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‘मां संजो रही थी शादी के सपने, बेटा तिरंगे में लिपटा आया घर’
Updated Sat, 13 Jan 2018 10:25 PM IST
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‘मां संजो रही थी शादी के सपने, बेटा तिरंगे में लिपट आया घर’
शहीद सिपाही मक्खन सिंह की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि समारोह आज
अमर उजाला ब्यूरो
पठानकोट।
भारत-माता की अस्मिता एवं गौरव की रक्षा करते हुए राष्ट्र की बलिवेदी पर देश के अनेकों रणबांकुरों ने अपने प्राण न्योछावर कर शहादत के जाम पिए हैं। जिला पठानकोट व गुरदासपुर की धरती को तो वैसे भी शहीदों की भूमि होने का गौरव प्राप्त है। इसी महान धरती की बलिदानी मिट्टी में रचा पला बांका जवान सिपाही मक्खन सिंह जो 16 वर्ष पहले जम्मू-कश्मीर की वादियों में अपनी कर्तव्य परायणता का परिचय देते हुए शहादत का जाम पी गया।
इस वीर योद्धा के जीवन संबंधी जानकारी देते हुए शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंदर सिंह विक्की ने कहा कि सिपाही मक्खन सिंह का जन्म 15 नवंबर 1979 पिता हंस राज व माता लाज कौर के घर हुआ। इन्होंने अपनी 12वीं तक की शिक्षा सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल पठानकोट से प्राप्त की। बचपन में ही यह देशभक्ति की बातें किया करते थे और स्कूल के कार्यक्रमों में यह हमेशा सैनिक की भूमिका निभाया करते थे। दिल में देशभक्ति का यही जज्बा लिए वह 3 जुलाई 1999 को भारतीय सेना की 4 सिख रेजीमेंट में भर्ती होकर देश सेवा में जुट गए। तीन साल के सेवाकाल के दौरान यह ज्यादातर आतंकवाद से प्रभावित क्षेत्रों में तैनात रहे। 14 जनवरी 2002 को जब इनकी यूनिट श्रीनगर के नौगांव क्षेत्र की राधा पोस्ट पर तैनात थी तो इन्हें इस स्थान पर आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली तो यह अपने साथियों सहित तलाशी अभियान पर निकल पड़े, तभी आतंकियों की नजर इनकी सैन्य टुकड़ी पर पड़ी तो उन्होंने गोलाबारी शुरू कर दी। सिपाही मक्खन सिंह ने भी अपने साथियों सहित उनके इस हमले का मुंह तोड़ जवाब दिया। इसी बीच एक गोली इनके सीने को भेदते हुए निकल गई। जिससे इस जांबाज सैनिक ने अपने साथी सैनिकों को बचाते हुए शहादत का जाम पी लिया।
शहीद होने के एक महीना पहले जब यह घर आये तो मां ने कहा था कि बेटे कश्मीर में खतरा है और अपना ध्यान रखना तो मक्खन सिंह ने कहा कि मां जिस दिन से यह वर्दी पहनी है, यह जिंदगी देश की अमानत है, पर मुझे गर्व होगा कि मेरा जीवन देश के काम आ सकें। आखिर में इनके द्वारा कहीं हुई बातें सच्च हुई। घर पर मां बेटे की शादी के सपने संजो रही थी, मगर बेटा तिरंगे में लिपटा हुआ घर पहुंचा।
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कुंवर विक्की ने बताया कि इस रणबांकुरे की शहादत को नमन करने के लिए 14 जनवरी को इनके नाम पर बने सरकारी गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल पठानकोट में एक श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इसमें कई गणमान्य लोग व सैन्य अधिकारी शामिल होकर इस शूरवीर को अपने श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे।
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शहीद सिपाही मक्खन सिंह की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि समारोह आज
अमर उजाला ब्यूरो
पठानकोट।
भारत-माता की अस्मिता एवं गौरव की रक्षा करते हुए राष्ट्र की बलिवेदी पर देश के अनेकों रणबांकुरों ने अपने प्राण न्योछावर कर शहादत के जाम पिए हैं। जिला पठानकोट व गुरदासपुर की धरती को तो वैसे भी शहीदों की भूमि होने का गौरव प्राप्त है। इसी महान धरती की बलिदानी मिट्टी में रचा पला बांका जवान सिपाही मक्खन सिंह जो 16 वर्ष पहले जम्मू-कश्मीर की वादियों में अपनी कर्तव्य परायणता का परिचय देते हुए शहादत का जाम पी गया।
इस वीर योद्धा के जीवन संबंधी जानकारी देते हुए शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंदर सिंह विक्की ने कहा कि सिपाही मक्खन सिंह का जन्म 15 नवंबर 1979 पिता हंस राज व माता लाज कौर के घर हुआ। इन्होंने अपनी 12वीं तक की शिक्षा सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल पठानकोट से प्राप्त की। बचपन में ही यह देशभक्ति की बातें किया करते थे और स्कूल के कार्यक्रमों में यह हमेशा सैनिक की भूमिका निभाया करते थे। दिल में देशभक्ति का यही जज्बा लिए वह 3 जुलाई 1999 को भारतीय सेना की 4 सिख रेजीमेंट में भर्ती होकर देश सेवा में जुट गए। तीन साल के सेवाकाल के दौरान यह ज्यादातर आतंकवाद से प्रभावित क्षेत्रों में तैनात रहे। 14 जनवरी 2002 को जब इनकी यूनिट श्रीनगर के नौगांव क्षेत्र की राधा पोस्ट पर तैनात थी तो इन्हें इस स्थान पर आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली तो यह अपने साथियों सहित तलाशी अभियान पर निकल पड़े, तभी आतंकियों की नजर इनकी सैन्य टुकड़ी पर पड़ी तो उन्होंने गोलाबारी शुरू कर दी। सिपाही मक्खन सिंह ने भी अपने साथियों सहित उनके इस हमले का मुंह तोड़ जवाब दिया। इसी बीच एक गोली इनके सीने को भेदते हुए निकल गई। जिससे इस जांबाज सैनिक ने अपने साथी सैनिकों को बचाते हुए शहादत का जाम पी लिया।
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शहीद होने के एक महीना पहले जब यह घर आये तो मां ने कहा था कि बेटे कश्मीर में खतरा है और अपना ध्यान रखना तो मक्खन सिंह ने कहा कि मां जिस दिन से यह वर्दी पहनी है, यह जिंदगी देश की अमानत है, पर मुझे गर्व होगा कि मेरा जीवन देश के काम आ सकें। आखिर में इनके द्वारा कहीं हुई बातें सच्च हुई। घर पर मां बेटे की शादी के सपने संजो रही थी, मगर बेटा तिरंगे में लिपटा हुआ घर पहुंचा।
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कुंवर विक्की ने बताया कि इस रणबांकुरे की शहादत को नमन करने के लिए 14 जनवरी को इनके नाम पर बने सरकारी गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल पठानकोट में एक श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इसमें कई गणमान्य लोग व सैन्य अधिकारी शामिल होकर इस शूरवीर को अपने श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे।