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नशे की फसल : अफगानिस्तान में अफीम की खेती बढ़ी, तस्करों ने बंदरगाह का रूट अपनाया
Thu, 28 Apr 2022 06:37 AM IST
दुष्यंत शर्मा
सुरिंदर पाल, जालंधर
सुरिंदर पाल, जालंधर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 28 Apr 2022 06:37 AM IST
सार
बड़ा कारण है कि अफगानिस्तान में अफीम की खेती का रकबा बढ़ गया है और तस्कर बंदरगाह कर रूट अपना रहे हैं। पंजाब के तस्करों का सीधा अफगानिस्तान कनेक्शन सामने आया है, जबकि पंजाब सीमा से तस्करी कम हुई है।
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अफीम की खेती
- फोटो : ANI
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विस्तार
कश्मीर और पंजाब की सीमाएं सील किए जाने के बाद अब 1600 किलोमीटर लंबे गुजरात के समुद्री क्षेत्र का उपयोग ड्रग्स माफियाओं द्वारा किया जा रहा है। बड़ा कारण है कि अफगानिस्तान में अफीम की खेती का रकबा बढ़ गया है और तस्कर बंदरगाह कर रूट अपना रहे हैं। पंजाब के तस्करों का सीधा अफगानिस्तान कनेक्शन सामने आया है, जबकि पंजाब सीमा से तस्करी कम हुई है।
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पिछले साल 13 सितंबर को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर जब डायरेक्टर ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस ने 3000 किलो हेरोइन पकड़ी तो देश की तमाम सुरक्षा एजेंसियां हिल गईं। तस्वीर साफ हुई कि पंजाब के ड्रग तस्करों का इस खेप में पूरा हाथ था और उन्होंने यह हेरोइन मंगवाने के लिए पंजाब से सटी पाक सीमा नहीं, बल्कि समुद्री रास्ता अख्तियार किया था। देश की सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ने लगी है, क्योंकि पंजाब के ड्रग तस्करों का सीधा कनेक्शन अफगानिस्तान में बन गया है और वहां इस साल करीब 40 फीसदी अफीम की अधिक खेती होने का अनुमान है। यह भारत के अलावा अन्य एशियाई देशों के लिए खतरे की घंटी है।
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2 लाख 95 हजार हेक्टेयर में अफीम की खेती
सरकारी आंकड़े इस बात का गवाह हैं कि दुनिया की 85 फीसदी अफीम की खेती अफगानिस्तान में होती है। पिछले दो वर्षों में अफीम की खेती बढ़कर 295000 हेक्टेयर तक पहुंच चुकी है। अफीम से ही हेरोइन बनाई जाती है। इसकी सप्लाई में पाकिस्तान, अफगानिस्तान की बड़ी मदद करता है। इसके अलावा ईरान और मध्य एशियाई देशों के जरिये हेरोइन की तस्करी की जाती है। 13 सितंबर को मुंद्रा बंदरगाह पर पकड़ी गई हेरोइन ईरान के बंदरगाह अब्बास से होते हुए अफगानिस्तान के कांधार से आई थी।
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पंजाब के नामी तस्करों का नेटवर्क सीधा अफगानिस्तान में बन चुका है, जिसमें गांव वजीर भुल्लर का नवप्रीत नव है। दिल्ली में 354 किलो हेरोइन की खेप हो या अमृतसर में 2700 करोड़ रुपये की हेरोइन या अटारी बार्डर पर 532 किलो हेरोइन की बरामदगी, हर केस में नवप्रीत नव पर जाकर जांच अटकी है।
आतंकवादियों से संबंध के कारण नवप्रीत बना हेरोइन का बड़ा डीलर
नवप्रीत नव हेरोइन तस्कर ही नहीं, बल्कि हथियारों का सौदागर भी है। पिछले साल मोहाली में आर्म्स और एनडीपीएस एक्ट में दर्ज केस समेत पंजाब के विभिन्न हिस्सों में वांछित राजिंदर सिंह उर्फ गंजा उर्फ मिट्ठू को जीरकपुर के रीवर डेल एरोविस्टा स्थित फ्लैट से गिरफ्तार करने के बाद उसके कब्जे से 530 ग्राम हेरोइन, .32 बोर की पिस्टल और 4 कारतूस बरामद किए गए थे।
गंजा कुख्यात तस्कर और कत्ल के मामलों में गिरफ्तार नवप्रीत सिंह उर्फ नव के साथ मिलकर ड्रग सप्लाई के धंधे से जुड़ा था। राजिंदर सिंह उर्फ गंजा दिल्ली और श्रीनगर से आने वाली नशे की खेप को हासिल कर पंजाब में सप्लाई करता था। ड्रग मनी को हवाला राशि के रूप में नवप्रीत को भेज देता था। नव के तार प्रतिबंधित संगठन खालिस्तान लिबरेशन फोर्स के साथ जुड़े हैं।
खालिस्तान लिबरेशन फोर्स के जजबीर सिंह उर्फ जज को जब गिरफ्तार किया गया तो उसने पूछताछ में यह कुबूल किया था कि वह राजिंदर सिंह गंजा के द्वारा हेरोइन की सप्लाई करता था। एजेंसियों के आला अधिकारिक सूत्रों के अनुसार नवप्रीत नव का सीधा कनेक्शन अफगानिस्तान में बन गया है और वहां से वह सीधा हेरोइन की खेप मंगवा रहा है।