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Amritsar News: शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह के समर पैलेस के कायाकल्प में दो सरकारी विभाग आमने-सामने
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-आर्कियोलाजिकल सर्वे ऑफ इंडिया को नगर निगम ने नोटिस भेज बंद करवाया काम
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अमृतसर। शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह के समर पैलेस के कायाकल्प को लेकर आर्कियोलाजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) और नगर निगम अमृतसर में विवाद गहराता जा रहा है। निगम ने एएसआई के संरक्षण कार्य पर आपत्ति जताते हुए काम रुकवा दिया जबकि एएसआई का कहना है कि वे अपनी हद में ही कार्य कर रहे हैं।
विवाद का केंद्र कंपनी बाग स्थित नॉर्थ प्रवेश की इमारत है। एएसआई ने इसका संरक्षण कार्य किया, जिसका करीब 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। अगले चरण में प्रवेश द्वार से म्यूजियम तक जोड़ने का कार्य प्रस्तावित है। लेकिन इस दौरान सर्विस क्लब और अमृतसर क्लब को आने-जाने का रास्ता बंद होने पर निगम ने शिकायत मिलने के बाद काम रुकवा दिया।
एएसआई के सीनियर कंजर्वेशन असिस्टेंट श्री ओम ने बताया कि कंपनी बाग को 2004 में राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया गया था और उसके कायाकल्प का जिम्मा केवल एएसआई को ही दिया गया है। उन्होंने कहा कि किसी अन्य विभाग को काम करने से पहले उन्हें सूचना देना अनिवार्य है, लेकिन नगर निगम ने ऐसा नहीं किया। स्थानीय नागरिक और क्लब सदस्य दोनों ही ऐतिहासिक संरक्षण और दैनिक सुविधा के बीच संतुलन बनाने की मांग कर रहे हैं। अब दोनों विभागों के बीच बातचीत और कानूनी दिशा तय करने की संभावना जताई जा रही है।
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अमृतसर। शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह के समर पैलेस के कायाकल्प को लेकर आर्कियोलाजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) और नगर निगम अमृतसर में विवाद गहराता जा रहा है। निगम ने एएसआई के संरक्षण कार्य पर आपत्ति जताते हुए काम रुकवा दिया जबकि एएसआई का कहना है कि वे अपनी हद में ही कार्य कर रहे हैं।
विवाद का केंद्र कंपनी बाग स्थित नॉर्थ प्रवेश की इमारत है। एएसआई ने इसका संरक्षण कार्य किया, जिसका करीब 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। अगले चरण में प्रवेश द्वार से म्यूजियम तक जोड़ने का कार्य प्रस्तावित है। लेकिन इस दौरान सर्विस क्लब और अमृतसर क्लब को आने-जाने का रास्ता बंद होने पर निगम ने शिकायत मिलने के बाद काम रुकवा दिया।
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एएसआई के सीनियर कंजर्वेशन असिस्टेंट श्री ओम ने बताया कि कंपनी बाग को 2004 में राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया गया था और उसके कायाकल्प का जिम्मा केवल एएसआई को ही दिया गया है। उन्होंने कहा कि किसी अन्य विभाग को काम करने से पहले उन्हें सूचना देना अनिवार्य है, लेकिन नगर निगम ने ऐसा नहीं किया। स्थानीय नागरिक और क्लब सदस्य दोनों ही ऐतिहासिक संरक्षण और दैनिक सुविधा के बीच संतुलन बनाने की मांग कर रहे हैं। अब दोनों विभागों के बीच बातचीत और कानूनी दिशा तय करने की संभावना जताई जा रही है।
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