Petrol Pump Fraud: वर्तमान में ज्यादातर लोग कार और बाइक इस्तेमाल करते हैं। वाहन में ईंधन भरवाने के लिए लोग पेट्रोल पंप पर आते जाते रहते हैं। हालांकि, आप गाड़ी में पेट्रोल या डीजल भरवाते समय सावधानी नहीं बरतते हैं, तो आपकी आंखों के सामने ही ठगी की जा सकती है। सिर्फ नजरों का खेल है, जिससे ठगी का शिकार होने से बच सकते हैं। जंप ट्रिक से लेकर डेंसिटी मीटर में छेड़छाड़ पेट्रोल पंप पर ठगी जाती है। आइए जानते हैं कि आखिर यह कैसे किया जाता है?
Petrol Pump Fraud: पेट्रोल पंप पर इस तरह किया जाता है फर्जीवाड़ा, आप भी जान लीजिए क्या हैं तरीके
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डेंसिटी मीटर पर जरूर रखें नजर
ग्राहकों के साथ पेट्रोल-डीजल में शुद्धता को लेकर ठगी का खेल जुड़ा है। इसमें हेर-फेर कर ग्राहकों को चुनाया लगाया जाता है। पेट्रोल पंप में लगी मशीनों में अलग-अलग सेक्शंस होते हैं, जिसमें आपको कितने रुपये का पेट्रोल और कितनी मात्रा में भरा गया है यह सभी डाटा नजर आता है। इसी मशीन की स्क्रीन पर आपको डेंसिटी दिखती है, जो सीधे तौर पर ईंधन की क्वालिटी यानी शुद्धता को दर्शाती है। इस पर नजर रखकर आप ठगी से बच सकते हैं।
पेट्रोल पंप पर डेंसिटी के लिए तय किए मानकों से छेड़छाड़ करके फ्रॉड किया जाता है। डेंसिटी का मतलब होता है, यह आपको घनत्व को दिखाता है। किसी पदार्थ के गाढ़ेपन को उसकी डेंसिटी कहा जा सकता है। जब निश्चित मात्रा में तत्वों को मिलाकर किसी प्रोडक्ट को तैयार किया है, तो उसके आधार पर उस वस्तु की क्वालिटी को सेट किया जाता है। अगर इसमें थोड़ा ऊपर-नीचे होता है, तो समझ सकते हैं कि इसमें मिलावट की गई है।
पेट्रोल की डेंसिटी 730 से 800 किलोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तय है, जबकि डीजल की डेंसिटी 830 से 900 किलोग्राम प्रति क्लूबिक मीटर निर्धारित है। आपको इससे कम या अधिक होने नजर रखें।
Bank Holidays: अब बैकों में पांच दिन होगा काम, शनिवार और रविवार को रहेंगे बंद? जानिए क्या है आगे का प्लान
ऐसे भी होता है खेल
पेट्रोल पंप पर कम तेल से संबंधित शिकायतें अक्सर सुनने को मिलती हैं। यहां पर होने वाली इस धोखाधड़ी पर किसी की नजर नहीं जाती है, जिससे सीधे तौर पर ग्राहकों की जेब काटी जाती है। ग्राहक जंप ट्रिक का शिकार भी हो सकता है। इसमें भी ग्राहकों को मीटर दिखाकर लूटा जाता है। जब आप मीटर देखते हैं, तो देखा होगा 0 से स्टार्ट मीटर तुरंत 5-6 रुपये पर पहुंच जाता है और बीच का 2-3-4 दिखाई नहीं देता है। यहीं पर ग्राहकों के साथ खेल होता है, क्योंकि मीटर जीरो से स्टार्ट होने के बाद चरणबद्ध तरीके से 1-2-3 रुपये के मुताबिक बढ़ना चाहिए।
New Year 2023: नए साल पर आईआरसीटीसी करा रहा खूबसूरत असम और मेघालय की सैर, जानिए कितना आएगा खर्च