{"_id":"ab0a14eb2473947f67a1ee4756f1de30","slug":"punjab-pathankot-tribute-to-martyr-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नम आंखों से शहीद बेटे को अखनाना दे दी विदाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नम आंखों से शहीद बेटे को अखनाना दे दी विदाई
ब्यूरो/अमर उजाला, पठानकोट
Updated Sun, 07 Jun 2015 10:09 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मणिपुर के नंदेल जिले में सेना के काफिले पर उग्रवादी हमले में शहीद हुए 6
विज्ञापन
डोगरा यूनिट के नायक मंजीत सिंह का पार्थिव शरीर रविवार की सुबह उनके पैतृक
गांव अखवाना पहुंचा।
शहीद को नमन करने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। पैतृक गांव अखवाना में सैन्य सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार कर दिया गया। सुबह शहीद मंजीत सिंह की तिरंगे में लिपटी हुई पार्थिव देह जब गांव अखवाना में पहुंची तो माहौल गमगीन हो उठा।
शहीद की माता तृप्ता देवी व पत्नी काजल गुलेरिया की चीत्कारों से लोगों की आंखों में आंसू आ गए। सेना की 16 डोगरा यूनिट के जवानों ने शस्त्र उलटे कर, बैंड की मातमी धुन के साथ हवा में गोलियां दागकर इस वीर सपूत को श्रद्धांजलि अर्पित की। शहीद मंजीत के छोटे भाई फौजी संदीप सिंह बड़े भाई की चिता को अग्नि दिखाई तो शमशान घाट में मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। लोग भारत मां के इस लाल को श्रद्धांजलि अर्पित करने को व्याकुल हो उठे। वहां पसरे गहरे सन्नाटे को शहीद मंजीत सिंह अमर रहे के नारे भेद रहे थे।
सेना की ओर से 29 इंफैंटरी डिब के मेजर जनरल दिवेश अग्निहोत्री, 21 सब एरिया कमांडर बिग्रेडियर संजीव लंगेइ, 51 ब्रिगेड के कमांडर ब्रिगेडियर जेएस यादव, कर्नल रघु पठानिया, कर्नल जेएस सरां, मेजर गौरव शर्मा, मेजर गुरप्रीत सिंह, शहीद की युनिट 6 डोगरा के सूबेदार पामिल कुमार मौजूद रहे।
इसके अलावा डिप्टी स्पीकर ठाकुर दिनेश सिंह बब्बू, शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविन्द्र सिंह विक्की, शहीद के पिता ठाकुर शाम सिंह, पूर्व मंत्री मास्टर मोहन लाल, राजपूत महासभा पंजाब के प्रधान ठाकुर दविंद्र सिंह दर्र्शी, तहसीलदार यशपाल शर्मा, राजपूत महासभा पठानकोट के प्रधान ठाकुर साहब सिंह, सांबा परिषद के प्रेस सचिव बिट्टा काटल, जिला एनआरआई सभा के प्रधान एनपी सिंह, हल्का इंचार्ज विनय महाजन, डीएसपी जगजीत सिंह, सूबेदार मेजर शाम सिंह, ठाकुर जीवन सिंह चिब, अर्जुन सिंह , कुलदीप सिंह, सरपंच दविन्द्र नीटू, मोहिन्द्र सिंह सैनी, ठाकुर विक्रम सिंह विक्कू, कुंवर शमशेर सिंह बिट्टू, रोहित स्याल आदि उपस्थित थे।
मां से किया था आज के दिन छुट्टी पर आने का वादा
शहीद मंजीत सिंह आज के दिन घर छुट्टी आने वाला था, मगर उसकी जगह घर पहुंची तिरंगे में लिपटी उसकी पार्थिव देह। मानों वह अपनी मां तृप्ता देवी कोयह संदेश दे रहा था कि देख मां मैने घर आने का अपना वादा निभा दिया है। मंजीत सिंह अक्सर अपनी मां से कहा करता था कि मां देखना तेरा लाल एक दिन ऐसा काम कर जाएगा कि सारा देश उस पर गर्व करेगा।
मां तृप्ता देवी को तो यह भी विश्वास नहीं हो रहा था कि उसकी आंखों का तारा उससे अंतिम विदाई ले रहा है। शहीद की पत्नी काजल गुलेरिया, जिसने शादी के डेढ़ साल में कुछ महीने पति के साथ गुजारे थे, उसकी सुनसान निगाहें भीड़ में पति को ढूंढ रही थी। शहीद मंजीत सिंह की इकलौती बहन शिवानी, जिसकी शादी का सपना संजोये वह घर आ रहा था, वह भी बेसुध हो गई थी।
शहीद को नमन करने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। पैतृक गांव अखवाना में सैन्य सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार कर दिया गया। सुबह शहीद मंजीत सिंह की तिरंगे में लिपटी हुई पार्थिव देह जब गांव अखवाना में पहुंची तो माहौल गमगीन हो उठा।
शहीद की माता तृप्ता देवी व पत्नी काजल गुलेरिया की चीत्कारों से लोगों की आंखों में आंसू आ गए। सेना की 16 डोगरा यूनिट के जवानों ने शस्त्र उलटे कर, बैंड की मातमी धुन के साथ हवा में गोलियां दागकर इस वीर सपूत को श्रद्धांजलि अर्पित की। शहीद मंजीत के छोटे भाई फौजी संदीप सिंह बड़े भाई की चिता को अग्नि दिखाई तो शमशान घाट में मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। लोग भारत मां के इस लाल को श्रद्धांजलि अर्पित करने को व्याकुल हो उठे। वहां पसरे गहरे सन्नाटे को शहीद मंजीत सिंह अमर रहे के नारे भेद रहे थे।
सेना की ओर से 29 इंफैंटरी डिब के मेजर जनरल दिवेश अग्निहोत्री, 21 सब एरिया कमांडर बिग्रेडियर संजीव लंगेइ, 51 ब्रिगेड के कमांडर ब्रिगेडियर जेएस यादव, कर्नल रघु पठानिया, कर्नल जेएस सरां, मेजर गौरव शर्मा, मेजर गुरप्रीत सिंह, शहीद की युनिट 6 डोगरा के सूबेदार पामिल कुमार मौजूद रहे।
इसके अलावा डिप्टी स्पीकर ठाकुर दिनेश सिंह बब्बू, शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविन्द्र सिंह विक्की, शहीद के पिता ठाकुर शाम सिंह, पूर्व मंत्री मास्टर मोहन लाल, राजपूत महासभा पंजाब के प्रधान ठाकुर दविंद्र सिंह दर्र्शी, तहसीलदार यशपाल शर्मा, राजपूत महासभा पठानकोट के प्रधान ठाकुर साहब सिंह, सांबा परिषद के प्रेस सचिव बिट्टा काटल, जिला एनआरआई सभा के प्रधान एनपी सिंह, हल्का इंचार्ज विनय महाजन, डीएसपी जगजीत सिंह, सूबेदार मेजर शाम सिंह, ठाकुर जीवन सिंह चिब, अर्जुन सिंह , कुलदीप सिंह, सरपंच दविन्द्र नीटू, मोहिन्द्र सिंह सैनी, ठाकुर विक्रम सिंह विक्कू, कुंवर शमशेर सिंह बिट्टू, रोहित स्याल आदि उपस्थित थे।
मां से किया था आज के दिन छुट्टी पर आने का वादा
शहीद मंजीत सिंह आज के दिन घर छुट्टी आने वाला था, मगर उसकी जगह घर पहुंची तिरंगे में लिपटी उसकी पार्थिव देह। मानों वह अपनी मां तृप्ता देवी कोयह संदेश दे रहा था कि देख मां मैने घर आने का अपना वादा निभा दिया है। मंजीत सिंह अक्सर अपनी मां से कहा करता था कि मां देखना तेरा लाल एक दिन ऐसा काम कर जाएगा कि सारा देश उस पर गर्व करेगा।
मां तृप्ता देवी को तो यह भी विश्वास नहीं हो रहा था कि उसकी आंखों का तारा उससे अंतिम विदाई ले रहा है। शहीद की पत्नी काजल गुलेरिया, जिसने शादी के डेढ़ साल में कुछ महीने पति के साथ गुजारे थे, उसकी सुनसान निगाहें भीड़ में पति को ढूंढ रही थी। शहीद मंजीत सिंह की इकलौती बहन शिवानी, जिसकी शादी का सपना संजोये वह घर आ रहा था, वह भी बेसुध हो गई थी।