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देश के बहादुर ‘लाल’ थे शास्त्री जी - डॉ. राजकुमार
Updated Thu, 11 Jan 2018 10:45 PM IST
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देश के बहादुर ‘लाल’ थे शास्त्री : डॉ. राजकुमार
11 जनवरी को आखिरी सांस ली थी शास्त्री ने
अमर उजाला ब्यूरो
अमृतसर।
भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 52वीं पुण्यतिथि पर पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक डॉ. राजकुमार वेरका ने श्रद्धांजलि अर्पित की। डॉ. वेरका ने बताया कि प्रसिद्ध नारा जय जवान, जय किसान शास्त्री जी ने ही दिया था।
भारत को आत्मनिर्भर बनाने में शास्त्री जी का बहुत बड़ा योगदान है। डॉ. वेरका ने कहा कद में भले ही लाल बहादुर शास्त्री छोटे थे, मगर हौसले और इरादे बहुत बुलंद थे। तभी तो ताशकंद समझौते के वक्त लाल बहादुर शास्त्री ने पाकिस्तान के घमंडी जनरल अयूब खान की अकड़ भुला दी थी। लाल बहादुर के साथ शास्त्री जुड़ने की कहानी भी काफी दिलचस्प है। काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय, जिसे आज बीएचयू कहा जाता है। उसने 1926 में लाल बहादुर को शास्त्री की उपाधि दी थी। वह भी पढ़ाई में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए। लाल बहादुर शास्त्री ने 11 जनवरी 1966 को ताशकंद में आखिरी सांस ली। वह पहले व्यक्ति थे, जिन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से नवाजा गया था। इस मौके पर रोहित पुरी, दीपक कुमार, अजय कुमार तथा मीडिया एडवाइजर विकास दत्त ने भी शास्त्री जी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
सलमान खान को जानते हैं लाल बहादुर शास्त्री भूले
एमबीए की पढ़ाई कर रहे जतिन नहीं जानते कि लाल बहादुर शास्त्री कौन थे। सिविल अस्पताल की एक महिला डॉक्टर भी शास्त्री कब प्रधानमंत्री बने नहीं पता। बारहवीं में पढ़ रही लड़की कहती है कि सलमान खान के बारे में पूछना है तो पूछो राजनीति व इतिहास हम नहीं जानते। लाल बहादुर शास्त्री को प्रसाशन ने भी भुला दिया। जिले में डॉक्टर राजकुमार के सिवा बाकी सियासत भी पुण्यातिथि पर अंजान रही।
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11 जनवरी को आखिरी सांस ली थी शास्त्री ने
अमर उजाला ब्यूरो
अमृतसर।
भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 52वीं पुण्यतिथि पर पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक डॉ. राजकुमार वेरका ने श्रद्धांजलि अर्पित की। डॉ. वेरका ने बताया कि प्रसिद्ध नारा जय जवान, जय किसान शास्त्री जी ने ही दिया था।
भारत को आत्मनिर्भर बनाने में शास्त्री जी का बहुत बड़ा योगदान है। डॉ. वेरका ने कहा कद में भले ही लाल बहादुर शास्त्री छोटे थे, मगर हौसले और इरादे बहुत बुलंद थे। तभी तो ताशकंद समझौते के वक्त लाल बहादुर शास्त्री ने पाकिस्तान के घमंडी जनरल अयूब खान की अकड़ भुला दी थी। लाल बहादुर के साथ शास्त्री जुड़ने की कहानी भी काफी दिलचस्प है। काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय, जिसे आज बीएचयू कहा जाता है। उसने 1926 में लाल बहादुर को शास्त्री की उपाधि दी थी। वह भी पढ़ाई में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए। लाल बहादुर शास्त्री ने 11 जनवरी 1966 को ताशकंद में आखिरी सांस ली। वह पहले व्यक्ति थे, जिन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से नवाजा गया था। इस मौके पर रोहित पुरी, दीपक कुमार, अजय कुमार तथा मीडिया एडवाइजर विकास दत्त ने भी शास्त्री जी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
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सलमान खान को जानते हैं लाल बहादुर शास्त्री भूले
एमबीए की पढ़ाई कर रहे जतिन नहीं जानते कि लाल बहादुर शास्त्री कौन थे। सिविल अस्पताल की एक महिला डॉक्टर भी शास्त्री कब प्रधानमंत्री बने नहीं पता। बारहवीं में पढ़ रही लड़की कहती है कि सलमान खान के बारे में पूछना है तो पूछो राजनीति व इतिहास हम नहीं जानते। लाल बहादुर शास्त्री को प्रसाशन ने भी भुला दिया। जिले में डॉक्टर राजकुमार के सिवा बाकी सियासत भी पुण्यातिथि पर अंजान रही।
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