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Mohali News: इंडस्ट्रियल प्लॉट घोटाले में तीन लोगों की अग्रिम जमानत याचिका रद्द
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इंडस्ट्रियल प्लॉट घोटाले में तीन लोगों की अग्रिम जमानत याचिका रद्द
पूर्व मंत्री और आईएएस समेत दस आरोपियों पर दर्ज हुआ था केस
माई सिटी रिपोर्टर
मोहाली। इंडस्ट्रियल प्लॉट घोटाले के मामले में तीन लोगों ने जिला अदालत में अग्रिम जमानत याचिका लगाई थी। इस पर तर्क देते हुए आरोपियों के वकीलों ने कहा कि इन्हें झूठे मामले में फंसाया गया है। उन पर लगाए गए आरोप झूठे और मनगढ़ंत हैं। उन्होंने ऐसा कोई अपराध नहीं किया है और उनसे अब कुछ वसूल भी नहीं करना है। वहीं वे जांच के लिए समय-समय पर शामिल होने के लिए तैयार हैं इसलिए उन्हें जमानत दी जाए।
वहीं दूसरी ओर सरकारी वकील ने कहा कि कॉमर्शियल प्लॉट को रिहायशी प्लॉट में बदलकर बेचने से सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया है। आरोपियों की ओर से किया गया अपराध काफी गंभीर हैं। अगर उन्हें जमानत मिल जाती है तो गवाहों और जांच को प्रभावित कर सकते हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए आवेदकों को जमानत नहीं दी जा सकती।
यह है मामला
पंजाब सरकार ने साल 1987 में आनंद लैंप्स लिमिटेड कंपनी को सेल डीड के माध्यम से 25 एकड़ जमीन अलॉट की थी, जो बाद में सिगनीफाई इनोवेशन नामक फर्म में तब्दील हो गई। सिगनीफाई इनोवेशन कंपनी ने पीएसआईडीसी से एनओसी लेकर इस प्लॉट को गुलमोहर टाउनशिप को बेच दिया था। तत्कालीन उद्योग मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा ने गुलमोहर टाउनशिप के उक्त प्लॉट को कई हिस्सों में बांटने के पत्र को एमडी पीएसआईडीसी को भेज दिया था और पीएसआईडीसी के अधिकारियों ने फाइलों को देखे बिना यहां पर टाउनशिप बसाने की मंजूरी दे दी थी।
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पूर्व मंत्री और आईएएस समेत दस आरोपियों पर दर्ज हुआ था केस
माई सिटी रिपोर्टर
मोहाली। इंडस्ट्रियल प्लॉट घोटाले के मामले में तीन लोगों ने जिला अदालत में अग्रिम जमानत याचिका लगाई थी। इस पर तर्क देते हुए आरोपियों के वकीलों ने कहा कि इन्हें झूठे मामले में फंसाया गया है। उन पर लगाए गए आरोप झूठे और मनगढ़ंत हैं। उन्होंने ऐसा कोई अपराध नहीं किया है और उनसे अब कुछ वसूल भी नहीं करना है। वहीं वे जांच के लिए समय-समय पर शामिल होने के लिए तैयार हैं इसलिए उन्हें जमानत दी जाए।
वहीं दूसरी ओर सरकारी वकील ने कहा कि कॉमर्शियल प्लॉट को रिहायशी प्लॉट में बदलकर बेचने से सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया है। आरोपियों की ओर से किया गया अपराध काफी गंभीर हैं। अगर उन्हें जमानत मिल जाती है तो गवाहों और जांच को प्रभावित कर सकते हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए आवेदकों को जमानत नहीं दी जा सकती।
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यह है मामला
पंजाब सरकार ने साल 1987 में आनंद लैंप्स लिमिटेड कंपनी को सेल डीड के माध्यम से 25 एकड़ जमीन अलॉट की थी, जो बाद में सिगनीफाई इनोवेशन नामक फर्म में तब्दील हो गई। सिगनीफाई इनोवेशन कंपनी ने पीएसआईडीसी से एनओसी लेकर इस प्लॉट को गुलमोहर टाउनशिप को बेच दिया था। तत्कालीन उद्योग मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा ने गुलमोहर टाउनशिप के उक्त प्लॉट को कई हिस्सों में बांटने के पत्र को एमडी पीएसआईडीसी को भेज दिया था और पीएसआईडीसी के अधिकारियों ने फाइलों को देखे बिना यहां पर टाउनशिप बसाने की मंजूरी दे दी थी।
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