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नीकू वार्ड से चार महीने में 400 नवजातों को मिला नया जीवन
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मोहाली। जिले में अब गंभीर पस्थितियों में पैदा होने वाले बच्चों को इलाज के लिए सीधे पीजीआई या जीएमसीएच-32 में रेफर नहीं किया जा रहा है। ऐसे मामलों में फेज-6 स्थित डॉ. बीआर आंबेडकर आयुर्विज्ञान संस्थान के जच्चा-बच्चा केंद्र में स्थापित न्यूनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (नीकू) ही उनके लिए वरदान साबित हो रहा है।
वार्ड में स्थापित अत्याधुनिक उपकरण की मदद से माहिरों की टीमें पहल के आधार पर ऐसे बच्चों का इलाज कर रही हैं। चार महीने में 400 बच्चों को नीकू वार्ड से नया जीवन दिया जा चुका है। गंभीर गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी भी अब संस्थान में हो रही है। जिले में तीन सब डिवीजन मोहाली, खरड़ और डेराबस्सी पड़ते हैं लेकिन पहले नवजातों के इलाज के लिए कोई उच्चस्तरीय सुविधा नहीं थीं। ऐसे में गंभीर नवजातों व डिलीवरी से जुड़े केस चंडीगढ़ रेफर किए जाते थे लेकिन कोरोना काल में इस चीज को लेकर दिक्कत हुई। ऐसे में जच्चा-बच्चा केंद्र को मजबूत किया गया।
इस बीच मोहाली में मेडिकल कॉलेज बनने के बाद जच्चा बच्चा केंद्र सीधे मेडिकल कॉलेज के अधीन आ गया है। यहां पर अब 12 स्त्री रोग विशेषज्ञ तैनात किए गए हैं। इसके अलावा नीकू वार्ड में अत्याधुनिक मशीनरी लगाी गई। ऐसे में उक्त वार्ड में सांस की तकलीफ, पीलिया, दिल की बीमारी, बहुत जल्दी पैदा हुए बच्चे या फिर बच्चे के पैदा होने पर उसमें कोई दिव्यांगता रह जाने वाले बच्चे भर्ती किए जाते हैं। कोशिश यह रहती है कि उनका तुरंत इलाज या सर्जरी कर उन्हें तुरंत मां तक पहुंचाया जाए। इतना ही नहीं यहां पर बच्चों के इलाज में निजी अस्पतालों की तुलना में ज्यादा खर्च भी नहीं आता है। इस तरह एक महीने से अधिक उम्र के बच्चों लिए पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीकू) स्थापित किया गया है। इस यूनिट में 8 से 10 बेड स्थापित किए गए है।
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नीकू वार्ड में मिलती हैं ये सुविधाएं
नीकू वार्ड में एलईडी फोटोथेरेपी, बच्चों को हाइपोथर्मिया से बचाने के लिए रेडिएंट वार्मर, सांस की तकलीफ वाले बच्चों के लिए कंटीन्यूअस पॉजिटिव एयर प्रेशर, इन्फ्यूजन पंप (जिनके सहारे नवजात बच्चे को दूध जैसे तरल को भेजा जाता है) की सुविधा मिलती है। वहीं यहां बच्चों को ऑक्सीजन की कमी होने पर विशेष व्यवस्था है। इसके साथ ही बच्चों के वेंटिलेटर भी हैं। नीकू में चार तरह के विशेष कमरे हैं जहां मशीनों पर बच्चों को रखा जाता है। यहां किसी को भी शोर करने की इजाजत नहीं है। बच्चों को बहुत ही शांत माहौल में रखा जाता है।
जिन्हें बेसहारा छोड़ा, उनकी लौटीं सांसें
अस्पताल के माहिरों का कहना है कि हमारे पास बहुत ही नाजुक अवस्था में बच्चों को लाया जाता है। अक्सर उनके परिवार उम्मीद छोड़ देते है लेकिन हमारी टीम के प्रयास से बच्चों को नया जीवन मिलता है। हर समय यहां एक डॉक्टर और तीन नर्स मौजूद रहती हैं। यहां से वे बच्चे भी ठीक होकर गए हैं जिनके माता-पिता उन्हें बेसहारा मरने के लिए छोड़कर चले जाते हैं। इस समय यहां सात बच्चे भर्ती हैं।
अत्याधुनिक सुविधाएं दे रहा है संस्थान
जच्चा-बच्चा केंद्र में अत्याधुनिक सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही हैं। हमारे संस्थान के माहिर भी काफी बढ़िया है। इसके अलावा अन्य स्टाफ की निरंतर ट्रेनिंग करवाई जाती है ताकि गंभीर केसों को हैंडल करने में दिक्कत न आए। आने वाले समय में इसकी सेवाओं में और सुधार होगा। -भवनीत भारती, डायरेक्टर प्रिंसिपल मेडिकल कॉलेज मोहाली
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वार्ड में स्थापित अत्याधुनिक उपकरण की मदद से माहिरों की टीमें पहल के आधार पर ऐसे बच्चों का इलाज कर रही हैं। चार महीने में 400 बच्चों को नीकू वार्ड से नया जीवन दिया जा चुका है। गंभीर गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी भी अब संस्थान में हो रही है। जिले में तीन सब डिवीजन मोहाली, खरड़ और डेराबस्सी पड़ते हैं लेकिन पहले नवजातों के इलाज के लिए कोई उच्चस्तरीय सुविधा नहीं थीं। ऐसे में गंभीर नवजातों व डिलीवरी से जुड़े केस चंडीगढ़ रेफर किए जाते थे लेकिन कोरोना काल में इस चीज को लेकर दिक्कत हुई। ऐसे में जच्चा-बच्चा केंद्र को मजबूत किया गया।
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इस बीच मोहाली में मेडिकल कॉलेज बनने के बाद जच्चा बच्चा केंद्र सीधे मेडिकल कॉलेज के अधीन आ गया है। यहां पर अब 12 स्त्री रोग विशेषज्ञ तैनात किए गए हैं। इसके अलावा नीकू वार्ड में अत्याधुनिक मशीनरी लगाी गई। ऐसे में उक्त वार्ड में सांस की तकलीफ, पीलिया, दिल की बीमारी, बहुत जल्दी पैदा हुए बच्चे या फिर बच्चे के पैदा होने पर उसमें कोई दिव्यांगता रह जाने वाले बच्चे भर्ती किए जाते हैं। कोशिश यह रहती है कि उनका तुरंत इलाज या सर्जरी कर उन्हें तुरंत मां तक पहुंचाया जाए। इतना ही नहीं यहां पर बच्चों के इलाज में निजी अस्पतालों की तुलना में ज्यादा खर्च भी नहीं आता है। इस तरह एक महीने से अधिक उम्र के बच्चों लिए पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीकू) स्थापित किया गया है। इस यूनिट में 8 से 10 बेड स्थापित किए गए है।
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नीकू वार्ड में मिलती हैं ये सुविधाएं
नीकू वार्ड में एलईडी फोटोथेरेपी, बच्चों को हाइपोथर्मिया से बचाने के लिए रेडिएंट वार्मर, सांस की तकलीफ वाले बच्चों के लिए कंटीन्यूअस पॉजिटिव एयर प्रेशर, इन्फ्यूजन पंप (जिनके सहारे नवजात बच्चे को दूध जैसे तरल को भेजा जाता है) की सुविधा मिलती है। वहीं यहां बच्चों को ऑक्सीजन की कमी होने पर विशेष व्यवस्था है। इसके साथ ही बच्चों के वेंटिलेटर भी हैं। नीकू में चार तरह के विशेष कमरे हैं जहां मशीनों पर बच्चों को रखा जाता है। यहां किसी को भी शोर करने की इजाजत नहीं है। बच्चों को बहुत ही शांत माहौल में रखा जाता है।
जिन्हें बेसहारा छोड़ा, उनकी लौटीं सांसें
अस्पताल के माहिरों का कहना है कि हमारे पास बहुत ही नाजुक अवस्था में बच्चों को लाया जाता है। अक्सर उनके परिवार उम्मीद छोड़ देते है लेकिन हमारी टीम के प्रयास से बच्चों को नया जीवन मिलता है। हर समय यहां एक डॉक्टर और तीन नर्स मौजूद रहती हैं। यहां से वे बच्चे भी ठीक होकर गए हैं जिनके माता-पिता उन्हें बेसहारा मरने के लिए छोड़कर चले जाते हैं। इस समय यहां सात बच्चे भर्ती हैं।
अत्याधुनिक सुविधाएं दे रहा है संस्थान
जच्चा-बच्चा केंद्र में अत्याधुनिक सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही हैं। हमारे संस्थान के माहिर भी काफी बढ़िया है। इसके अलावा अन्य स्टाफ की निरंतर ट्रेनिंग करवाई जाती है ताकि गंभीर केसों को हैंडल करने में दिक्कत न आए। आने वाले समय में इसकी सेवाओं में और सुधार होगा। -भवनीत भारती, डायरेक्टर प्रिंसिपल मेडिकल कॉलेज मोहाली