नैनीताल में दुष्कर्म के आरोपी मो. उस्मान के भवन समेत फेयरलाइन ग्लैन की कई संपत्तियां लंबे समय से विवादों में हैं। उक्त परिक्षेत्र में कई भवन निर्माण हुए हैं, लेकिन बैनामा अधिकतर के पास नहीं है। आरोपी उस्मान के भवन की पड़ताल में भी चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। प्राधिकरण और पालिका की टीमें यहां जांच कर रही हैं।
वर्तमान रुकुट कंपाउंड और उससे लगे बड़े भू भाग को फेयरलाइन ग्लैन के नाम से जाना जाता है। जो लंदन निवासी थॉमस विलफ्रेड रैल्ली के नाम दर्ज है। 1867 में इसका क्षेत्रफल 10 एकड़ था। बाद में तीन एकड़ का एक हिस्सा नैनीताल क्लब के लिए चला गया।
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आरोपी मो. उस्मान के घर के बाहर मौजूद पुलिस बल
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1894 में फेयरलाइन ग्लैन ए और बी दो भागों में विभाजित हो गए। ए भाग में वर्तमान में ऋतुराज होटल, आउट हाउस आदि हैं जबकि बी भाग के वन क्षेत्र होने से यहां निर्माण नहीं हुए। 1910 में रैल्ली ने चार एकड़ के ए भाग को ललिता प्रसाद को बेचा जो अब लाला चंद्र लाल साह के पास है।
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आरोपी के गैराज की फोरेंसिक जांच करती टीम
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इसके बाद रैल्ली की मृत्यु हो गई और तीन एकड़ के बी भाग की बिक्री नहीं हुई। ऐसे में बीते दशकों में कुछ रसूखदारों ने यहां भवन बना लिए। इसके अलावा कई लोगों को भी बसा दिया।
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आरोपी उस्मान
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नोटिस देने के बाद चर्चा में आया ये क्षेत्र
दुष्कर्म के आरोपी मो. उस्मान का घर भी इसी क्षेत्र में है। पालिका की ओर से नोटिस देने के बाद यह क्षेत्र चर्चा में आ गया है। बीते दिनों नोटिस वापस लेने से लोगों को आंशिक राहत है, लेकिन विभागीय खोजबीन इस ओर इशारा है कि इस मामले में भी नियमों के तहत भविष्य में कुछ बड़ा होने वाला है।
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नैनीताल के मल्लीताल चीना बाबा चौराहे पर तैनात पुलिस कर्मी
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वहीं, क्षेत्रवासियों से नोटिस के बाबत की गई पड़ताल में यह बात भी सामने आई कि पूर्व में भी प्राधिकरण की ओर से क्षेत्र के कई लोगों को अवैध निर्माण के लिए नोटिस दिए गए, लेकिन आरोपी को नोटिस नहीं दिया गया।