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भारत का ये 'ताकतवर सेंटर' दुनिया के लिए चुनौती, यहां बनी मिसाइलें मिनटों में तबाह कर सकती हैं आधा पाकिस्तान

Thu, 29 May 2025 11:13 PM IST
शिखर बरनवाल यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Thu, 29 May 2025 11:13 PM IST
सार

DRDO का हमारे देश की रक्षा में अतुलनीय योगदान है। इसने कई ऐसी हथियारें बनाई हैं, जिन्हें देखकर दुश्मन के पसीने छूट जाते हैं। आइए इस लेख में DRDO के सात सबसे घातक हथियारों के बारे में जानते हैं।

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operation sindoor brahmos List of weapons manufactured by Drdo know in hindi
DRDO - फोटो : https://drdo.gov.in/

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) भारत की रक्षा प्रौद्योगिकी को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी स्थापना 1958 में हुई थी और तब से इसने देश की सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने के लिए अनगिनत प्रणालियों और प्रौद्योगिकियों का विकास किया है। DRDO का ध्येय वाक्य "बलस्य मूलं विज्ञानम्" (शक्ति का स्रोत विज्ञान है) इसके कार्य को दर्शाता है।



वैसे तो डीआरडीओ की स्थापना 1958 में हुई थी, लेकिन 1983 में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नेतृत्व में जब एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (आईजीएमडीपी) की शुरुआत हुई थी, उस समय रक्षा हथियार बनाने के क्षेत्र में बड़ी क्रांति आई थी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत को मिसाइल प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर बनाना था। इसके तहत 'पृथ्वी', 'अग्नि', 'आकाश', 'त्रिशूल' और 'नाग' जैसी मिसाइलें विकसित की गईं। आईजीएमडीपी के तहत विकसित मिसाइलों (जैसे पृथ्वी और आकाश) को भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल किया गया है और वे देश की रक्षा पंक्ति का हिस्सा हैं। इन्हें प्रतिरोधक क्षमता के रूप में तैनात किया गया है। खैर, आइए इस लेख में डीआरडीओ के 7 प्रमुख हथियारों के बारे में जानते हैं। बता दें कि इनमें से एक हथियार ऐसा भी है जिसका उपयोग ऑपरेशन सिंदूर में हुआ था।

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डीआरडीओ हथियार - फोटो : https://drdo.gov.in/

अग्नि मिसाइल सीरीज
अग्नि मिसाइलें मध्यम से अंतरमहाद्वीपीय दूरी तक मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों की एक सीरीज हैं। इसमें अग्नि-I से लेकर अग्नि-V (और अब अग्नि-P या अग्नि-प्राइम) जैसी मिसाइलें शामिल हैं, जिनकी मारक क्षमता कई हजार किलोमीटर तक है। अग्नि मिसाइलों का वास्तविक युद्ध में उपयोग किए जाने की कोई सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। इनका मुख्य उद्देश्य भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखना है।

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पृथ्वी मिसाइल - फोटो : https://www.drdo.gov.in

पृथ्वी मिसाइल सीरीज
पृथ्वी भारत की पहली स्वदेशी रूप से विकसित सतह से सतह पर मार करने वाली कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (एसआरबीएम) है। इसकी विभिन्न श्रेणियां हैं जैसे पृथ्वी-I (सेना के लिए), पृथ्वी-II (वायुसेना के लिए), और पृथ्वी-III (नौसेना के लिए)। बता दें कि पृथ्वी-I की कम रेंज होने की वजह से इसे सेवा से हटा दिया गया है। बाकी पृथ्वी-II और पृथ्वी -III को देखकर आज भी दुश्मन के पसीने छूट जाते हैं। बता दें कि पृथ्वी-II का रेंज लगभग 350 किलोमीटर है और पृथ्वी -III का रेंज लगभग 600 किलोमीटर है।

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डीआरडीओ हथियार - फोटो : https://drdo.gov.in/

तेजस (लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट - LCA)
तेजस भारत का स्वदेशी रूप से विकसित बहु-भूमिका वाला हल्का लड़ाकू विमान है। यह चौथी पीढ़ी का विमान है जिसे भारतीय वायुसेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है। तेजस विमानों को भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया है और वे विभिन्न अभ्यासों में हिस्सा लेते रहे हैं।

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डीआरडीओ हथियार - फोटो : https://drdo.gov.in/

आकाश मिसाइल प्रणाली
आकाश एक मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (SAM) प्रणाली है। यह विभिन्न हवाई लक्ष्यों जैसे विमानों, हेलीकाप्टरों और ड्रोन को भेदने में सक्षम है। आकाश मिसाइल प्रणाली ने भारतीय वायुसेना और सेना की वायु रक्षा क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाया है। यह दुश्मन के हवाई हमलों से महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और सैनिकों की रक्षा करने में सक्षम है, जिससे भारत की समग्र वायु रक्षा ग्रिड मजबूत हुई है।

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