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जीरकपुर : छतबीड़ चिडिय़ाघर के नए बाड़े में पल रहे हैं हरिके पतन में छोड़े जाने वाले घडिय़ाल
Updated Mon, 20 Nov 2017 02:10 AM IST
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हरिके पत्तन की शोभा बढ़ाएंगे छतबीड़ के घड़ियाल
छतबीड़ जू के नए बाड़े में पल रहे 50 घड़ियाल
अमर उजाला ब्यूरो
जीरकपुर।
हरिके पत्तन में 50 साल बाद शीघ्र ही घड़ियाल दिखेंगे। छतबीड़ जू में पल रहे 50 घड़ियाल सतलुज व्यास के संगम क्षेत्र हरिके पत्तन की प्रस्तावित वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी में शिफ्ट करने की तैयारी है। वहीं, छतबीड़ जू में इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया देहरादून के विशेषज्ञों की देखरेख में घड़ियालों का पालन पोषण किया जा रहा है।
36 महीने बाद भी सभी बच्चे सलामत
जानकारी के मुताबिक, छतबीड़ जू ने कैप्टिविटी में घड़ियाल के बच्चों का सौ फीसदी सरवाइवल रेट कायम कर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था। वहीं, बीते 36 महीने के बाद सभी 50 बच्चे सलामत हैं, उनकी ग्रोथ भी सही है। इस बार लीक से हटकर घड़ियाल के प्रजनन एवं संरक्षण के तमाम उपाय इसकी वजह है। शेड्यूल वन के ये बच्चे अब जू की ऐसी संपदा बन गए हैं, जिस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हैं। शीघ्र ही घड़ियाल के इन बच्चों को हरिके पत्तन में में शिफ्ट करने की योजना है। जिक्रयोग है कि हरिके पत्तन कभी घड़ियालों का पसंदीदा होमलैंड था। शिकार के कारण 50 साल पहले घड़ियाल खत्म हो गए थे। हालांकि नेचुरल हेबिटेट में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत बाहर से घड़ियाल मंगाए जाएंगे, लेकिन छतबीड़ के घड़ियाल भी हरिके पत्तन वेटलैंड का हिस्सा बनेंगे। जबकि छोड़ने के समय उनकी लंबाई डेढ़ मीटर और आयु तीन साल हो जाएगी। इनके सफल प्रजनन से हरिके पत्तन का महत्व बढ़ जाएगा।
शीघ्र आम लोगों के लिए खुलेगा घड़ियालों का बाड़
प्रबंधकों की मानें तो छतबीड़ जू में घड़ियाल के बच्चों को विशेष रूप से तैयार किए जा रहे 60 गुणा 20 फुट के बाड़े में रखा जाएगा। इसमें हरिके पत्तन झील की लहरों जैसा ही माहौल तैयार किया जा रहा है, जो शीघ्र बनकर तैयार हो जाएगा। इसके बीचों बीच 30 गुणा 10 फुट चौड़ा दो फुट गहरा तालाब बनाया गया है, इसके चारों ओर रेत जमा है।
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बढ़ती उम्र के साथ तेवर भी आक्रामक
घड़ियाल के बाड़े में अभी बल्ब, एग्जॉस्ट फैन, रूम हीटर, ब्लोअर्स लगाकर 20 डिग्री से अधिक तापमान मेंटेन किया जा रहा है। इनकी गतिविधियों पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है। बढ़ती उम्र के साथ इनके तेवर भी आक्रामक हो गए हैं। प्रत्येक घड़ियाल की खुराक छह से सात इंच लंबी एक दर्जन जिंदा मछलियां है। वहीं, इनका वजन पांच से दस किलो और लंबाई ढाई से तीन फुट तक हो चुकी है।
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छतबीड़ जू के नए बाड़े में पल रहे 50 घड़ियाल
अमर उजाला ब्यूरो
जीरकपुर।
हरिके पत्तन में 50 साल बाद शीघ्र ही घड़ियाल दिखेंगे। छतबीड़ जू में पल रहे 50 घड़ियाल सतलुज व्यास के संगम क्षेत्र हरिके पत्तन की प्रस्तावित वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी में शिफ्ट करने की तैयारी है। वहीं, छतबीड़ जू में इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया देहरादून के विशेषज्ञों की देखरेख में घड़ियालों का पालन पोषण किया जा रहा है।
36 महीने बाद भी सभी बच्चे सलामत
जानकारी के मुताबिक, छतबीड़ जू ने कैप्टिविटी में घड़ियाल के बच्चों का सौ फीसदी सरवाइवल रेट कायम कर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था। वहीं, बीते 36 महीने के बाद सभी 50 बच्चे सलामत हैं, उनकी ग्रोथ भी सही है। इस बार लीक से हटकर घड़ियाल के प्रजनन एवं संरक्षण के तमाम उपाय इसकी वजह है। शेड्यूल वन के ये बच्चे अब जू की ऐसी संपदा बन गए हैं, जिस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हैं। शीघ्र ही घड़ियाल के इन बच्चों को हरिके पत्तन में में शिफ्ट करने की योजना है। जिक्रयोग है कि हरिके पत्तन कभी घड़ियालों का पसंदीदा होमलैंड था। शिकार के कारण 50 साल पहले घड़ियाल खत्म हो गए थे। हालांकि नेचुरल हेबिटेट में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत बाहर से घड़ियाल मंगाए जाएंगे, लेकिन छतबीड़ के घड़ियाल भी हरिके पत्तन वेटलैंड का हिस्सा बनेंगे। जबकि छोड़ने के समय उनकी लंबाई डेढ़ मीटर और आयु तीन साल हो जाएगी। इनके सफल प्रजनन से हरिके पत्तन का महत्व बढ़ जाएगा।
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शीघ्र आम लोगों के लिए खुलेगा घड़ियालों का बाड़
प्रबंधकों की मानें तो छतबीड़ जू में घड़ियाल के बच्चों को विशेष रूप से तैयार किए जा रहे 60 गुणा 20 फुट के बाड़े में रखा जाएगा। इसमें हरिके पत्तन झील की लहरों जैसा ही माहौल तैयार किया जा रहा है, जो शीघ्र बनकर तैयार हो जाएगा। इसके बीचों बीच 30 गुणा 10 फुट चौड़ा दो फुट गहरा तालाब बनाया गया है, इसके चारों ओर रेत जमा है।
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बढ़ती उम्र के साथ तेवर भी आक्रामक
घड़ियाल के बाड़े में अभी बल्ब, एग्जॉस्ट फैन, रूम हीटर, ब्लोअर्स लगाकर 20 डिग्री से अधिक तापमान मेंटेन किया जा रहा है। इनकी गतिविधियों पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है। बढ़ती उम्र के साथ इनके तेवर भी आक्रामक हो गए हैं। प्रत्येक घड़ियाल की खुराक छह से सात इंच लंबी एक दर्जन जिंदा मछलियां है। वहीं, इनका वजन पांच से दस किलो और लंबाई ढाई से तीन फुट तक हो चुकी है।