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क्या कोई व्यक्ति अपनी जीवनकाल में एक से अधिक बार वसीयत बदल सकता है? जानें नियम

Tue, 29 Sep 2026 07:37 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shikhar Baranawal Updated Tue, 29 Sep 2026 07:37 PM IST
सार

Changing A Will In India: अक्सर ऐसा होता है कि वसीयत बनाने के बाद लोगों को उसमें बदलाव करने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में लोगों के मन ये बड़ा सवाल आता है कि वसीयत में कितनी बार बदलाव कर सकते हैं। आइए इस लेख में इसी के बारे में समझते हैं।

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Can a Person Change Their Will Multiple Times in a Lifetime? Know the Legal Rules in hindi
वसीयत बदलने के नियम - फोटो : AI

Will Amendment Rules: अपनी संपत्ति का मालिकाना हक किसी को सौंपने के लिए वसीयत बनाना एक बेहद महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया मानी जाती है। अक्सर परिस्थितियां, पारिवारिक संबंध और निजी प्राथमिकताएं समय के साथ बदलती रहती हैं, जिससे लोग अपनी बनाई हुई पुरानी वसीयत में बदलाव करना चाहते हैं। 



ऐसे में आम लोगों के मन में यह सवाल जरूर उठता है कि क्या कोई व्यक्ति अपने जीवनकाल में एक से अधिक बार अपनी वसीयत में संशोधन कर सकता है या नई वसीयत बना सकता है। भारतीय उत्तराधिकार कानून के अनुसार कोई भी अपने जीवनकाल में जितनी बार चाहे वसीयत बदल सकता है। आइए इस लेख में समझते हैं कि इस बारे में कानूनी नियम क्या कहते हैं और यह प्रक्रिया कैसे पूरी की जाती है।

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जितनी बार चाहें बदल सकते हैं अपनी वसीयत - फोटो : Adobe Stock

जितनी बार चाहें बदल सकते हैं अपनी वसीयत

  • कानून के अनुसार कोई भी व्यक्ति अपने जीवनकाल में कितनी भी बार अपनी वसीयत बदल सकता है।
  • इसके लिए संशोधनों की संख्या पर कोई कानूनी सीमा या पाबंदी नहीं है।
  • जब तक वसीयतकर्ता जीवित है और मानसिक रूप से स्वस्थ है, वह अपनी इच्छा से संपत्ति के बंटवारे के नियम बदल सकता है।
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नई वसीयत बनते ही पुरानी हो जाती है कैंसिल - फोटो : Adobe Stock

नई वसीयत बनते ही पुरानी हो जाती है कैंसिल

  • जब भी आप कोई नई वसीयत बनाते हैं, तो पुरानी वसीयत अपने आप कैंसिल हो जाती है।
  • हालांकि, किसी भी कानूनी विवाद से बचने के लिए नई वसीयत में यह स्पष्ट रूप से लिखना चाहिए कि यह आपकी अंतिम वसीयत है और इससे पहले बनाई गईं सभी पिछली वसीयतें पूरी तरह से कैंसिल मानी जाएं।
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छोटे बदलावों के लिए कोडिसिल का उपयोग - फोटो : Adobe Stock

छोटे बदलावों के लिए कोडिसिल का उपयोग

  • अगर आप पूरी वसीयत दोबारा नहीं लिखना चाहते और केवल कुछ छोटे बदलाव करना चाहते हैं, तो इसके लिए 'कोडिसिल' का उपयोग कर सकते हैं।
  • यह मूल वसीयत का ही एक पूरक दस्तावेज होता है, जिसे मुख्य वसीयत के साथ जोड़कर किसी एक हिस्से या नाम में संशोधन आसानी से किया जा सकता है।
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रजिस्टर्ड वसीयत में संशोधन की सही प्रक्रिया - फोटो : Adobe Stock

रजिस्टर्ड वसीयत में संशोधन की सही प्रक्रिया

  • अगर आपकी पहली वसीयत सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्टर्ड थी, तो उसमें बदलाव करने के लिए नई वसीयत को भी रजिस्टर्ड कराना कानूनी रूप से अधिक सुरक्षित माना जाता है।
  • इसके अलावा, नई वसीयत पर भी दो गवाहों के हस्ताक्षर होना अनिवार्य है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार का विवाद पैदा न हो।
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