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Diwali Firecrackers: दिवाली पर हुई आतिशबाजी से धुंआ-धुंआ हुई दिल्ली, जहरीली हवा से AQI पहुंचा 999 के पास

Mon, 13 Nov 2023 01:39 PM IST
संकल्प सिंह यूटिलिटि डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
यूटिलिटि डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संकल्प सिंह Updated Mon, 13 Nov 2023 01:39 PM IST
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Diwali 2023 Firecracker Pollution And It's Impact Know The Global Warming Challanges Here
Diwali 2023 Firecrackers Pollution - फोटो : Istock

दुनिया ग्लोबल वार्मिंग नामक एक बहुत बड़ी त्रासदी के समक्ष खड़ी है। खतरा इस कदर बढ़ रहा है कि इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि अक्तूबर महीना जो बीता है वह पृथ्वी के सवा लाख साल के इतिहास में सबसे गर्म था। बढ़ते ग्रीन हाउस गैस के प्रभाव के कारण दुनियाभर में मौसम अजीबोगरीब ढंग से बदल रहे हैं। मौसम चक्र में होने वाले बदलाव का बुरा असर कृषि, स्वास्थ्य से लेकर हर एक क्षेत्र पर पड़ रहा है। अगर हम बढ़ते प्रदूषण पर रोक अभी नहीं लगाते हैं, तो आने वाले समय में समुद्र का जलस्तर काफी बढ़ जाएगा। इस कारण कई बड़े शहर जलमग्न हो जाएंगे और करोड़ों लोगों को दूसरी जगह प्रवास करना होगा। खतरा केवल यही नहीं रुकेगा पृथ्वी के गर्म होने से मौसम काफी खतरनाक हो जाएंगे। हीटवेव, बड़े-बड़े तूफान और असंतुलित मौसम चक्र का बुरा प्रभाव हमारी पृथ्वी के इकोसिस्टम पर पड़ेगा। खतरों की यह लिस्ट काफी लंबी है।



बीती रात देशभर में रौशनी के पर्व दीपावली को काफी धूमधाम के साथ मनाया गया। गौर करने वाली बात है कि सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली के दिन पटाखा फोड़ने पर प्रतिबंध को लेकर कई तरह के आदेश जारी किए थे। इसके बाद भी दिवाली की रात लोगों ने इन सभी आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुई जमकर आतिशबाजी की है।

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Diwali 2023 Firecrackers Pollution - फोटो : Istock

40 प्रतिशत तक खराब हो गई हवा की गुणवत्ता

बड़े पैमाने पर होने वाली आतिशबाजी के कारण दिल्ली एनसीआर, गाजियाबाद और कई दूसरे इलाकों में एयर क्वालिटी 40 प्रतिशत तक खराब हो गई। इस कारण एक्यूआई में एक असामान्य वृद्धि देखने को मिली है। बीते दिनों होने वाली बारिश के कारण दिल्लीवासियों को प्रदूषण से राहत मिली थी। हालांकि, दीपावली की रात बड़े पैमाने पर होने वाली आतिशबाजी से प्रदूषण का स्तर फिर से बढ़ चुका है।

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Diwali 2023 Firecrackers Pollution - फोटो : Istock

999 के आसपास पहुंच गया एक्यूआई

दिवाली से पहले जो एक्यूआई करीब 218 के आसपास था। वह कई जगहों पर बढ़कर 999 के आसपास पहुंच गया। आनंदविहार, ओखला, वजीरपुर, बवाना आदि विभिन्न जगहों के हालात काफी खराब हैं। प्रदूषण के बढ़े हुए स्तर के कारण इन इलाकों में विजिबिलिटी भी काफी कम हो गई।

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Diwali 2023 Firecrackers Pollution - फोटो : Istock

कैसे बनते हैं पटाखे

पटाखे ग्रीन हाउस गैसों को बढ़ाने में एक मुख्य भूमिका निभाते हैं। पटाखों को बनाने में बारूद का इस्तेमाल किया जाता है, जो कि पोटैशियम नाइट्रेट (75 प्रतिशत), चारकोल (15 प्रतिशत) और सल्फर (10 प्रतिशत) से मिलकर बनता है। इसे जब एक शेल में रखकर आग लगाई जाती है, तो इनके रिएक्शन से धमाका होता है। 

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Diwali 2023 Firecrackers Pollution - फोटो : Istock

पटाखों में कुछ खास तरह के मिनरल एलिमेंट को भी उपयोग में लाया जाता है, जिसकी वजह से पटाखों के फूटने पर अलग-अलग रंग देखने को मिलते हैं। इसमें बेरियम नाइट्रेट का इस्तेमाल किया जाता है, जिसके चलते हरा रंग देखने को मिलता है। एल्युमीनियम सफेद रंग के लिए, स्ट्रॉन्टियम लाल रंग और कॉपर नीले रंग के लिए। इन सभी कंपाउंड को साथ रखने के लिए बाइंडर्स को उपयोग में लाया जाता है। 

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