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सिखों के इतिहास को भ्रमित कर रही केंद्र सरकार: धामी 

Sun, 25 Dec 2022 08:53 PM IST
Punjab Bureau पंजाब ब्‍यूरो
Updated Sun, 25 Dec 2022 08:53 PM IST
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Central government confusing the history of Sikhs: Dhami
अमृतसर। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने केंद्र सरकार द्वारा साहिबजादे शहादत दिवस की जगह वीर बाल दिवस समारोह मनाने के निर्णय पर विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार सिखों के इतिहास को भ्रमित करने के रास्ते पर है और यह खेद का विषय है कि दिल्ली कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका इसमें सहयोग कर रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि सिख समुदाय की परंपराओं के खिलाफ जाकर केंद्र सरकार द्वारा साहिबजादा के शहादत दिवस को वीर बाल दिवस के रूप में मनाना दुनिया के धार्मिक इतिहास की सबसे बड़ी शहादत और बहुमूल्य विरासत को छोटा करके दिखाने की कोशिश है। धामी ने कहा कि अगर सरकार सच में साहिबजादे को श्रद्धांजलि और सम्मान देना चाहती है तो इस दिन को साहिबजादे शहीदी दिवस के रूप में मनाने में क्या दिक्कतहै?
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उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि मुगलों को इस क्षेत्र से खदेड़ने में साहिबजादों की शहादत महत्वपूर्ण थी। लेकिन जिस तरह से सरकार साहिबजादों के शहादत दिवस को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने पर जोर दे रही है, उससे साफ है कि यह खेल सरकार पंथ विरोधी ताकतों के इशारे पर खेल रही है। धामी के अध्यक्ष दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जब वीर बाल दिवस का नाम पंथ को स्वीकार नहीं है तो वह केंद्र सरकार का सूत्रधार बनकर वीर बाल दिवस आयोजन का हिस्सा क्यों बन रहे हैं।
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उन्होंने कालका से पूछा कि क्या उनकी यह हरकत श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश को मानने से इनकार नहीं है? धामी ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश पर सिख विद्वानों की कमेटी ने वीर बाल दिवस की जगह साहिबजादे शहादत दिवस नाम सुझाया है और इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संस्कृति मंत्रालय को शिरोमणि कमेटी द्वारा पत्र भेज कर अवगत करा दिया गया है। लेकिन फिर भी सरकार ने नाम नहीं बदला। उन्होंने कहा कि हरमीत सिंह कालका को अपनी मंशा स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने दिल्ली कमेटी के अन्य पदाधिकारियों और सदस्यों से अपील की कि वे सिख विचारधारा को प्रभावित न होने दें।
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