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Mohali News: ईडी ने अदालत में करोड़ों रुपये के अमरूद बाग घोटाले में 16 और आरोपियों के खिलाफ नया आरोपपत्र किया दाखिल
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मोहाली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने करोड़ों रुपये के अमरूद बाग घोटाले की जांच तेज कर 16 और आरोपियों के खिलाफ नया आरोपपत्र दाखिल किया है। इस नई कार्रवाई के साथ इस मामले में अभियोजन का सामना कर रहे लोगों की कुल संख्या 96 हो गई है। यह आरोपपत्र अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरदीप सिंह की अदालत में दायर किया गया है और मामले की सुनवाई 20 सितंबर को होगी।
आरोप पत्र में मास्टरमाइंड भूपिंदर सिंह, व्यवसायी विशाल भंडारी, उद्योगपति मुकेश जिंदल, अधिवक्ता रोहित शर्मा और उनकी पत्नी भारती, प्रॉपर्टी डीलर बिंदर सिंह और गमाडा के तत्कालीन भूमि अधिग्रहण अधिकारी जगदीश सिंह जौहल शामिल हैं। गमाडा के तीन पटवारियों बचित्तर सिंह, सुरिंदर पाल सिंह और सुरिंदर पाल सिंह के साथ-साथ बागवानी विकास अधिकारी जसप्रीत सिंह सिद्धू, वैशाली, व्यवसायी विकास भंडारी और उनकी पत्नी रितिका और प्रॉपर्टी डीलर करम सिंह और उनके भाई गुरदीप सिंह पर भी मामला दर्ज किया गया है।
जांचकर्ताओं का आरोप है कि अग्रवाल स्टील इंडस्ट्रीज में बठिंडा निवासी चंचल कुमार और उनकी पत्नी प्रवीण लता के साथ साझेदार आरोपी सतीश बंसल ने इसमें अहम भूमिका निभाई। फरवरी 2018 में कंपनी ने बंसल, प्रवीण लता और आरोपी मुकेश जिंदल के पिता देस राज के माध्यम से बकरपुर गांव में तीन एकड़ जमीन खरीदी। इसके तुरंत बाद आरोपियों को यह पता होने के बावजूद कि जमीन पहले से ही अधिग्रहण के अधीन है, उसमें अमरूद के पौधे लगाए। राजस्व, बागवानी और गमाडा अधिकारियों की मदद से रिकॉर्ड में हेराफेरी करके, आरोपियों ने कथित तौर पर पौधों को 2016 से लगाया दिखाया। इस धोखाधड़ी से उन्हें करोड़ों रुपये का मुआवजा हासिल करने में मदद मिली।
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अतिरिक्त दावों का पर्दाफाश
ईडी के आरोपपत्र में बताया है कि कैसे बंसल ने भूपिंदर सिंह और मुकेश जिंदल के समर्थन से 12 कनाल 13 मरला जमीन पर अमरूद के पौधों के लिए 1.54 करोड़ रुपये का धोखाधड़ी से दावा किया, जबकि उनकी कंपनी के पास कानूनी तौर पर केवल 8 कनाल जमीन थी। अधिकारियों ने आगे खुलासा किया कि संयुक्त स्वामित्व या सह-मालिकों के बीच बंटवारे की पुष्टि किए बिना स्व-दावे वाले कब्जे पर मुआवजा जारी किया गया था। यह आरोपपत्र, जालंधर ईडी ने एक दिन पहले विकास भंडारी, भूपिंदर सिंह, रितिका भंडारी, करम सिंह और गुरदीप सिंह सहित आरोपियों की 9.87 करोड़ रुपये की संपत्ति और स्टॉक को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत अस्थायी रूप से कुर्क करने के कदम के बाद आया है।
बड़ा घोटाला
अमरूद बाग घोटाला मोहाली के सबसे बड़े भूमि अधिग्रहण धोखाधड़ी में से एक है, जिसमें अमरूद के बागों के बदले गलत तरीके से अतिरिक्त मुआवजे का दावा किया गया था। जांचकर्ताओं का आरोप है कि निजी ज़मीन मालिकों, प्रॉपर्टी डीलरों, राजस्व अधिकारियों और बागवानी अधिकारियों के बीच गहरी सांठगांठ है, जिन्होंने मिलकर दावों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करके जनता का पैसा हड़प लिया। ईडी ने कहा कि आगे की जांच जारी है।
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आरोप पत्र में मास्टरमाइंड भूपिंदर सिंह, व्यवसायी विशाल भंडारी, उद्योगपति मुकेश जिंदल, अधिवक्ता रोहित शर्मा और उनकी पत्नी भारती, प्रॉपर्टी डीलर बिंदर सिंह और गमाडा के तत्कालीन भूमि अधिग्रहण अधिकारी जगदीश सिंह जौहल शामिल हैं। गमाडा के तीन पटवारियों बचित्तर सिंह, सुरिंदर पाल सिंह और सुरिंदर पाल सिंह के साथ-साथ बागवानी विकास अधिकारी जसप्रीत सिंह सिद्धू, वैशाली, व्यवसायी विकास भंडारी और उनकी पत्नी रितिका और प्रॉपर्टी डीलर करम सिंह और उनके भाई गुरदीप सिंह पर भी मामला दर्ज किया गया है।
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जांचकर्ताओं का आरोप है कि अग्रवाल स्टील इंडस्ट्रीज में बठिंडा निवासी चंचल कुमार और उनकी पत्नी प्रवीण लता के साथ साझेदार आरोपी सतीश बंसल ने इसमें अहम भूमिका निभाई। फरवरी 2018 में कंपनी ने बंसल, प्रवीण लता और आरोपी मुकेश जिंदल के पिता देस राज के माध्यम से बकरपुर गांव में तीन एकड़ जमीन खरीदी। इसके तुरंत बाद आरोपियों को यह पता होने के बावजूद कि जमीन पहले से ही अधिग्रहण के अधीन है, उसमें अमरूद के पौधे लगाए। राजस्व, बागवानी और गमाडा अधिकारियों की मदद से रिकॉर्ड में हेराफेरी करके, आरोपियों ने कथित तौर पर पौधों को 2016 से लगाया दिखाया। इस धोखाधड़ी से उन्हें करोड़ों रुपये का मुआवजा हासिल करने में मदद मिली।
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अतिरिक्त दावों का पर्दाफाश
ईडी के आरोपपत्र में बताया है कि कैसे बंसल ने भूपिंदर सिंह और मुकेश जिंदल के समर्थन से 12 कनाल 13 मरला जमीन पर अमरूद के पौधों के लिए 1.54 करोड़ रुपये का धोखाधड़ी से दावा किया, जबकि उनकी कंपनी के पास कानूनी तौर पर केवल 8 कनाल जमीन थी। अधिकारियों ने आगे खुलासा किया कि संयुक्त स्वामित्व या सह-मालिकों के बीच बंटवारे की पुष्टि किए बिना स्व-दावे वाले कब्जे पर मुआवजा जारी किया गया था। यह आरोपपत्र, जालंधर ईडी ने एक दिन पहले विकास भंडारी, भूपिंदर सिंह, रितिका भंडारी, करम सिंह और गुरदीप सिंह सहित आरोपियों की 9.87 करोड़ रुपये की संपत्ति और स्टॉक को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत अस्थायी रूप से कुर्क करने के कदम के बाद आया है।
बड़ा घोटाला
अमरूद बाग घोटाला मोहाली के सबसे बड़े भूमि अधिग्रहण धोखाधड़ी में से एक है, जिसमें अमरूद के बागों के बदले गलत तरीके से अतिरिक्त मुआवजे का दावा किया गया था। जांचकर्ताओं का आरोप है कि निजी ज़मीन मालिकों, प्रॉपर्टी डीलरों, राजस्व अधिकारियों और बागवानी अधिकारियों के बीच गहरी सांठगांठ है, जिन्होंने मिलकर दावों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करके जनता का पैसा हड़प लिया। ईडी ने कहा कि आगे की जांच जारी है।