरिटेंडेंट को पांच साल की कैद
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मोहाली। 35 हजार रुपये रिश्वत के मामले की सुनवाई जिला सेशन जज बलजिंदर सिंह सरां की अदालत में हुई। गमाडा में तैनात सुपरिटेंडेंट नरिंदरपाल सिंह और सेवादार कर्म सिंह पर एनओसी देने के बदले रिश्वत लेने का आरोप था। शनिवार को अदालत ने सरकारी और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद नरिंदरपाल सिंह को भ्रष्टाचार में दोषी करार देकर पांच साल कैद की सजा सुनाई है। दूसरे आरोपी सेवादार कर्म सिंह की अदालती कार्रवाई (ट्रॉयल) के दौरान मौत हो चुकी है। सरकारी पक्ष की ओर से जिला अटार्नी विजिलेंस मंजीत सिंह उक्त केस की पैरवी कर रहे थे।
जानकारी के अनुसार सेक्टर-66 निवासी नसीब सिंह संधू ने विजिलेंस को दी शिकायत में बताया कि उसने सेक्टर-78 में अपनी और अपनी पत्नी के नाम वाला प्लॉट बेचने के लिए एनओसी लेने के लिए गमाडा के दफ्तर में गया। वहां उसको कर्म सिंह सेवादार मिला, जिसने जल्द काम करवाने की बात कहकर सुपरिटेंडेंट नरिंदरपाल सिंह के साथ मिला दिया। नरिंदरपाल सिंह ने उक्त काम के लिए सात हजार की मांग की। अगले दिन सुपरिटेंडेंट ने उस काम के लिए 10 हजार मांगे और अगले दिन आने के लिए कहा।
जब उसने एनओसी के मामले में सुपरिटेंडेंट से फोन पर पूछा तो उसने रुपये बढ़ाकर 20 हजार रुपये मांगे। 20 हजार रुपये लेकर जब नसीब सिंह दोबारा गमाडा दफ्तर गया तो सुपरिटेंडेंट ने 20 हजार रुपये लेने से इंकार कर एक फार्म फाइल में नहीं होने की बात कहकर 50 हजार रुपये की मांग की। आखिरकार सौदा 35 हजार रुपये में तय हो गया। नसीब सिंह ने तंग आकर मोहाली विजिलेंस के दफ्तर में शिकायत दी। विजिलेंस ने सुपरिटेंडेंट नरिंदरपाल सिंह और सेवादार कर्म सिंह को रंगे हाथों 35 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया था।
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जानकारी के अनुसार सेक्टर-66 निवासी नसीब सिंह संधू ने विजिलेंस को दी शिकायत में बताया कि उसने सेक्टर-78 में अपनी और अपनी पत्नी के नाम वाला प्लॉट बेचने के लिए एनओसी लेने के लिए गमाडा के दफ्तर में गया। वहां उसको कर्म सिंह सेवादार मिला, जिसने जल्द काम करवाने की बात कहकर सुपरिटेंडेंट नरिंदरपाल सिंह के साथ मिला दिया। नरिंदरपाल सिंह ने उक्त काम के लिए सात हजार की मांग की। अगले दिन सुपरिटेंडेंट ने उस काम के लिए 10 हजार मांगे और अगले दिन आने के लिए कहा।
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जब उसने एनओसी के मामले में सुपरिटेंडेंट से फोन पर पूछा तो उसने रुपये बढ़ाकर 20 हजार रुपये मांगे। 20 हजार रुपये लेकर जब नसीब सिंह दोबारा गमाडा दफ्तर गया तो सुपरिटेंडेंट ने 20 हजार रुपये लेने से इंकार कर एक फार्म फाइल में नहीं होने की बात कहकर 50 हजार रुपये की मांग की। आखिरकार सौदा 35 हजार रुपये में तय हो गया। नसीब सिंह ने तंग आकर मोहाली विजिलेंस के दफ्तर में शिकायत दी। विजिलेंस ने सुपरिटेंडेंट नरिंदरपाल सिंह और सेवादार कर्म सिंह को रंगे हाथों 35 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया था।
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