ट्रेन में लंबी यात्रा के दौरान परिवार और दोस्तों के साथ बैठने की इच्छा होना बिल्कुल आम बात है। कई बार एक ही परिवार के लोगों की सीटें अलग-अलग जगह मिल जाती हैं। ऐसे में यात्री आपस में सीट बदल लेते हैं ताकि सफर साथ में कट सके। लेकिन सीट बदलने और किसी दूसरी रिजर्व सीट पर अपनी मर्जी से जाकर बैठने में बड़ा अंतर है। अगर दो यात्री आपसी सहमति से अपनी सीटों की अदला-बदली करते हैं, तो स्थिति अलग हो सकती है। लेकिन किसी खाली दिख रही या किसी अन्य यात्री के नाम पर रिजर्व सीट को बिना अनुमति अपनी सीट मानकर बैठ जाना मुश्किल पैदा कर सकता है। रेलवे में हर रिजर्व बर्थ का अधिकार तय यात्री के पास होता है। ऐसे मामलों में सबसे सही तरीका TTE से बात करना है। अगर किसी यात्री को परिवार के पास बैठने के लिए सीट बदलनी है या दूसरी बर्थ की जरूरत है तो TTE रेलवे के नियमों के अनुसार उपलब्ध सीटों और परिस्थितियों को देखकर मदद कर सकता है। इसलिए खुद फैसला लेने के बजाय TTE की अनुमति लेना ज्यादा सुरक्षित रहता है।
परिवार के पास बैठने के लिए बदल ली सीट? पहले जान लें रेलवे का यह जरूरी नियम
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला
Published by: दीक्षा पाठक
Updated Tue, 01 Sep 2026 10:17 AM IST
सार
Changed Your Seat: ट्रेन में सफर के दौरान परिवार या दोस्तों के पास बैठने के लिए सीट बदलना सामान्य बात है, लेकिन किसी दूसरी रिजर्व सीट पर बिना अनुमति बैठना परेशानी खड़ी कर सकता है। रेलवे नियमों के तहत सीट बदलने या खाली बर्थ लेने के लिए TTE से बात करना जरूरी है। कन्फर्म टिकट किसी दूसरे को देना या बिना कन्फर्म टिकट रिजर्व कोच में यात्रा करना भी नियमों के दायरे में आता है।
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