Nasa Clipper Mission: मशहूर एस्ट्रोफिजिसिस्ट कार्ल सेगन ने अपनी पुस्तक कॉसमॉस 1980 में इस बारे में बताया था कि हमारा ब्रह्मांड इतना विशाल है कि यहां पर एलियन लाइफ का होना एक सामान्य बात हो सकती है। कार्ल सेगन के अलावा स्टीफन हॉकिन्स, एनरिको फर्मी, फ्रेंक ड्रेक, मिचिओ काकू, नील डिग्रेस टाइसन आदि कई वैज्ञानिकों का मानना है कि हमारे ब्रह्मांड में कई ग्रह ऐसे हैं, जहां पर जीवन फल फूल रहा होगा।
वर्तमान समय में कई वैज्ञानिकों का कहना है कि कहीं दूर नहीं बल्कि हमारे सौरमंडल में ही ऐसी कई जगह हैं, जहां पर माइक्रोबियल एलियन लाइफ के सबूत हम लोगों को मिल सकते हैं। इनमें बृहस्पति ग्रह के चांद यूरोपा और शनि का चांद टाइटन का नाम सबसे पहले आता है। नासा लंबे समय से इन दोनों चंद्रमाओं का अध्ययन कर रहा है। इसी कड़ी में उसने 14 अक्तूबर को यूरोपा का अध्ययन करने के लिए स्पेसएक्स फॉल्कन हैवी रॉकेट से क्लिपर मिशन को लॉन्च किया है।
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Nasa Clipper Mission
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बर्फीली सतह के नीचे महासागरों में हो सकता है जीवन
माना जाता है कि यूरोपा के बर्फीली सतह के नीचे विशाल महासागर है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यूरोपा के महासागर में जीवन की काफी ज्यादा संभावना है। इन महासागरों में जीवन के लिए अनुकूल तापमान और जरूरी पोषक तत्व मौजूद हो सकते हैं।
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क्या है क्लिपर मिशन का उद्देश्य?
नासा का क्लिपर मिशन यूरोपा की बर्फीली सतह, उसके भीतर के महासागर और पूरे चंद्रमा की जियोलॉजी का अध्ययन करेगा। इस दौरान क्लिपर स्पेसक्राफ्ट यूरोपा के दर्जनों फ्लाईबाई करके पूरे चंद्रमा को अच्छे से स्कैन करेगा। स्पेसक्राफ्ट में कैमरा और स्पैक्ट्रोमीटर लगा हुआ है, जो उसकी हाई रेजेल्यूशन तस्वीरें हम तक भेजेगा।
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इस स्पेसकाफ्ट में एक खास तरह का Ice-penetrating radar लगा है। यह यंत्र यूरोपा की बर्फीली सतह के नीचे छिपे पानी के बारे में पता लगाएगा। क्राफ्ट में थर्मल इंस्ट्रूमेंट भी इंस्टॉल किया गया है जो इस बारे में जानने की कोशिश करेगा कि यूरोपा की बर्फीली सतह पर गर्म जगह कहां पर है और वहां पर पानी का रिसाव हो रहा है या नहीं।
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स्पेसकाफ्ट इन यंत्रों की मदद से यूरोपा की बर्फीली सतह और उसके नीचे क्या हो रहा है? इस बारे में कई गहन जानकारियों के बारे में पता करेगा। इससे वैज्ञानिकों को यूरोपा पर जीवन है या नहीं? इस बारे में पता करने में मदद मिलेगी। क्लिपर स्पेसक्राप्ट में उत्तम तकनीक के सोलर एरेज और राडार एंटिना लगाए गए हैं। इस स्पेसक्राफ्ट की लंबाई 16 फीट है। यूरोपा की दूरी पृथ्वी से करीब 290 करोड़ किलोमीटर है। इस दूरी को तय करने में क्लिपर यान को करीब 6 साल का वक्त लगेगा।