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शहरवासियों को खेती सिखाने लिए शहरों में हो रही है कॉमर्शियल फार्मिंग
Tue, 12 Feb 2019 02:07 PM IST
अमर शर्मा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: अमर शर्मा
Updated Tue, 12 Feb 2019 02:07 PM IST
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खेती ने नए तरीके
- फोटो : Agritecture
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कृषि प्रधान समाज होना एक बात है और इसके बारे में जानना दूसरी बात। गांवों से शहरों की ओर लगातर हुए पलायन और शहरीकरण की वजह से लोग कृषि से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे में लंदन में खेतों को शहरों में लोगों के करीब लाकर इनके बारे में बताने की पहल की गई है। इससे प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी। इस तरह की जाने वाली खेती को माइक्रो-फार्मिंग नाम दिया गया है। वर्टिकल फार्मिंग का चलन करीब 10 साल पुराना है। लेकिन अब उसे भी नियंत्रित वातावरण में किया जा रहा है।
खेती ने नए तरीके
- फोटो : Agritecture
अंडरग्राउंड खेती की भी जानकारी
यहां शहर के भीतर अंडरग्राउंड खेती की भी जानकारी दी गई है। ग्रोइंग अंडरग्राउंड नाम की कंपनी लंदन में 33 मीटर नीचे सलाद के पौधों की खेती कर रही है। दूसरे विश्व युद्ध के समय बम के हमले से बचने के लिए यह जगह बनाई गई थी।यहां खेती के कई फायदे हैं। अंडरग्राउंड होने के कारण यहां तापमान कभी 15 डिग्री से नीचे नहीं जाता है। एक हफ्ते से भी कम समय में पौधे तैयार हो जाते हैं। पारंपरिक फार्म में साल में 7 फसलें तैयार हो पाती हैं, यहां साल में 60 फसलें लेते हैं।
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- फोटो : Agritecture
फ्लोटिंग फार्म में दूध की प्रोसेसिंग भी की जाएगी
यह फ्लोटिंग फार्म नीदरलैंड के रॉटरडम में है। फार्म में गायें भी हैं। यहीं पर दूध की प्रोसेसिंग भी की जाएगी। इसका मकसद आम लोगों और छात्रों को डेयरी प्रोडक्शन के बारे में बताना है।
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घरों के ऊपर पारदर्शी सोलर मॉड्यूल
नीदरलैंड्स के अल्मेरे में री-जेन (रीजेनरेटिव) विलेज का मॉडल बनाया गया है। यह पूरी तरह आत्मनिर्भर है। यहां पारदर्शी सोलर मॉड्यूल लगाए गए हैं। इनसे बिजली तो बनती ही है, पौधों को सूरज की रौशनी भी मिलती है। यह ऑफ-ग्रिड है यानी यहां बाहर से बिजली सप्लाई नहीं होती है।
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