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New CM Oath Process: मुख्यमंत्री को राज्यपाल कौन-से दस्तावेज पढ़वाते हैं? जानें पद और गोपनीयता के शपथ में अंतर

Wed, 06 May 2026 06:06 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shikhar Baranawal Updated Wed, 06 May 2026 06:06 PM IST
सार

Role Of Governor In Oath: जब भी किसी राज्य में मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण होता है को उस दौरान कई ऐसी चीजें होती हैं, जिसको लेकर लोगों के मन में कई सवाल उठते हैं। फिलहाल 5 राज्यों के चुनावी नतीजों के बाद फिर वो प्रक्रिया आपको देखने को मिलेगी इसलिए आइए इस लेख में उन सवालों के जवाब जानते हैं।

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CM Oath Ceremony Decoded Understanding the Difference Between Oath of Office and Secrecy
शपथ ग्रहण समारोह (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : AI

Oath Of Chiefminister Rules:  4 मई को तमिलनाडु, बंगाल, पुडुचेरी, असम और केरल के चुनाव परिणाम आने के बाद अब इन राज्यों में नई सरकारों के गठन की प्रक्रिया शुरु हो गई है। इसी कड़ी में शपथ ग्रहण की तैयारी जोर-शोर से शुरू हो गई है। अक्सर लोगों के मन में यह जानने की उत्सुकता रहती है कि आखिर शपथ ग्रहण के दौरान राज्यपाल मुख्यमंत्री को दो अलग-अलग दस्तावेजों से शपथ क्यों दिलाते हैं, साथ ही 'पद' एवं 'गोपनीयता' की शपथ में मुख्य अंतर क्या है। 



दरअसल, शपथ ग्रहण समारोह के दौरान राज्यपाल मुख्यमंत्री को दो अलग-अलग दस्तावेजों के माध्यम से प्रतिज्ञा दिलाते हैं। बता दें कि पहले दस्तावेज में पद की शपथ होती है और दूसरी में गोपनियता की। संविधान की तीसरी अनुसूची में निर्धारित यह प्रक्रिया देश की सुरक्षा और लोकतांत्रिक गरिमा को बनाए रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है।

CM Oath Ceremony Decoded Understanding the Difference Between Oath of Office and Secrecy
Oath Ceremony - फोटो : AI

राज्यपाल कौन से दस्तावेज पढ़वाते हैं?

  • शपथ पत्र - राज्यपाल के पास संविधान की तीसरी अनुसूची में दर्ज प्रारूप वाला दस्तावेज होता है।
  • पद की शपथ - इसमें मुख्यमंत्री संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखने तथा देश की संप्रभुता बनाए रखने का वादा करते हैं।
  • हस्ताक्षर पुस्तिका - शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री एक आधिकारिक रजिस्टर पर हस्ताक्षर करते हैं, जिसे राज्यपाल प्रमाणित करते हैं।
CM Oath Ceremony Decoded Understanding the Difference Between Oath of Office and Secrecy
भारत का संविधान। - फोटो : अमर उजाला।

पद और गोपनियता के शपथ में अंतर

 

  • अगर आपने ध्यान दिया होगा तो देखा होगा कि राज्यपाल मुख्यमंत्री व अन्य मंत्रियों को भी दो अलग-अलग दस्तावेजों से शपथ दिलाते हैं।
  • पहले 'पद की शपथ' होती है, जिसमें मुख्यमंत्री संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा रखने और बिना किसी भेदभाव के निष्पक्ष रूप से अपने कर्तव्यों का पालन करने का वचन देते हैं।
  • वहीं, दूसरी 'गोपनीयता की शपथ' होती है, जिसके तहत वे यह प्रतिज्ञा करते हैं कि सरकार के संवेदनशील निर्णयों और गोपनीय जानकारियों को वे तब तक किसी के साथ साझा नहीं करेंगे, जब तक कि राजकाज के कार्यों के लिए ऐसा करना अनिवार्य न हो।
  • गोपनीयता की शपथ इसलिए जरूरी है ताकि राज्य की सुरक्षा और महत्वपूर्ण रणनीतियां गुप्त बनी रहें।
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Oath Ceremony - फोटो : AI

ज्यादातर मुख्यमंत्री ईश्वर की ही शपथ लेते हैं? 

  • आपने ये भी सुना होगा की जब भी मुख्यमंत्री शपथ लेते हैं तो उनका पहला वाक्य 'मैं ... इश्वर की शपथ लेता हूं ...' होता है। 
  • दरअसल, संविधान के अनुसार मुख्यमंत्री के पास 'ईश्वर के नाम पर' या 'सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान' करने के दो विकल्प होते हैं।
  • जिनकी धार्मिक आस्था होती है यानी जो लोग जो लोग आस्तिक हैं वे अक्सर ईश्वर की शपथ लेना पसंद करते हैं, हालांकि यह अनिवार्य नहीं है।
  • वहीं जो लोग नास्तिक हैं वे सिर्फ सत्य और निष्ठा की शपथ लेकर भी कार्यभार संभाल सकता है।
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CM Oath Ceremony Decoded Understanding the Difference Between Oath of Office and Secrecy
Oath Ceremony - फोटो : AI
शपथ ग्रहण के बाद की औपचारिकताएं
  • शपथ के तुरंत बाद राज्यपाल उस शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करते हैं, जो इस प्रक्रिया के कानूनी रूप से संपन्न होने का प्रमाण है।
  • शपथ लेने और हस्ताक्षर करने के साथ ही मुख्यमंत्री आधिकारिक रूप से अपने कार्यालय का कार्यभार संभालने के पात्र हो जाते हैं।
  • मुख्यमंत्री के बाद उनके कैबिनेट मंत्रियों को भी इसी प्रक्रिया के तहत पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई जाती है।
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