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Mohali News: बच्चों में छाती जाम, सांस की समस्या बढ़ी<bha>;</bha> डॉक्टर बोले-ओटीसी दवाएं खतरनाक

Wed, 28 Oct 2026 02:18 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 28 Oct 2026 02:18 AM IST
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Chest congestion and breathing issues on the rise among children; doctors warn that over-the-counter (OTC) medicines are dangerous
फेज-6 सिविल अस्पताल की ओपीडी में रोजाना पहुंच रहे 50 से 60 बच्चे, अभिभावक बच्चों को बिना सलाह ओटीसी दवाएं न दें
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बच्चों में ऑक्सीजन कम, गंभीर लक्षण दिखें तो तुरंत ले जाएं अस्पताल, बच्चे गंभीर हालत में इमरजेंसी में हो रहे भर्ती

संवाद न्यूज एजेंसी

मोहाली। मौसम में बदलाव और ठंड बढ़ने से छोटे बच्चों में छाती जाम होने और सांस लेने की परेशानी बढ़ रही है। फेज-6 स्थित सिविल अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 50 से 60 बच्चे ऐसे लक्षणों के साथ पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों ने अभिभावकों को बिना चिकित्सकीय सलाह के बिना पर्ची वाली दवाएं न देने की चेतावनी दी है। गंभीर हालत वाले बच्चों को आपातकालीन विभाग में भर्ती करना पड़ रहा है। इनमें एक साल से कम उम्र के बच्चे भी शामिल हैं। कुछ बच्चों में ऑक्सीजन का स्तर कम होने की समस्या भी सामने आ रही है। सिविल अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ साहिल विकास ने बताया कि छोटे बच्चों में छाती जाम होने और सांस लेने में परेशानी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि अभिभावक कई बार सामान्य सर्दी-जुकाम समझकर मेडिकल स्टोर से दवा दे देते हैं। हालांकि, कम उम्र के बच्चों के लिए हर दवा सुरक्षित नहीं होती। बिना डॉक्टर की सलाह दवा देने से नुकसान हो सकता है और सही इलाज में देरी भी हो सकती है। डॉक्टरों की सलाह है कि बच्चों को ठंड से बचाकर रखें और उनकी सांस लेने की प्रक्रिया पर ध्यान दें।

घरेलू उपायों से बचें
बाल रोग विशेषज्ञ साहिल विकास के अनुसार, बच्चों की छाती पर हींग या हल्दी लगाने से समस्या का इलाज नहीं होता। सीधे भाप देने से जलने का खतरा रहता है। इसलिए ऐसे घरेलू उपायों से बचना चाहिए। बच्चे की सांस तेज चलने या सांस लेते समय पसलियां अंदर धंसने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
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इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
बच्चों में सांस तेज चलना या सांस लेने में परेशानी होना गंभीर लक्षण हैं। सांस लेते समय पसलियों का अंदर की ओर धंसना भी चिंताजनक है। दूध पीने में परेशानी या असामान्य सुस्ती पर ध्यान दें। होंठ या चेहरा नीला पड़ना और ऑक्सीजन का स्तर कम होना भी खतरे के संकेत हैं। गंभीर लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल के आपातकालीन विभाग में लेकर जाएं।
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डॉक्टरों की सलाह
बच्चों को ठंड से बचाकर रखें और उनकी सांस लेने की प्रक्रिया पर ध्यान दें। यदि बच्चा दूध नहीं पी पा रहा है, बहुत सुस्त है या सांस लेने में परेशानी हो रही है, तो घरेलू उपचार में समय बर्बाद न करें। गंभीर लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल की इमरजेंसी में लेकर जाएं।
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