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Amritsar News: मालवा के गांव-गांव में कमल की दस्तक

Mon, 08 Dec 2025 09:06 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 08 Dec 2025 09:06 PM IST
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BJP will measure its support base through rural elections, and will decide its upcoming assembly strategy.
-ग्रामीण चुनावों से भाजपा मापेगी अपना जनाधार, आगामी विधानसभा रणनीति तय होगी
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सुशील कुमार
सुनाम ऊधम सिंह वाला। पंजाब के किसान बाहुल्य और राजनीतिक रूप से संवेदनशील मालवा क्षेत्र में भाजपा ने एक बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। सूबे की ग्रामीण सियासत में पहली बार भाजपा ने ब्लॉक समिति और जिला परिषद चुनावों के माध्यम से अपने चुनाव चिह्न कमल के साथ गांव-गांव दस्तक दी। यह रणनीति आगामी विधानसभा चुनावों की दिशा तय करने के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है। गांवों में भाजपा के पोस्टर और प्रत्याशी प्रचार कर रहे हैं, और स्थानीय मतदाताओं तक पार्टी की पहुंच बन रही है। चुनाव प्रक्रिया के दौरान नामांकन और प्रचार में कोई विरोध देखने को नहीं मिला। पार्टी इसे सकारात्मक संकेत मान रही है।

हाईकमान चाहता है जनाधार का ऑनग्राउंड आकलन
भाजपा ने मालवा के ज़िलों में अपने सभी प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी के लिए यह चुनाव केवल जीत-हार तक सीमित नहीं है। भाजपा हाईकमान इस अवसर से ग्रामीण पंजाब में अपने वास्तविक और ऑनग्राउंड जनाधार का आकलन करना चाहता है। इसी आधार पर आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति तय होगी-क्या पार्टी अकेले चुनाव लड़े या गठबंधन की ओर रुख करे। संगरूर जिले में पार्टी ने अपने कद्दावर नेताओं को मैदान में उतारा है। जिला परिषद चुनाव में पूर्व सरपंच परमजीत सिंह पम्मा और दर्शन नमोल मैदान में हैं। खेड़ी जोन से जगसीर सिंह मामूली अंतर से हार गए। भाजपा ज़िलाध्यक्ष दामन बाजवा ने बताया कि 11 ज़िप जोनों में से 10 में उम्मीदवार उतारे गए हैं, एक का नामांकन रद्द हो गया।
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भाजपा की चुनौती और संभावनाएं
किसान आंदोलन के बाद ग्रामीण पंजाब में पार्टी के लिए हालात चुनौतीपूर्ण रहे। विरोध और अविश्वास दिखा लेकिन केंद्रीय योजनाओं का असर भी दिखाई दे रहा है। प्रदेश उपाध्यक्ष और पूर्व विधायक अरविंद खन्ना ने दावा किया कि विरोध धीरे-धीरे शांत हो रहा है और लोग बड़ी संख्या में भाजपा से जुड़ रहे हैं। ग्रामीण चुनाव भाजपा के लिए केवल सत्ता का साधन नहीं बल्कि मालवा में अपनी राजनीतिक ताकत और भविष्य की दिशा को मापने का सीधा प्रयोग हैं। आगामी चुनावी नतीजे पार्टी की भावी रणनीति को निर्णायक रूप से प्रभावित करेंगे।
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