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Mohali News: मंदिर का विरोध करने पर गड़रिया समाज ने दी आंदोलन की चेतावनी
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जीरकपुर। प्राचीन बाबा काली दास मंदिर के निर्माण के संदर्भ में गांव छत की गड़रिया समाज की धर्मशाला में बैठक हुई। बैठक में कहा गया कि पिछले दिनों कुछ लोगों ने इस कार्य में बाधा पहुंचाई और गड़रिया समाज का भवन क्षतिग्रस्त कर दिया। इन लोगों ने चेतावनी दी कि अगर किसी भी तरह से उनके मंदिर का विरोध किया गया तो वे अपना संघर्ष तेज करेंगे और सड़कों पर उतरेंगे। इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। इस मामले में समाज के लोगों का कहना था कि उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है।
समाज के लोगों का कहना था कि गांव में ग्राम पंचायत थी, पंचायत ने पूर्ण समर्थन के साथ प्रस्ताव पास किया था। इस पर किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। सरकार ने गडरिया समाज को करीब दो एकड़ जमीन दी है। कुछ जमीन सेवा केंद्र के लिए दी है, लेकिन गांव के कुछ लोगों ने उक्त जमीन पर अपना हक जताकर कहा कि यह जमीन खेल मैदान के लिए रखी गई है, हालांकि सभी को खेल मैदान व अन्य कार्यों के लिए जमीन आवंटित की गई है। गड़रिया समुदाय के बुजुर्गों ने बताया कि गुरु कालीदास महाराज का कोई मंदिर नहीं है, लेकिन गांव के कुछ लोगों ने जातिवादी टिप्पणी कर उनको नीचा दिखाया है। इस मौके पर गांव के गड़रिया समुदाय के युवा, बुजुर्ग मौजूद रहे।
हमारी कोशिश है कि इस जमीन पर मंदिर बनाने वाले गडरिया समाज के लोगों और दूसरे पक्ष के लोगों की आपसी सहमति बन जाए। हम मंदिर का विरोध नहीं कर रहे हैं लेकिन शामलात जमीन पर पूरे गांव का अधिकार है। पूरे गांव के लोग यहां विवाह के कार्यक्रम करते हैं। मेरी कोशिश रहेगी कि दोनों पक्षों में आपसी सहमति होनी चाहिए। -निरमैल सिंह, पार्षद, वार्ड नंबर 24, गांव छत।
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समाज के लोगों का कहना था कि गांव में ग्राम पंचायत थी, पंचायत ने पूर्ण समर्थन के साथ प्रस्ताव पास किया था। इस पर किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। सरकार ने गडरिया समाज को करीब दो एकड़ जमीन दी है। कुछ जमीन सेवा केंद्र के लिए दी है, लेकिन गांव के कुछ लोगों ने उक्त जमीन पर अपना हक जताकर कहा कि यह जमीन खेल मैदान के लिए रखी गई है, हालांकि सभी को खेल मैदान व अन्य कार्यों के लिए जमीन आवंटित की गई है। गड़रिया समुदाय के बुजुर्गों ने बताया कि गुरु कालीदास महाराज का कोई मंदिर नहीं है, लेकिन गांव के कुछ लोगों ने जातिवादी टिप्पणी कर उनको नीचा दिखाया है। इस मौके पर गांव के गड़रिया समुदाय के युवा, बुजुर्ग मौजूद रहे।
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हमारी कोशिश है कि इस जमीन पर मंदिर बनाने वाले गडरिया समाज के लोगों और दूसरे पक्ष के लोगों की आपसी सहमति बन जाए। हम मंदिर का विरोध नहीं कर रहे हैं लेकिन शामलात जमीन पर पूरे गांव का अधिकार है। पूरे गांव के लोग यहां विवाह के कार्यक्रम करते हैं। मेरी कोशिश रहेगी कि दोनों पक्षों में आपसी सहमति होनी चाहिए। -निरमैल सिंह, पार्षद, वार्ड नंबर 24, गांव छत।
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