What will happen if moon disappears: साल 1955 में वचन फिल्म का एक गाना "चंदा मामा दूर के" काफी लोकप्रिय हुआ। इस गाने को आपने भी कभी न कभी जरूर सुना होगा। गौर करने वाली बात यह है कि चांद के ऊपर जब यह गाना लिखा गया था। उस दौरान भारत को आजाद हुए महज कुछ ही साल हुए थे। यह वह समय था जब भारत की वैज्ञानिक उन्नति काफी धीमी थी। इस दौरान इसरो का भी गठन नहीं हुआ था। इसरो की स्थापना साल 1969 में हुई। अपनी स्थापना के चार दशक बाद इसरो को चांद के ऑर्बिट में पहुंचने में सफलता मिली। 2008 में लॉन्च किए गए चंद्रयान मिशन ने भारतीय वैज्ञानिकों को नई प्रेरणा देने का काम किया। इस मिशन के बाद इसरो के वैज्ञानिक चंद्रयान 2 पर काम करना शुरू करते हैं। चंद्रयान 1 के लॉन्च होने के 11 साल बाद यानी 22 जुलाई, 2019 को चंद्रयान 2 को लॉन्च किया जाता है। इस मिशन का उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करना था। दुर्भाग्य से एक सॉफ्टवेयर ग्लिच के कारण चांद की सतह पर लैंडर क्रैश कर जाता है।
Chandrayaan 3: अगर चांद अचानक अपनी जगह से हो जाए गायब, तो ऐसी हो जाएगी पृथ्वी
हालांकि, अपनी इस असफलता से निराश न होकर इसरो दोबारा चंद्रयान 3 की तैयारी शुरू करता है। इसके 4 साल बाद 14 जुलाई, 2023 को चंद्रयान 3 को लॉन्च किया जाता है। चंद्रयान 3 का लैंडर कल यानी 23 अगस्त को चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कर सकता है। चंद्रमा अपने भीतर कई रहस्यों को छुपाए हुए है। इन्हीं रहस्यों को जानने के लिए दुनिया की बड़ी स्पेस एजेंसिया चंद्रयान, आर्टेमिस और लूना जैसे मिशन चांद पर भेज रही हैं। वहीं आज इन मिशनों से अलग हटकर हम चांद के बारे में एक रोचक कल्पना करते हैं। क्या कभी आपने इस बारे में सोचा है कि अगर चांद अचानक गायब हो जाए, तो उससे पृथ्वी पर क्या असर होगा?
पृथ्वी के संतुलन के पीछे चांद का एक बहुत बड़ा योगदान है। धरती के मौसम, समुद्र के ज्वार से लेकर हमारी स्लीप साइकिल को नियंत्रित करने में चांद एक बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। चंद्रमा हमारी धरती का सबसे करीबी खगोलीय उपग्रह है। ऐसे में इसके गुरुत्वाकर्षण का असर पृथ्वी पर पड़ता है। हमारी घूमती पृथ्वी को जब चांद का गुरुत्वाकर्षण अपनी ओर खींचता है, तो समुद्र और महासागर प्रतिक्रिया करते हैं। इसी वजह से बड़े-बड़े ज्वार आते हैं। चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण के कारण ही पृथ्वी 23.5 डिग्री पर सूर्य के अनुरूप झुकी है। यही एक बड़ी वजह है, जिसके चलते पृथ्वी पर कई मौसम और रहने लायक जलवायु है।
अगर चंद्रमा अचानक गायब हो जाता है, तो उसका गुरुत्व प्रभाव खत्म हो जाता है। इससे हमारी घूमती पृथ्वी पर चंद्रमा का जो प्रभाव पड़ता है। वह भी खत्म हो जाएगा। ऐसे में पृथ्वी का एक दिन केवल 6 से 8 घंटों का होगा।
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चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के कम होने से पृथ्वी अभी के मुकाबले तीन से चार गुना ज्यादा तेज घूमेगी। ऐसा होने पर हम लोगों को 480 किलोमीटर से ज्यादा रफ्तार में हवाओं का सामना करना होगा। ऐसी परिस्थिति में कीड़े, पक्षी और कई जीव जंतु पृथ्वी पर जिंदा नहीं बचेंगे। इसके अलावा समुद्र में रहने वाले कई जीव पूरी तरह विलुप्त हो जाएंगे। गौर करने वाली बात यह है कि इस दौरान भी समुद्रों में ज्वार आएंगे, लेकिन वह चांद की जगह सूर्य के गुरुत्वाकर्षण के खिंचाव से नियंत्रित होंगे। सूर्य के गुरुत्व प्रभाव के कारण इन महासागरों से काफी बड़ी-बड़ी लहरें उठेंगी। ये लहरें पूरी तरह कॉस्ट लाइन को डुबा देंगी। इस कारण लाखों की संख्या में जानें जाएंगी।