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गणेश उत्सव से पहले महाराष्ट्र में डीजे पर घमासान: मंत्री बोले- स्वास्थ्य से समझौता नहीं, क्या है पूरा मामला?
Sun, 06 Sep 2026 07:33 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, जालना।
पीटीआई, जालना।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 06 Sep 2026 07:33 PM IST
सार
महाराष्ट्र में गणेश उत्सव से पहले डीजे और तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम का मुद्दा गरमा गया है। छत्रपति संभाजीनगर में मंत्रियों ने डीजे से दूरी बनाने की अपील की है और नियम तोड़ने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है। पुणे में नागरिकों ने मार्च निकालकर डीजे पर पूरी रोक की मांग की। इस बहस के केंद्र में शोर प्रदूषण, स्वास्थ्य और त्योहारों को पारंपरिक तरीके से मनाने का मुद्दा है।
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डीजे को लेकर बवाल
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
गणेश उत्सव से पहले महाराष्ट्र में डीजे और तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम को लेकर बहस तेज हो गई है। छत्रपति संभाजीनगर में स्वास्थ्य राज्यमंत्री मेघना बोर्डिकर और जिला पालकमंत्री संजय शिरसाट ने डीजे के इस्तेमाल का विरोध किया है। दोनों नेताओं ने लोगों से पारंपरिक तरीके से उत्सव मनाने की अपील की। उनका कहना है कि त्योहार खुशी से मनना चाहिए, लेकिन इससे दूसरों को परेशानी या स्वास्थ्य संबंधी खतरा नहीं होना चाहिए।
मेघना बोर्डिकर ने क्या-क्या कहा?
मेघना बोर्डिकर ने कहा कि पिछले साल उनके एक कजिन की डीजे सिस्टम की वजह से मौत हो गई थी। बोर्डिकर ने कहा कि लोगों से लगातार अपील की जाती है और सुप्रीम कोर्ट ने भी इससे जुड़े दिशा-निर्देश दिए हैं, लेकिन कई लोग उनका पालन नहीं करते। उन्होंने कहा कि डीजे का इस्तेमाल जानलेवा साबित हो सकता है और उन्होंने खुद इस त्रासदी को झेला है।
छत्रपति संभाजीनगर प्रशासन ने क्या चेतावनी दी?
गणेश उत्सव की तैयारियों को लेकर हुई बैठक के बाद संजय शिरसाट ने साफ किया कि शहर में डीजे सिस्टम नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई करेगी। नियम तोड़ने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा और डीजे उपकरण ले जाने वाले वाहनों को जब्त किया जाएगा। शिरसाट ने गणेश मंडलों से अपील की कि वे कार्रवाई से बचने के लिए खुद ही तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम का इस्तेमाल न करें। उनका कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों को भी आराम से उत्सव में शामिल होने का मौका मिलना चाहिए।
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यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र-कर्नाटक के बाद अब बंगाल में कार्रवाई: रेस्तरां-भोजनालयों पर छापे, खाद्य सुरक्षा नियमों की जांच तेज
क्या पुणे में भी डीजे के खिलाफ विरोध शुरू?
रविवार को पुणे में तेज आवाज वाले डीजे सिस्टम के खिलाफ विरोध मार्च निकाला गया। प्रदर्शनकारियों ने ऐसे सिस्टम पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की। उनका कहना था कि शोर प्रदूषण से सुरक्षा और शांतिपूर्ण माहौल हर नागरिक का अधिकार है। बालगंधर्व रंग मंदिर से शुरू हुआ मार्च पुणे नगर निगम मुख्यालय तक गया। प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि जब सोलापुर और नागपुर जैसे शहरों में डीजे पर रोक की घोषणाएं की गई हैं, तो पुणे में ऐसा क्यों नहीं हो सकता। प्रदर्शन के बाद हुई सभा में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि शनिवार के दही हांडी कार्यक्रम के दौरान पुणे पुलिस तेज आवाज पर नियंत्रण करने में नाकाम रही।
बापट पर हमले के विरोध में प्रदर्शन
यह मार्च लाउडस्पीकर ऑपोजिशन पुणे सिटीजन्स फोरम ने आयोजित किया था। इसका आयोजन उस घटना के बाद हुआ, जिसमें डीजे पर रोक की मांग कर रहे कार्यकर्ता विद्यानंद बापट पर हमला हुआ था। बापट लंबे समय से त्योहारों में तेज आवाज वाले डीजे के इस्तेमाल के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। महाराष्ट्र में डीजे और हाई-डेसीबल साउंड सिस्टम के विरोध की मांग अब गणेश उत्सव से पहले ज्यादा मुखर होती दिख रही है। प्रशासन जहां नियमों के पालन की बात कर रहा है, वहीं नागरिक संगठन पूरी तरह रोक की मांग कर रहे हैं।
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मेघना बोर्डिकर ने क्या-क्या कहा?
मेघना बोर्डिकर ने कहा कि पिछले साल उनके एक कजिन की डीजे सिस्टम की वजह से मौत हो गई थी। बोर्डिकर ने कहा कि लोगों से लगातार अपील की जाती है और सुप्रीम कोर्ट ने भी इससे जुड़े दिशा-निर्देश दिए हैं, लेकिन कई लोग उनका पालन नहीं करते। उन्होंने कहा कि डीजे का इस्तेमाल जानलेवा साबित हो सकता है और उन्होंने खुद इस त्रासदी को झेला है।
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छत्रपति संभाजीनगर प्रशासन ने क्या चेतावनी दी?
गणेश उत्सव की तैयारियों को लेकर हुई बैठक के बाद संजय शिरसाट ने साफ किया कि शहर में डीजे सिस्टम नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई करेगी। नियम तोड़ने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा और डीजे उपकरण ले जाने वाले वाहनों को जब्त किया जाएगा। शिरसाट ने गणेश मंडलों से अपील की कि वे कार्रवाई से बचने के लिए खुद ही तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम का इस्तेमाल न करें। उनका कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों को भी आराम से उत्सव में शामिल होने का मौका मिलना चाहिए।
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क्या पुणे में भी डीजे के खिलाफ विरोध शुरू?
रविवार को पुणे में तेज आवाज वाले डीजे सिस्टम के खिलाफ विरोध मार्च निकाला गया। प्रदर्शनकारियों ने ऐसे सिस्टम पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की। उनका कहना था कि शोर प्रदूषण से सुरक्षा और शांतिपूर्ण माहौल हर नागरिक का अधिकार है। बालगंधर्व रंग मंदिर से शुरू हुआ मार्च पुणे नगर निगम मुख्यालय तक गया। प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि जब सोलापुर और नागपुर जैसे शहरों में डीजे पर रोक की घोषणाएं की गई हैं, तो पुणे में ऐसा क्यों नहीं हो सकता। प्रदर्शन के बाद हुई सभा में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि शनिवार के दही हांडी कार्यक्रम के दौरान पुणे पुलिस तेज आवाज पर नियंत्रण करने में नाकाम रही।
बापट पर हमले के विरोध में प्रदर्शन
यह मार्च लाउडस्पीकर ऑपोजिशन पुणे सिटीजन्स फोरम ने आयोजित किया था। इसका आयोजन उस घटना के बाद हुआ, जिसमें डीजे पर रोक की मांग कर रहे कार्यकर्ता विद्यानंद बापट पर हमला हुआ था। बापट लंबे समय से त्योहारों में तेज आवाज वाले डीजे के इस्तेमाल के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। महाराष्ट्र में डीजे और हाई-डेसीबल साउंड सिस्टम के विरोध की मांग अब गणेश उत्सव से पहले ज्यादा मुखर होती दिख रही है। प्रशासन जहां नियमों के पालन की बात कर रहा है, वहीं नागरिक संगठन पूरी तरह रोक की मांग कर रहे हैं।