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बहादुर महिला, आग की चपेट में आए 12 बच्चों को दिया जीवनदान
Wed, 27 Apr 2016 09:44 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, किशनपुर (कोटद्वार)
ब्यूरो / अमर उजाला, किशनपुर (कोटद्वार)
Updated Wed, 27 Apr 2016 09:44 AM IST
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जैतुन
- फोटो : amar ujala
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उत्तराखंड में कोटद्वार स्थित भाबर क्षेत्र के खड्डापानी में गुर्जरों के डेरे के आग की चपेट में आने पर गुर्जर महिला जैतुन ने बहादुरी दिखाई। जैतुन ने अपनी जान की परवाह न करते हुए डेरे में रह रहे बारह बच्चों और एक बुजुर्ग महिला को सुरक्षित बाहर निकालकर उनकी जान बचाई।
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अाग
मंगलवार सुबह करीब ग्यारह बजे का वाकया है। जैतुन डेरे में स्थित झोपड़ी में अपने एक वर्षीय बेटे रिफाकत के साथ थीं, तभी कुछ आवाज आने पर उसने झोपड़ी की छत पर नजर दौड़ाई तो आग की लपटें देखकर उनके होश उड़ गए।
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आग
हिम्मत का परिचय देते हुए वह अपने बेटे को दुपट्टे से पीठ पर बांधकर शोर मचाते हुए बाहर की ओर भागीं। बाहर निकलकर उन्होंने अपनी देवरानी नूरबेबी को आवाज लगाई और डेरे में रह रहे बारह बच्चों को इकट्ठा कर डेरे से बाहर ले जाने लगी।
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आग
तेजी से फैलती आग ने तब तक पूरे डेरे को अपनी आगोश में ले लिया था। इसी दौरान उन्हें डेरे में रह रही 101 वर्षीय वृद्धा नूरा की याद आई और वह फिर डेरे में उन्हें बचाने चली गई। बड़ी मशक्कत कर उन्होंने सहारा देकर किसी तरह बुजुर्ग महिला को भी डेरे से बाहर निकाल लिया। उसके बाद उन्होंने डेरे में बंधी भैंसों की रस्सियां काटकर उन्हें जंगल की ओर दौड़ा दिया।
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आग
अग्निकांड में अपना घर और डेरे को राख में तब्दील देख रोती बिलखती जैतुन ने कहा कि आग इतनी तेजी से फैली कि वे अपने घर का कोई भी सामान नहीं बचा पाईं। अगर वह थोड़ी सी भी देर या लापरवाही करतीं तो बच्चों की जान को नुकसान हो सकता था। अग्निकांड के बाद उनके पास शरीर पर पहने कपड़ों के अलावा कुछ नहीं बचा है।
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