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Mohali News: पूर्व एफएसएल निदेशक डॉ. अश्विनी कालिया की अग्रिम जमानत याचिका खारिज
Tue, 02 Sep 2025 02:05 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली
संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली
Updated Tue, 02 Sep 2025 02:05 AM IST
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अदालत ने कहा- दलित महिला अधिकारी पर टिप्पणी पर सार्वजनिक रूप से विचार किया जाएगा
संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। मोहाली की अदालत ने एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामले में पंजाब फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के पूर्व निदेशक डॉ. अश्विनी कालिया की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपी के खिलाफ आरोप बनते हैं और अग्रिम जमानत का कोई आधार नहीं है। यह मामला पुलिस स्टेशन फेज-1 मोहाली में दर्ज किया गया था। मामला 14 अगस्त 2025 से संबंधित है। शिकायतकर्ता डॉ. संदीप कौर जो एफएसएल में सहायक निदेशक हैं और अनुसूचित जाति से हैं ने डॉ. अश्विनी कालिया के खिलाफ कार्यालय में जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार डॉ. कालिया ने अपने अधीनस्थ कर्मचारियों की मौजूदगी में जातिसूचक अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी एक हाई-प्रोफाइल मामले में उनके द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट से छेड़छाड़ करने की कोशिश कर रहे थे।
डॉ. कालिया के वकील ने जमानत के लिए अदालत में दलील दी कि मामला झूठा है और अपमान सार्वजनिक रूप से नहीं हुआ इसलिए एससी/एसटी एक्ट लागू नहीं होता। हालांकि अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि अन्य कर्मचारी मौजूद हों वहां की गई जातिवादी टिप्पणी को केवल सार्वजनिक रूप से ही माना जाएगा। अदालत ने आरोपी के पिछले रिकॉर्ड का भी जिक्र किया, जिसमें दो अन्य मामलों में रिपोर्ट से छेड़छाड़ के आरोप और कारण बताओ नोटिस शामिल थे।
अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि डॉ. कालिया की अग्रिम जमानत याचिका विचार योग्य नहीं है क्योंकि उनके खिलाफ आरोप गंभीर हैं और प्रथम दृष्टया एससी/एसटी एक्ट का उल्लंघन दर्शाते हैं। इस कारण अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती। इस पर अदालत ने याचिका खारिज कर दी।
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मोहाली। मोहाली की अदालत ने एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामले में पंजाब फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के पूर्व निदेशक डॉ. अश्विनी कालिया की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपी के खिलाफ आरोप बनते हैं और अग्रिम जमानत का कोई आधार नहीं है। यह मामला पुलिस स्टेशन फेज-1 मोहाली में दर्ज किया गया था। मामला 14 अगस्त 2025 से संबंधित है। शिकायतकर्ता डॉ. संदीप कौर जो एफएसएल में सहायक निदेशक हैं और अनुसूचित जाति से हैं ने डॉ. अश्विनी कालिया के खिलाफ कार्यालय में जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार डॉ. कालिया ने अपने अधीनस्थ कर्मचारियों की मौजूदगी में जातिसूचक अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी एक हाई-प्रोफाइल मामले में उनके द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट से छेड़छाड़ करने की कोशिश कर रहे थे।
डॉ. कालिया के वकील ने जमानत के लिए अदालत में दलील दी कि मामला झूठा है और अपमान सार्वजनिक रूप से नहीं हुआ इसलिए एससी/एसटी एक्ट लागू नहीं होता। हालांकि अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि अन्य कर्मचारी मौजूद हों वहां की गई जातिवादी टिप्पणी को केवल सार्वजनिक रूप से ही माना जाएगा। अदालत ने आरोपी के पिछले रिकॉर्ड का भी जिक्र किया, जिसमें दो अन्य मामलों में रिपोर्ट से छेड़छाड़ के आरोप और कारण बताओ नोटिस शामिल थे।
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अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि डॉ. कालिया की अग्रिम जमानत याचिका विचार योग्य नहीं है क्योंकि उनके खिलाफ आरोप गंभीर हैं और प्रथम दृष्टया एससी/एसटी एक्ट का उल्लंघन दर्शाते हैं। इस कारण अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती। इस पर अदालत ने याचिका खारिज कर दी।
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