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आदमखोर के खात्मे के 90 साल बाद लंदन से उत्तराखंड पहुंची जिम कॉर्बेट की राइफल
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लगभग 90 साल बाद दुनिया के मशहूर शिकारी की रायफल जब उसी जगह पहुंची जहां उन्होंने आदमखोर को ढेर किया था तो उसे देखने को खूब भीड़ उमड़ी। 2 मई 1925 को इसी रायफल से जिम कार्बेट ने गुलाबराय में आदमखोर गुलदार को ढेर किया था।
आदमखोर के खात्मे के 90 साल बाद उसी जगह पहुंची कॉर्बेट की राइफल
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जिम कॉर्बेट की राइफल
- फोटो : AmarUjala
वर्ष 1905 में लंदन में .275 बोर की इस राइफल को जॉन रिगवे एंड संस कंपनी ने बनाया था। उस समय शिकार करने के लिए यह सबसे बेहतरीन राइफलों में से एक थी। पूर्वाह्न 11 बजे गुलाबराय (भाणाधार) में स्थित जिम कार्बेट पार्क में इंग्लैंड निवासी व लंदन में कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर न्यूटन राइफल के साथ यहां पहुंचे। इस मौके पर जनसमुदाय ने उनका जोरदार स्वागत किया।
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जिम कॉर्बेट की राइफल
- फोटो : AmarUjala
रुद्रप्रयाग वन प्रभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में न्यूटन ने अपनी टीम के साथ पार्क में जिम कार्बेट की मूर्ति पर पुष्पगुच्छ चढ़ाया और कैंडल जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। न्यूटन ने कहा कि जब वह 13 वर्ष के थे, तबसे उन्होंने जिम कार्बेट के बारे में पढ़ा और सुना। उन्होंने वह पुस्तक पढ़ी, जिसमें रुद्रप्रयाग के गुलाबराय में आदमखोर को मारने का जिक्र किया है। ऐसे में इस स्थान को देखने की बहुत इच्छा थी, जो आज पूरी हो गई।
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इसी पेड़ पर मचान लगाकर कॉर्बेट ने किया आदमखोर का अंत।
- फोटो : AmarUjala
समारोह में मुख्य अतिथि जिला जज आशीष नैथानी ने कहा कि राजमार्ग पर स्थित आम के पेड़ पर मचान बनाकर कार्बेट ने गुलदार को ढेर किया था। उस पेड़ को धरोहर के रूप में संरक्षित करने के लिए प्रयास करने होंगे। डीएफओ राजीव धीमान ने जिम कार्बेट के बारे में बताने के साथ ही वन व वन्य जीवों के संरक्षण पर भी जोर दिया।
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90 साल बाद उसी जगह पहुंची कॉर्बेट की राइफल
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जिम कॉर्बेट की राइफल
- फोटो : AmarUjala
1918 से 1925 तक रुद्रप्रयाग व पूरे क्षेत्र में दशहत के पर्याय रहे आदमखोर गुलदार के बारे में वयोवृद्ध काशीराम देवली ने अपने अनुभव साझा किए। बताया कि उनके दादा स्व. ईश्वरी प्रसाद देवली पर गुलदार ने सबसे पहले हमला किया था, तब वह बच गए थे।
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