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Donald Trump Greenland Controversy: क्या एक देश दूसरे देश को खरीद सकता है, जानिए क्या है अंतर्राष्ट्रीय कानून

Sun, 25 Jan 2026 04:34 PM IST
संकल्प सिंह यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संकल्प सिंह Updated Sun, 25 Jan 2026 04:34 PM IST
सार

Donald trump greenland news: आज के दौर में जब वैश्विक राजनीति में ताकत और संसाधनों की अहमियत बढ़ती जा रही है, तब यह सवाल अक्सर उठता है कि क्या एक देश दूसरे देश को खरीद सकता है। ट्रंप और ग्रीनलैंड से जुड़ा विवाद इसी बहस को फिर से चर्चा के केंद्र में ले आया है।

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Donald Trump Greenland Controversy: International Law Rules On Can One Country Buy Another Country
Donald Trump Greenland Controversy - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

Can a country buy another country: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड को खरीदना चाहते हैं। अपने इस विचार को उन्होंने सार्वजनिक रूप से रखा है। ग्रीनलैंड डेनमार्क के आधीन आता है। डेनमार्क ने इसे नॉट फॉर सेल कह दिया है और उसे बेचे जाने से साफ मना कर दिया है। हालांकि, इन सब के बीच दुनिया में एक सवाल यह उठ रहा है कि क्या वाकई एक देश दूसरे देश या क्षेत्र को खरीद सकता है?



यह बयान भले ही राजनीतिक रणनीति या कूटनीतिक दबाव का हिस्सा रहा हो, लेकिन इसने अंतर्राष्ट्रीय कानून और संप्रभुता से जुड़े नियमों पर नई बहस छेड़ने का काम किया है। आधुनिक दौर में देश केवल भौगोलिक जमीन नहीं होते, बल्कि वहां की जनता, शासन व्यवस्था और स्वतंत्र पहचान भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

Donald Trump Greenland Controversy: International Law Rules On Can One Country Buy Another Country
Donald Trump Greenland Controversy - फोटो : ANI

अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार कोई भी देश ऐसी संपत्ति नहीं है जिसे पैसों के लेन-देन से खरीदा या बेचा जा सके। संयुक्त राष्ट्र चार्टर हर राष्ट्र को एक संप्रभु इकाई के रूप में मान्यता देता है। इसका सीधा अर्थ है कि किसी भी देश की जमीन, उसकी सरकार और वहां रहने वाले लोग स्वतंत्र होते हैं। 

Donald Trump Greenland Controversy: International Law Rules On Can One Country Buy Another Country
Donald Trump Greenland Controversy - फोटो : अमर उजाला

सरकारें कंपनियों की तरह अपने देश की मालिक नहीं होतीं। इस कारण सरकार के पास उसे बेचने या सौंपने का कोई कानूनी अधिकार नहीं होता है। हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय कानून का एक और अहम सिद्धांत है आत्मनिर्णय का अधिकार। इसमें किसी भी क्षेत्र की जनता को यह तय करने का अधिकार होता है कि वे किस देश के साथ रहना चाहते हैं या स्वतंत्र रहना चाहते हैं। 

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Donald Trump Greenland Controversy: International Law Rules On Can One Country Buy Another Country
Donald Trump Greenland Controversy - फोटो : amarujala.com

भले ही दो देशों की सरकारें आपसी सहमति से किसी क्षेत्र को हस्तांतरित करने की बात करें, लेकिन जब तक वहां की जनता की मंजूरी नहीं मिलती है, तब तक ऐसा समझौता वैध नहीं माना जाता है। गौर करने वाली बात है कि आज के समय सीधे खरीद संभव नहीं है, लेकिन आर्थिक संसाधनों की मदद से दबाव डाला जा सकता है। कई मामलों में देखने को मिला है कि कर्ज के बोझ तले दबे देश बंदरगाहों, द्वीपों या रणनीतिक ठिकानों को किसी दूसरे देश को लीज दे देते हैं। 

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Donald Trump Greenland Controversy: International Law Rules On Can One Country Buy Another Country
Donald Trump Greenland Controversy - फोटो : PTI

इसे डेट ट्रैफ डिप्लोमेसी कहा जाता है। चीन कई देशों को अपने डेट ट्रैफ डिप्लोमेसी में फंसा चुका है। वहीं इतिहास में ऐसे कई उदाहरण हैं, जहां पैसों के बदले भूमि का हंस्तातरण हुआ है, जैसे 1803 में लुइसियाना खरीद या 1867 में अलास्का खरीद। ध्यान देने वाली बात है कि ये सौदे औपनिवेशिक युग में हुए थे।

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