Chandrayaan 3: आज वैश्विक अर्थव्यवस्था को विस्तार और दुनिया की जरूरतों को पूरा करने के लिए हमारी पृथ्वी समर्थ नहीं है। ऐसे में अब दुनिया की निगाहें धरती से ऊपर उठ कर स्पेस की तरफ देख रही हैं। स्पेस अब वह जरिया बन रहा है, जहां से पृथ्वी की ऊर्जा की जरूरतों को पूरा किया जा सकता है। इस कारण आने वाले समय में स्पेस कॉलोनाइजेशन, एस्टेरॉयड माइनिंग और स्पेस टूरिज्म की दिशा में कई नए आयाम खुलने वाले हैं। ऐसे में स्पेस लॉजिस्टिक, सैटेलाइट और ह्यूमन लॉन्चिंग के क्षेत्र में अरबों डॉलर्स का बड़ा बाजार भविष्य में आकार लेगा। भविष्य की इस नब्ज को देखते हुए हमारा इसरो भी पीछे नहीं है। आज इसरो की गिनती दुनिया की सर्वश्रेष्ठ स्पेस एजेंसियों में की जाती है। मंगलयान, चंद्रयान जैसे कई कामयाब मिशन्स को अंजाम देने के बाद इसरो अब चंद्रयान-3 लॉन्च करने की तैयारी कर चुका है। इसरो 14 जुलाई, 2023 को दोपहर 2 बजकर 35 मिनट पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से चंद्रयान 3 लॉन्च करने जा रहा है। अगर चंद्रयान 3 लैंडर सफलतापूर्वक चांद की सतह पर लैंड करता है। इस स्थिति में भारत ऐसा करने वाला चौथा देश बन जाएगा।
Chandrayaan 3: चांद पर है इंसान की कब्र, जानिए चांद से जुड़ा यह हैरान करने वाला तथ्य
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चंद्रमा सदा से हमारे लिए उत्सुकता का केंद्र बना रहा है। पौराणिक कथाओं में चंद्रमा जहां देवता, सौंदर्य और कलाओं के स्वामी मानें गए हैं। शायरियों और कविताओं में चंद्रमा प्रेमी हृदयों के भीतर उपमा बनकर अलंकृत हुआ है। वहीं आधुनिक विज्ञान की दृष्टि ने चंद्रमा को एक उपग्रह के रूप में देखा है जो न केवल पृथ्वी की परिक्रमा करता है बल्कि पृथ्वी वासियों के लिए किसी मुसीबत के वक्त पनाहगाह के रूप में भी देखा जाता है। चंद्रमा आज अंतरिक्ष में वैज्ञानिकों के लिए सबसे करीब दिखाई पड़ने वाली जिज्ञासा है।
वहीं शीतयुद्ध के दौरान अमेरिका और सोवितय संघ के बीच शुरू हुई स्पेस रेस का नतीजा यह निकला कि साल 1969 में पहली बार नील आर्मस्ट्रांग और बज एल्ड्रिन वो शख्स बने, जिन्होंने चांद पर अपने कदम रखें।
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गौरतलब बात है कि साल 1972 में Gene cernan के बाद से अब तक कोई दूसरा एस्ट्रोनॉट चांद पर नहीं गया है। वहीं क्या आपको इस बारे में पता है कि एक इंसान की कब्र भी चांद पर है। इस शख्स का नाम यूजीन मर्ले शूमेकर है। यूजीन की गिनती दुनिया के महान वैज्ञानिकों में की जाती है। इन्होंने दुनिया के कई महान अंतरिक्ष यात्रियों को प्रशिक्षित करने का काम किया था।
आपको जानकर आश्चर्य होगा कि यूजीन ही वो पहले शख्स थे, जिन्होंने यूटा और कोलोराडो में यूरेनियम की खोज को अंजाम दिया था। विज्ञान के क्षेत्र में कई अभूतपूर्व खोजों को अंजाम देने के लिए इन्हें तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने सम्मानित किया। यूजीन मर्ले शूमेकर की मौत एक सड़क हादसे में हुई थी। इसके बाद नासा द्वारा इनकी कब्र को चांद पर बनाया गया। यूजीन की अस्थियों के राख को नासा द्वारा चांद पर ले जाकर दफन किया गया था।