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उपभोक्ता आयोग का फैसला : हादसे वाली कार बेचने पर डीलर को देना होगा एक लाख रुपये मुआवजा

Wed, 12 Aug 2026 02:20 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 12 Aug 2026 02:20 AM IST
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Consumer Commission's Verdict: Dealer ordered to pay 1 lakh compensation for selling a car involved in an accident.
आयोग ने ओला फ्लीट टेक्नोलॉजीज और शाहवार मोटिव्स को एक उपभोक्ता को मुआवजा देने का आदेश दिया है
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संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। जिला उपभोक्ता आयोग ने एक अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने ओला फ्लीट टेक्नोलॉजीज और शाहवार मोटिव्स को एक उपभोक्ता को एक लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह आदेश हादसे में क्षतिग्रस्त पुरानी कार बेचने के मामले में है। कंपनियों को मानसिक परेशानी, उत्पीड़न और मुकदमेबाजी खर्च के लिए यह राशि संयुक्त रूप से देनी होगी। आयोग ने उपभोक्ता को थर्ड पार्टी बीमा के 3,860 रुपये भी लौटाने का निर्देश दिया है। यह मामला जीरकपुर निवासी मनीष कुमार की शिकायत से जुड़ा है। मनीष ने 29 अप्रैल 2022 को छह लाख रुपये में एक पुरानी मारुति ब्रेजा खरीदी थी।
धोखाधड़ी का खुलासा
खरीद के समय मनीष को बताया गया कि वाहन दुर्घटनाग्रस्त नहीं हुआ था। ओडोमीटर से भी छेड़छाड़ नहीं हुई थी, ऐसा दावा किया गया। हालांकि, यह जानकारी गलत निकली। मनीष ने 24 जुलाई 2022 को कार को दिल्ली के मारुति सर्विस सेंटर डीडी मोटर्स में दिखाया। सर्विस रिकॉर्ड की जांच में बड़ा खुलासा हुआ। जनवरी 2022 में कार करीब 10 हजार किलोमीटर चल चुकी थी। दुर्घटना के बाद करीब 70 हजार रुपये की मरम्मत हुई थी। वाहन पहले दो दुर्घटनाओं का शिकार हो चुका था।
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कंपनियों की दलीलें और आयोग का निर्णय
इस खुलासे के बाद मनीष ने ओला फ्लीट टेक्नोलॉजीज से संपर्क किया। उसने कार बदलने या पूरी खरीद रकम वापस करने की मांग की। ईमेल पर हुई बातचीत में ओला ने पहले 30 हजार रुपये और बाद में 50 हजार रुपये मुआवजा देने की पेशकश की। शिकायतकर्ता ने दोनों प्रस्ताव ठुकरा दिए। आयोग ने पाया कि ओला फ्लीट टेक्नोलॉजीज ने निर्धारित 45 दिन में लिखित जवाब दाखिल नहीं किया। इसके चलते उसका बयान रिकॉर्ड से हटा दिया गया। शाहवार मोटिव्स आयोग के समक्ष पेश नहीं हुआ। उसके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई हुई। ओला ने दलील दी कि उसने केवल खरीदार और विक्रेता के बीच संपर्क स्थापित किया था। आयोग ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने यह भी देखा कि कंपनी ने खुद विवाद के दौरान मुआवजा देने की पेशकश की थी।
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