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बादल बोले, सुखदेव ढींढसा व जेटली की हार का हमेशा रहेगा मलाल
अमर उजाला, (सुनाम/संगरूर)
Updated Thu, 31 Jul 2014 10:41 PM IST
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शहीद ऊधम सिंह के प्रदेश स्तरीय बलिदान दिवस समागम में शहीद को श्रद्धांजलि कम तथा लोकसभा चुनाव में अकाली भाजपा गठबंधन की हार का दर्द ज्यादा बयां किया गया।
इसके अलावा हरियाणा में गठित अलग गुरुद्वारा कमेटी का मुद्दा भी नेताओं की जुबान पर रहा। समागम में सभी वक्ताओं ने संगरूर सीट से अकाली भाजपा प्रत्याशी व राज्यसभा सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा की हार का बार बार जिक्र किया। यहां तक कि मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की जुबान पर भी यह दर्द आ ही गया।
बादल ने कहा कि उन्हें केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली तथा सीनियर ढींढसा की हार का मलाल हमेशा रहेगा। बादल ने कहा कि सीनियर ढींढसा की हार से सबसे बड़ा नुकसान पंजाब का हुआ है। उनकी जीत से पंजाब को भारी लाभ मिलना था और एनडीए सरकार में पंजाब की मजबूत स्थिति बननी थी। निजी तौर पर ढींढसा को हार से कोई नुकसान नहीं हुआ है क्योंकि उनका सियासी कद इस हार जीत से बड़ा है। जेटली की हार ने भी उन्हें दुख पहुंचाया है।
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बादल के अलावा अन्य नेताओं ने पंजाब के ज्वलंत मुद्दों व समस्याओं का ठीकरा कांग्रेस के सिर फोटा। नेताओं ने रेत व बजरी के बेलगाम दाम, नशा और प्रॉपर्टी टैक्स का मुद्दा मंच से उठाते इसके लिए कांग्रेस की तत्कालीन केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। दूसरी तरफ हरियाणा में अलग एसजीपीसी गठित होने का मुद्दा उछालकर नेताओं ने शहीदी समागम में कांग्रेस को जमकर कोसा।
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इसके अलावा हरियाणा में गठित अलग गुरुद्वारा कमेटी का मुद्दा भी नेताओं की जुबान पर रहा। समागम में सभी वक्ताओं ने संगरूर सीट से अकाली भाजपा प्रत्याशी व राज्यसभा सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा की हार का बार बार जिक्र किया। यहां तक कि मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की जुबान पर भी यह दर्द आ ही गया।
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बादल ने कहा कि उन्हें केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली तथा सीनियर ढींढसा की हार का मलाल हमेशा रहेगा। बादल ने कहा कि सीनियर ढींढसा की हार से सबसे बड़ा नुकसान पंजाब का हुआ है। उनकी जीत से पंजाब को भारी लाभ मिलना था और एनडीए सरकार में पंजाब की मजबूत स्थिति बननी थी। निजी तौर पर ढींढसा को हार से कोई नुकसान नहीं हुआ है क्योंकि उनका सियासी कद इस हार जीत से बड़ा है। जेटली की हार ने भी उन्हें दुख पहुंचाया है।
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बादल के अलावा अन्य नेताओं ने पंजाब के ज्वलंत मुद्दों व समस्याओं का ठीकरा कांग्रेस के सिर फोटा। नेताओं ने रेत व बजरी के बेलगाम दाम, नशा और प्रॉपर्टी टैक्स का मुद्दा मंच से उठाते इसके लिए कांग्रेस की तत्कालीन केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। दूसरी तरफ हरियाणा में अलग एसजीपीसी गठित होने का मुद्दा उछालकर नेताओं ने शहीदी समागम में कांग्रेस को जमकर कोसा।