घर का बजट बनाते समय ज्यादातर लोग किराया, बिजली का बिल, राशन और बच्चों की फीस जैसे बड़े खर्चों का हिसाब तो रखते हैं, लेकिन रोजाना होने वाले छोटे खर्चों पर ध्यान नहीं देते। 50-100 रुपये की चाय-कॉफी, दूध-सब्जी, ऑटो-कैब का किराया या ऑनलाइन खरीदी गई कोई छोटी चीज भले ही उस समय ज्यादा न लगे, लेकिन महीनेभर में ऐसी कई रकम मिलकर बड़ा खर्च बन सकती हैं।
काम की बात: 50-100 रुपये के ये खर्च कर रहे हैं जेब खाली, घर का बजट संभालने के लिए आज से करें ये काम
Track Small Daily Expenses: घर का बजट अक्सर बड़े खर्चों की वजह से नहीं, बल्कि रोज होने वाले छोटे-छोटे खर्चों से बिगड़ता है। दूध, सब्जी, चाय-कॉफी, ऑटो-कैब और छोटी ऑनलाइन खरीदारी जैसी रकम अगर रोजाना लिखी जाएं तो महीने के अंत में खर्च की पूरी तस्वीर आसानी से समझ आ सकती है।
हर खर्च तुरंत लिखें
सबसे पहले कोशिश करें कि पैसे खर्च करने के बाद उसे उसी समय नोट कर लें। इसके लिए मोबाइल के नोट्स में एक लिस्ट बना सकती हैं या एक्सेल शीट का इस्तेमाल कर सकती हैं। जैसे 60 रुपये दूध, 80 रुपये सब्जी, 120 रुपये ऑटो और 150 रुपये ऑनलाइन सामान पर खर्च हुए हैं तो इन्हें उसी दिन दर्ज कर लें। अगर हर बार लिखना मुश्किल लगता है तो रात में 5 से 10 मिनट निकालकर पूरे दिन के खर्च लिख सकती हैं।
खर्च की अलग-अलग कैटेगरी बनाएं
सिर्फ रकम लिखने से यह पता नहीं चलेगा कि पैसा कहां ज्यादा जा रहा है। इसलिए खर्च को अलग-अलग कैटेगरी में बांटें। जैसे घर का सामान, बच्चों का खर्च, यात्रा, बाहर का खाना और ऑनलाइन खरीदारी। महीने के अंत में जब पूरा हिसाब देखेंगी तो आसानी से पता चलेगा कि किस जगह जरूरत से ज्यादा पैसा जा रहा है।
आजकल छोटी से छोटी खरीदारी भी यूपीआई से हो जाती है। ऐसे में सिर्फ नकद खर्च लिखना काफी नहीं है। सप्ताह में एक बार बैंक खाते और यूपीआई की हिस्ट्री जरूर देखें। इससे छूटे हुए खर्च पकड़ में आ जाएंगे। नकद खर्च के लिए मोबाइल में अलग नोट या छोटी डायरी रख सकती हैं।
हर हफ्ते 10 मिनट करें समीक्षा
महीने के आखिर में हिसाब देखने के बजाय हर सप्ताह 10 मिनट निकालें। देखें कि इस हफ्ते किन चीजों पर जरूरत से ज्यादा खर्च हुआ। अगर ऑनलाइन खरीदारी, बाहर की चाय-कॉफी या ऑटो-कैब पर खर्च बढ़ रहा है तो अगले सप्ताह उसमें थोड़ी कटौती की जा सकती है।
छोटे खर्चों की भी तय करें सीमा
हर छोटी चीज पर पैसा खर्च करना बंद करने की जरूरत नहीं है। बेहतर तरीका यह है कि ऐसी खरीदारी के लिए महीने की एक सीमा तय कर लें। जैसे गैर-जरूरी ऑनलाइन सामान या बाहर खाने के लिए अलग रकम रखी जा सकती है। इससे मनमाना खर्च करने से बचने में मदद मिलेगी और महीने के अंत में बजट भी ज्यादा नहीं बिगड़ेगा।
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