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रुक गया डीसी दफ्तर का काम, मुलाजिम गए हड़ताल पर
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मोहाली। डीसी ऑफिस एवं तहसीलों में एक बार फिर काम रुक गया। अब अगले हफ्ते ही काम शुरू हो पाएगा। क्योंकि सरकार की ओर से मांगे न मानने के विरोध में मुलाजिमों ने अपनी हड़ताल अब 31 दिसंबर तक बढ़ा दी है। ऐसे में रजिस्ट्री से लेकर अन्य सारे काम रुक गए हैं। इससे रोजाना सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान मोहाली जिलेेे में होगा। मुलाजिमों का कहना है कि वह तो काम करने के लिए पूरी तरह तैयार है। लेकिन सरकार उनकी मांगों की तरफ ध्यान नहीं दे रही है। इसके चलते उन्हें यह राह चुननी पड़ी है। वहीं, अगर जल्द सुनवाई नहीं हुई तो आने वाले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी को इस चीज का नुकसान उठाना पड़ेगा।
जानकारी के मुताबिक डीसी दफ्तर मुलाजिम यूनियन की बुधवार को एक ऑनलाइन मीटिंग राज्य प्रधान गुरनाम सिंह विर्क, महासचिव जोगिंदर सिंह जीरा और चेयरमैन ओम प्रकाश की अगुवाई में हुई। इस मौके पर मुलाजिमों की मांगों और राजस्व विभाग के रवैये पर मंथन किया गया। मीटिंग में फैसला लिया गया कि अगर सरकार मुलाजिमों की मांगो को लेकर गंभीर नहीं है तो मुलाजिमों द्वारा अब दफ्तरों में कोई भी काम नहीं किया जाएगा। मुलाजिमों का कहना था कि उनकी तरफ से मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू को पत्र लिखकर जवाब मांगा गया था। उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया। वहीं, उन्होंने कहा कि अगर उनकी सुनवाई नहीं की गई तो नए साल में होने वाले विधानसभा चुनाव में इसके नतीजे भुगतने पड़ेंगे। वहीं, मुलाजिमों की तरफ से आफिस के बाहर इस संबंध में फ्लैक्स तक लगाए जाएंगे। जिक्रयोग है कि मुलाजिमों से जड़ी कई मांगे है जो सरकार काफी समय से नहीं मान रही है। जिसकी वजह से यह नौबत बनी है।
सबसे ज्यादा राजस्व मोहाली से इकट्ठा होता है
जानकारी के मुताबिक मोहाली पंजाब के प्रमुख जिलों में एक है। यहां पर प्रॉपर्टी का कारोबार पूरे पंजाब की तुलना में सबसे अधिक होता है। क्योंकि एयरपोर्ट से लेकर अन्य सारी सुविधाएं इसी एरिया में हैं। ऐसे में बाहरी राज्यों के लोग काफी संख्या में यहां पर निवेश करते हैं। लेकिन मुलाजिमों की हड़ताल से सरकार को नुकसान होगा।
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जानकारी के मुताबिक डीसी दफ्तर मुलाजिम यूनियन की बुधवार को एक ऑनलाइन मीटिंग राज्य प्रधान गुरनाम सिंह विर्क, महासचिव जोगिंदर सिंह जीरा और चेयरमैन ओम प्रकाश की अगुवाई में हुई। इस मौके पर मुलाजिमों की मांगों और राजस्व विभाग के रवैये पर मंथन किया गया। मीटिंग में फैसला लिया गया कि अगर सरकार मुलाजिमों की मांगो को लेकर गंभीर नहीं है तो मुलाजिमों द्वारा अब दफ्तरों में कोई भी काम नहीं किया जाएगा। मुलाजिमों का कहना था कि उनकी तरफ से मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू को पत्र लिखकर जवाब मांगा गया था। उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया। वहीं, उन्होंने कहा कि अगर उनकी सुनवाई नहीं की गई तो नए साल में होने वाले विधानसभा चुनाव में इसके नतीजे भुगतने पड़ेंगे। वहीं, मुलाजिमों की तरफ से आफिस के बाहर इस संबंध में फ्लैक्स तक लगाए जाएंगे। जिक्रयोग है कि मुलाजिमों से जड़ी कई मांगे है जो सरकार काफी समय से नहीं मान रही है। जिसकी वजह से यह नौबत बनी है।
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सबसे ज्यादा राजस्व मोहाली से इकट्ठा होता है
जानकारी के मुताबिक मोहाली पंजाब के प्रमुख जिलों में एक है। यहां पर प्रॉपर्टी का कारोबार पूरे पंजाब की तुलना में सबसे अधिक होता है। क्योंकि एयरपोर्ट से लेकर अन्य सारी सुविधाएं इसी एरिया में हैं। ऐसे में बाहरी राज्यों के लोग काफी संख्या में यहां पर निवेश करते हैं। लेकिन मुलाजिमों की हड़ताल से सरकार को नुकसान होगा।
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