{"_id":"5cfd6325bdec220756713c69","slug":"15601098534-mohali-news100","type":"story","status":"publish","title_hn":"हट गया कोड ऑफ कंडक्ट, पर नहीं हटे वीआईपी सिटी की सड़कों से लावारिस पशु","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हट गया कोड ऑफ कंडक्ट, पर नहीं हटे वीआईपी सिटी की सड़कों से लावारिस पशु
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मोहाली। चुनाव बीत गया, कोड ऑफ कंडक्ट भी हट गया, नहीं हटे तो वीआईपी सिटी की सड़कों से लावारिस पशु। लावारिस गाया, सांड़ व कुत्तों से शहर को निजात दिलाने के लिए बने प्रोजेक्ट आचार संहिता के चलते लटक गए थे। आचार संहिता हटे दो हफ्ते से ज्यादा वक्त बीत चुका है, लेकिन नगर निगम ने अभी तक इन प्रोजेक्ट्स की सुध नहीं ली है। भीषण गर्मी के बीच बदहवास घूमते यह लावारिस पशु लोगों के लिए खतरे का सबब बने हुए हैं।
लोकसभा चुनाव की घोषणा से पहले वीआईपी शहर की सड़कों को लावारिस पशुओं से निजात दिलाने के लिए अहम प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा था, जो आचार संहिता के लागू होते ही ठप पड़ गया। इसमें सबसे अहम प्रोजेक्ट था, लालडू़ कैटल पॉन्ड में पशुधन की शिफ्टिंग का। मोहाली के इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित गोशाला में क्षमता से अधिक पशु होने के कारण समस्या आ रही थी। साथ ही इस गोशाला में हुई पशुधन की मौतों से विवाद भी खड़ा हो गया था। इसके बाद नगर निगम व प्रशासन ने लालडू़ कैटल पॉन्ड में पशुधन की शिफ्टिंग करने को हरी झंडी दी थी। यह शिफ्टिंग डेली बेसिस पर करके शहर की सड़कों को लावारिस पशुओं से निजात दिलाई जानी थी। इस काम के लिए लालडू़ कैटल पॉन्ड में शेडों की व्यवस्था के लिए एडीसी ने आदेश भी दिए थे, लेकिन आचार संहिता खत्म होने के बाद भी नगर निगम ने अभी तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया।
लावारिस कुत्तों की नसबंदी का प्रोजेक्ट भी लटका
दूसरा प्रोजेक्ट था लावारिस कुत्तों की नसबंदी का। इसका काम पिछले काफी समय से ठप पड़ा है। इसके लिए एक प्राइवेट कंपनी ने सहयोग के लिए हाथ बढ़ाया था। अंतिम फैसला होने से पहले ही आचार संहिता लागू हो गई, लिहाजा कंपनी को हरी झंडी नहीं मिल सकी। इस दिशा में भी नगर निगम ने अभी तक कोई पहल नहीं की है। निगम के कुछ अधिकारियों का कहना है कि चुनावी कामकाज के चलते इन प्रोजेक्ट्स पर ध्यान नहीं दिया जा सका। क्योंकि आचार संहिता के दौरान हाउस की मीटिंग नहीं बुलाई जाती। अब चूंकि आचार संहिता हट चुकी है, लिहाजा इन प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू होगा। हाउस की मीटिंग होने पर यह मुद्दे उठेंगे।
विज्ञापन
निगम समस्या से निजात दिलाने के लिए प्रतिबद्ध
निगम कमिश्नर भूपिंदर सिंह का इस प्रोजेक्ट को लेकर कहना था कि इसका स्टेटस चेक करना पड़ेगा। हालांकि उन्होंने कहा कि निगम शहर को इस गंभीर समस्या से निजात दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस प्रोजेक्ट में निगम के अलावा जिला प्रशासन और संस्थाएं भी जुड़ी हैं। सभी की ओर से सहमति बनने पर काम शुरू हो जाएगा।
बाक्स
नयागांव में भी लावारिस पशु बने आफत
नयागांव। शहर की सड़कों पर घूम रहे लावारिस पशु नयागांव में भी आफत बनने लगे हैं। इनकी संख्या कहीं ज्यादा बढ़ गई है। हर गली-चौराहे पर इनका जमावड़ा होने लगा है। इधर, काउंसिल के पास अभी तक इनसे निपटने के लिए कोई ठोस प्लान नहीं है।
शहर की शायद ही कोई ऐसी सड़क हो, जिस पर लावारिस घूमते पशु न दिखाई देते हों। इन पशुओं से वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी होती है। ऐसे में किसी के लिए भी सड़क पर चलना आसान नहीं है। कई बार हादसे भी हो चुके हैं और कई बार ऐसे हालात भी पैदा हुए जब लावारिस पशुओं ने बीच बाजार आतंक मचाया। कुछ दिन पहले एक सांड़ चोट लगने से घायल हो गया था, जिसकी देखभाल फॉरएवर फॉर यू के वालंटियर्स और एक स्थानीय दुकानदार ने की। इस बारे में जब काउंसिल अधिकारियों को सूचित किया तो समस्या से निपटने के लिए उनके पास कोई साधन नहीं था। एक दिन बाद कैबिनेट मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू के दखल के बाद मोहाली से गाडी़ मंगवाकर घायल सांड़ को इलाज के लिए भेजा गया।
वहीं फॉरएवर फॉर यू के प्रधान रवि बिष्ट का कहना है कि बहुत से लोग पशुओं को खुले में छोड़ते हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। नगर काउंसिल को इसे गंभीरता से लेते हुए कैटल कैचर टीम का भी इंतजाम करना चाहिए।
विज्ञापन
लोकसभा चुनाव की घोषणा से पहले वीआईपी शहर की सड़कों को लावारिस पशुओं से निजात दिलाने के लिए अहम प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा था, जो आचार संहिता के लागू होते ही ठप पड़ गया। इसमें सबसे अहम प्रोजेक्ट था, लालडू़ कैटल पॉन्ड में पशुधन की शिफ्टिंग का। मोहाली के इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित गोशाला में क्षमता से अधिक पशु होने के कारण समस्या आ रही थी। साथ ही इस गोशाला में हुई पशुधन की मौतों से विवाद भी खड़ा हो गया था। इसके बाद नगर निगम व प्रशासन ने लालडू़ कैटल पॉन्ड में पशुधन की शिफ्टिंग करने को हरी झंडी दी थी। यह शिफ्टिंग डेली बेसिस पर करके शहर की सड़कों को लावारिस पशुओं से निजात दिलाई जानी थी। इस काम के लिए लालडू़ कैटल पॉन्ड में शेडों की व्यवस्था के लिए एडीसी ने आदेश भी दिए थे, लेकिन आचार संहिता खत्म होने के बाद भी नगर निगम ने अभी तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया।
विज्ञापन
लावारिस कुत्तों की नसबंदी का प्रोजेक्ट भी लटका
दूसरा प्रोजेक्ट था लावारिस कुत्तों की नसबंदी का। इसका काम पिछले काफी समय से ठप पड़ा है। इसके लिए एक प्राइवेट कंपनी ने सहयोग के लिए हाथ बढ़ाया था। अंतिम फैसला होने से पहले ही आचार संहिता लागू हो गई, लिहाजा कंपनी को हरी झंडी नहीं मिल सकी। इस दिशा में भी नगर निगम ने अभी तक कोई पहल नहीं की है। निगम के कुछ अधिकारियों का कहना है कि चुनावी कामकाज के चलते इन प्रोजेक्ट्स पर ध्यान नहीं दिया जा सका। क्योंकि आचार संहिता के दौरान हाउस की मीटिंग नहीं बुलाई जाती। अब चूंकि आचार संहिता हट चुकी है, लिहाजा इन प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू होगा। हाउस की मीटिंग होने पर यह मुद्दे उठेंगे।
विज्ञापन
निगम समस्या से निजात दिलाने के लिए प्रतिबद्ध
निगम कमिश्नर भूपिंदर सिंह का इस प्रोजेक्ट को लेकर कहना था कि इसका स्टेटस चेक करना पड़ेगा। हालांकि उन्होंने कहा कि निगम शहर को इस गंभीर समस्या से निजात दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस प्रोजेक्ट में निगम के अलावा जिला प्रशासन और संस्थाएं भी जुड़ी हैं। सभी की ओर से सहमति बनने पर काम शुरू हो जाएगा।
बाक्स
नयागांव में भी लावारिस पशु बने आफत
नयागांव। शहर की सड़कों पर घूम रहे लावारिस पशु नयागांव में भी आफत बनने लगे हैं। इनकी संख्या कहीं ज्यादा बढ़ गई है। हर गली-चौराहे पर इनका जमावड़ा होने लगा है। इधर, काउंसिल के पास अभी तक इनसे निपटने के लिए कोई ठोस प्लान नहीं है।
शहर की शायद ही कोई ऐसी सड़क हो, जिस पर लावारिस घूमते पशु न दिखाई देते हों। इन पशुओं से वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी होती है। ऐसे में किसी के लिए भी सड़क पर चलना आसान नहीं है। कई बार हादसे भी हो चुके हैं और कई बार ऐसे हालात भी पैदा हुए जब लावारिस पशुओं ने बीच बाजार आतंक मचाया। कुछ दिन पहले एक सांड़ चोट लगने से घायल हो गया था, जिसकी देखभाल फॉरएवर फॉर यू के वालंटियर्स और एक स्थानीय दुकानदार ने की। इस बारे में जब काउंसिल अधिकारियों को सूचित किया तो समस्या से निपटने के लिए उनके पास कोई साधन नहीं था। एक दिन बाद कैबिनेट मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू के दखल के बाद मोहाली से गाडी़ मंगवाकर घायल सांड़ को इलाज के लिए भेजा गया।
वहीं फॉरएवर फॉर यू के प्रधान रवि बिष्ट का कहना है कि बहुत से लोग पशुओं को खुले में छोड़ते हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। नगर काउंसिल को इसे गंभीरता से लेते हुए कैटल कैचर टीम का भी इंतजाम करना चाहिए।