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फर्जी पुलिस भरती घोटाला
Updated Tue, 12 Dec 2017 01:53 AM IST
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फर्जी तरीके से नियुक्त पुलिस मुलाजिम के आईकार्ड चंडीगढ़ में छपे थे
विजिलेंस जांच में आरोपी एएसआई ने पूछताछ किया खुलासा
पुलिस दो आईपीएस अधिकारियों के बारे में भी कर रही है जांच
अमर उजाला ब्यूरो
मोहाली।
इंडस्ट्रियल एरिया फेज-नौ स्थित पंजाब के डीजीपी कार्यालय के वायरलेस एंड कम्युनिकेशन विंग में हुए भर्ती घोटाले में एएसआई संजीव कुमार से पुलिस रिमांड में पूछताछ के दौरान कई चीजें सामने आई हैं। विजिलेंस जांच में आरोपी ने बताया कि जो युवा फर्जी तरीके से उसने भर्ती किए थे। उनके आईकार्ड व नियुक्ति पत्र चंडीगढ़ की एक प्रिंटिंग प्रेस में छपवाए थे। इस कारण उस पर किसी को संदेह भी नहीं हुआ। वहीं, विजिलेंस इस मामले में दो आईपीएस अधिकारियों की भी गहनता से जांच कर रही है। उस जगह के बारे में विजिलेंस को पता चल गया है। वहां पर पुलिस मंगलवार को रेड कर सकती है।
हिमाचल व उत्तराखंड में छिपा रहा आरोपी
विजिलेंस से पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया है कि वह सेक्टर-39 स्थित पंजाब पुलिस लाइन के क्वार्टर से फरार होने के बाद पहले हरिद्वार गया था। उसके बाद बाद ऋषिकेश गया। उसके बाद ज्वालाजी में छिपकर बैठा रहा। वह एक जगह पर दो या तीन दिन तक ही रहता था। संजीव का फरार होने के पीछे मकसद था कि उसने हाईकोर्ट में जमानत के लिए याचिका दायर की हुई थी जो खारिज हो गई थी। उसके बाद संजीव को लगा कि उसे अब कहीं से भी राहत नहीं मिल सकती है, इसके बाद उसने सरेंडर किया।
खुद ही सरेंडर किया था
आरोपी एएसआई संजीव ने खुद सरेंडर किया था। जिसके बाद विजिलेंस ने आरोपी को कोर्ट में पेश किया। वहां से उसे रिमांड पर भेज दिया गया। आरोपी 12 दिसंबर तक पुलिस रिमांड पर है। संजीव ने कबूल किया कि उसने ही 6 वायरलेस ऑपरेटर को जो आईकार्ड व नियुक्ति पत्र दिए थे।
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विजिलेंस जांच में आरोपी एएसआई ने पूछताछ किया खुलासा
पुलिस दो आईपीएस अधिकारियों के बारे में भी कर रही है जांच
अमर उजाला ब्यूरो
मोहाली।
इंडस्ट्रियल एरिया फेज-नौ स्थित पंजाब के डीजीपी कार्यालय के वायरलेस एंड कम्युनिकेशन विंग में हुए भर्ती घोटाले में एएसआई संजीव कुमार से पुलिस रिमांड में पूछताछ के दौरान कई चीजें सामने आई हैं। विजिलेंस जांच में आरोपी ने बताया कि जो युवा फर्जी तरीके से उसने भर्ती किए थे। उनके आईकार्ड व नियुक्ति पत्र चंडीगढ़ की एक प्रिंटिंग प्रेस में छपवाए थे। इस कारण उस पर किसी को संदेह भी नहीं हुआ। वहीं, विजिलेंस इस मामले में दो आईपीएस अधिकारियों की भी गहनता से जांच कर रही है। उस जगह के बारे में विजिलेंस को पता चल गया है। वहां पर पुलिस मंगलवार को रेड कर सकती है।
हिमाचल व उत्तराखंड में छिपा रहा आरोपी
विजिलेंस से पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया है कि वह सेक्टर-39 स्थित पंजाब पुलिस लाइन के क्वार्टर से फरार होने के बाद पहले हरिद्वार गया था। उसके बाद बाद ऋषिकेश गया। उसके बाद ज्वालाजी में छिपकर बैठा रहा। वह एक जगह पर दो या तीन दिन तक ही रहता था। संजीव का फरार होने के पीछे मकसद था कि उसने हाईकोर्ट में जमानत के लिए याचिका दायर की हुई थी जो खारिज हो गई थी। उसके बाद संजीव को लगा कि उसे अब कहीं से भी राहत नहीं मिल सकती है, इसके बाद उसने सरेंडर किया।
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खुद ही सरेंडर किया था
आरोपी एएसआई संजीव ने खुद सरेंडर किया था। जिसके बाद विजिलेंस ने आरोपी को कोर्ट में पेश किया। वहां से उसे रिमांड पर भेज दिया गया। आरोपी 12 दिसंबर तक पुलिस रिमांड पर है। संजीव ने कबूल किया कि उसने ही 6 वायरलेस ऑपरेटर को जो आईकार्ड व नियुक्ति पत्र दिए थे।
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